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बिना लीज के रेत का साम्राज्य! जोंक-कांदाजरी नदी से रोज निकल रहे सैकड़ों वाहन, सड़क और मंदिर के नाम पर खुलेआम वसूली

WebMorcha Ground Report: रसीद बुक से लेकर घाटों पर वसूली तक, बागबाहरा क्षेत्र में अवैध रेत कारोबार की पूरी पड़ताल

दिलीप शर्मा/महासमुंद। महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखंड में अवैध रेत खनन का कारोबार किस कदर बेलगाम हो चुका है, इसकी तस्वीरें और मौके से जुटाए गए दस्तावेज खुद कहानी बयां कर रहे हैं। जोंक और कांदाजरी नदी के कई घाटों से बिना किसी वैध खनिज लीज के बड़े पैमाने पर रेत निकाली जा रही है। हैरानी की बात यह है कि रेत से भरे वाहनों से खुलेआम 300-300 रुपये की वसूली भी की जा रही है और इसके लिए बाकायदा रसीदें काटी जा रही हैं।

सुबह 3 बजे से शुरू हो जाता है खेल

स्थानीय लोगों के अनुसार डीही टेमरी, परसाभदेर, भुसड़ी, बहरनडीह, सिवनी, करहीडीह, सोनामुंडी और खेमड़ा घाटों में तड़के 3 बजे से ही रेत खनन शुरू हो जाता है। नदी घाटों में जेसीबी और चैन माउंटेन मशीनें उतरती हैं और दिन निकलने से पहले दर्जनों वाहन रेत भरकर रवाना हो जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रोजाना सैकड़ों ट्रैक्टर और भारी वाहन छत्तीसगढ़ से ओडिशा की ओर रेत लेकर जाते हैं।

बागबाहरा क्षेत्र में रेत परिवहन करने वाले वाहनों से मंदिर सहायतार्थ राशि के नाम पर काटी गई रसीद
परसाभदेर और भुसड़ी घाट में रेत वाहनों से 300 रुपये तक की राशि वसूले जाने के लिए उपयोग की जा रही रसीद बुक।

सड़क मरम्मत के नाम पर वसूली का खुला खेल

ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान ऐसी रसीदें सामने आई हैं जिनमें “रोड मरम्मत सहयोग राशि, ग्राम टेमरी, विकासखंड बागबाहरा, जिला महासमुंद” छपा हुआ है। रसीद पर प्रति वाहन 300 रुपये तक की राशि दर्ज है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि सड़क मरम्मत के नाम पर वसूली गई यह रकम किस खाते में जमा हो रही है? क्या इसके लिए किसी सरकारी विभाग से अनुमति ली गई है? और यदि यह पंचायत स्तर का उपक्रम है तो उसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड क्यों नहीं दिख रहा?

बागबाहरा क्षेत्र में रेत परिवहन करने वाले वाहनों से मंदिर सहायतार्थ राशि के नाम पर काटी गई रसीद
परसाभदेर और भुसड़ी घाट में रेत वाहनों से 300 रुपये तक की राशि वसूले जाने के लिए उपयोग की जा रही रसीद बुक।

मंदिर के नाम पर भी कट रही रसीद

परसाभदेर और भुसड़ी घाट में एक और चौंकाने वाली व्यवस्था देखने को मिली। यहां “जय माता दी सार्वजनिक दुर्गा मंदिर, ग्राम दईजबांधा” के नाम पर वाहनों से राशि वसूली जा रही है। मौके पर मिली रसीद बुक इस बात की पुष्टि करती है कि रेत परिवहन करने वाले वाहनों से नियमित रूप से धन लिया जा रहा है। सवाल यह है कि मंदिर के नाम पर ली जा रही राशि का हिसाब-किताब कौन रख रहा है और क्या इसके लिए कोई अधिकृत समिति मौजूद है?

खनिज विभाग की चुप्पी पर सवाल

सबसे गंभीर पहलू यह है कि जिन घाटों से बड़े पैमाने पर रेत निकासी हो रही है, वहां वैध लीज की जानकारी सामने नहीं आई है। इसके बावजूद भारी मशीनों से खनन और रेत परिवहन जारी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि रोजाना सैकड़ों वाहन निकल रहे हैं तो यह गतिविधि प्रशासन और खनिज विभाग की नजरों से कैसे ओझल रह सकती है?

जांच और कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, खनिज विभाग और राजस्व अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि बिना लीज खनन और वसूली का यह खेल जारी रहा तो नदियों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा और शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होता रहेगा।

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