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गंगा किनारे की राजनीति: चार राज्यों में बीजेपी मजबूत, झारखंड अब भी चुनौती

भारत की राजनीति में गंगा नदी का विशेष महत्व माना जाता है। गंगोत्री से लेकर गंगासागर तक करीब 2500 किलोमीटर के इस सफर में गंगा उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से होकर गुजरती है। इन राज्यों को देश की सत्ता का अहम गलियारा भी कहा जाता है।

पिछले कुछ वर्षों में इन इलाकों की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। गंगा किनारे बसे अधिकांश राज्यों में अब भारतीय जनता पार्टी ने अपनी मजबूत पकड़ बना ली है। हालांकि, झारखंड अभी भी ऐसा राज्य है जहां बीजेपी को सत्ता से बाहर रहना पड़ रहा है।

उत्तराखंड: बीजेपी का मजबूत आधार
गंगा का उद्गम उत्तराखंड से होता है और यह राज्य बीजेपी के सबसे मजबूत गढ़ों में गिना जाता है। पिछले कई वर्षों से यहां पार्टी की सरकार है और संगठन भी मजबूत स्थिति में है। धार्मिक पर्यटन, चारधाम परियोजना और केंद्र सरकार की योजनाओं ने यहां पार्टी की स्थिति को और मजबूत किया है।

उत्तर प्रदेश: राजनीतिक केंद्र में पकड़
गंगा का सबसे लंबा हिस्सा उत्तर प्रदेश में बहता है। काशी, प्रयागराज और कानपुर जैसे बड़े शहर इसी के किनारे हैं। Yogi Adityanath के नेतृत्व में बीजेपी ने यहां लगातार अपनी पकड़ मजबूत रखी है। अयोध्या में राम मंदिर और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट्स ने भी पार्टी को राजनीतिक बढ़त दिलाई है। वाराणसी, जो Narendra Modi का संसदीय क्षेत्र है, बीजेपी के लिए प्रतीकात्मक रूप से भी काफी अहम है।

बिहार: गठबंधन के सहारे मजबूती
बिहार में गंगा बक्सर से प्रवेश करती है और पटना सहित कई प्रमुख शहरों से होकर गुजरती है। यहां बीजेपी, Nitish Kumar के साथ गठबंधन में सरकार चला चुकी है और राजनीतिक रूप से मजबूत बनी हुई है। राज्य में पार्टी का जनाधार धीरे-धीरे बढ़ा है, खासकर गंगा किनारे के इलाकों में।

पश्चिम बंगाल: तेजी से बढ़ता प्रभाव
पश्चिम बंगाल में गंगा हुगली नदी के रूप में बहती है और गंगासागर में मिलती है। यहां लंबे समय तक वामपंथ और बाद में तृणमूल कांग्रेस का दबदबा रहा। लेकिन पिछले चुनावों में बीजेपी ने अपनी उपस्थिति मजबूत की है। पार्टी अब राज्य में प्रमुख विपक्ष के रूप में उभरी है और भविष्य में सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रही है।

झारखंड: अभी भी चुनौती कायम
झारखंड में गंगा का प्रवाह सीमित है, लेकिन राजनीतिक रूप से यह राज्य बीजेपी के लिए अहम बना हुआ है। फिलहाल यहां Hemant Soren के नेतृत्व में झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस की सरकार है। बीजेपी लगातार यहां अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है, खासकर आदिवासी क्षेत्रों में।

आगे की राह
गंगा किनारे के चार राज्यों में बीजेपी की मजबूत स्थिति है, लेकिन झारखंड अभी भी पार्टी के लिए चुनौती बना हुआ है। आने वाले चुनावों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बीजेपी इस राज्य में भी सत्ता हासिल कर पाती है या नहीं।