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जिम्मेदार कौन? ठेकेदार की लापरवाही से टूटी पेयजल पाइपलाइन, आधे शहर की पानी सप्लाई प्रभावित

PWD, वन विभाग और ठेकेदार के बीच जिम्मेदारी का खेल, जनता भुगत रही खामियाजा

महासमुंद। विकास कार्यों की कीमत आखिर आम जनता कब तक चुकाती रहेगी? महासमुंद शहर में तुमगांव रोड स्थित ईदगाह के आगे सड़क निर्माण कार्य के दौरान हुई एक बड़ी लापरवाही ने यही सवाल खड़ा कर दिया है। निर्माण कार्य में लगे ठेकेदार के कर्मचारियों ने बुलडोजर से नगर पालिका की मुख्य पेयजल पाइपलाइन क्षतिग्रस्त कर दी, जिसके चलते शहर की बड़ी आबादी की जलापूर्ति प्रभावित हो गई।

हैरानी की बात यह है कि पाइपलाइन टूटने के बाद उसे सुधारने की जिम्मेदारी लेने के बजाय संबंधित विभाग और एजेंसियां एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने में जुट गए हैं। ठेकेदार पक्ष का कहना है कि पाइपलाइन वन विभाग बनवाएगा, जबकि वन विभाग का दावा है कि यह जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी या निर्माण एजेंसी की है।

जनता को नहीं मिला जवाब

पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने के कारण शहर के एक बड़े हिस्से को शाम की पानी सप्लाई नहीं मिल सकी। गर्मी और जल संकट के बीच लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा, लेकिन अब तक किसी भी विभाग ने यह स्पष्ट नहीं किया कि नुकसान की भरपाई कौन करेगा और पाइपलाइन कब तक दुरुस्त होगी।

पहले भी हो चुका है ऐसा मामला

यह पहला अवसर नहीं है जब विभागीय लापरवाही का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। कलेक्ट्रेट रोड चौड़ीकरण के दौरान भीम मारुति गैरेज के सामने वन विभाग द्वारा पेड़ उखाड़ने के दौरान गैरेज का शटर और टीन शेड क्षतिग्रस्त हो गया था। प्रभावित व्यक्ति को आज तक न तो मुआवजा मिला और न ही नुकसान की भरपाई।

उस मामले में भी वन विभाग और अन्य एजेंसियां एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालती रहीं, लेकिन कार्रवाई किसी पर नहीं हुई।

प्रशासन से बड़े सवाल

  • सड़क निर्माण के दौरान भूमिगत पाइपलाइन की जानकारी किसके पास थी?
  • यदि जानकारी थी तो सुरक्षा उपाय क्यों नहीं किए गए?
  • पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने के लिए जिम्मेदार कौन है?
  • जनता को हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
  • क्या ठेकेदार पर कोई कार्रवाई होगी?
  • क्या प्रशासन संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करेगा?

जवाबदेही तय नहीं होगी तो दोहराई जाएंगी ऐसी घटनाएं

शहर में लगातार विकास कार्य चल रहे हैं, लेकिन यदि विभागों के बीच समन्वय और जवाबदेही तय नहीं होगी तो ऐसी घटनाएं आगे भी होती रहेंगी। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब जनता को परेशानी हो रही है, तब जिम्मेदारी लेने के लिए कोई आगे क्यों नहीं आ रहा?

महासमुंद की जनता अब प्रशासन से जवाब चाहती है, बहाने नहीं।

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