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मशीनों के बीच बचपन का सौदा! मेटल पार्क में नाबालिगों से 12 घंटे काम, कंपनी संचालक समेत 4 ठेकेदारों पर FIR

संयुक्त टीम की कार्रवाई में नाबालिगों से जोखिम भरे काम कराने का आरोप, 10 से 12 घंटे काम लेने की बात सामने आई; 5 बच्चों को लेकर मानव तस्करी की आशंका भी जताई

रायपुर। राजधानी रायपुर के खमतराई थाना क्षेत्र स्थित मेटल पार्क में मारुति नंदन स्ट्रक्चर्स प्राइवेट लिमिटेड यूनिट-2 में नाबालिग बच्चों से कथित तौर पर बाल श्रम कराने का मामला सामने आया है। मामले में पुलिस ने कंपनी के संचालक/संबंधित जिम्मेदारों और ठेकेदारों मुकेश शर्मा, अनुज चौधरी, शीतल एवं युवराज के खिलाफ अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

यह कार्रवाई 12 जून 2026 को जिला प्रशासन, पुलिस, श्रम विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन (AVA) की संयुक्त टीम द्वारा की गई थी। शिकायतकर्ता एवं AVA छत्तीसगढ़ के राज्य समन्वयक विपिन ठाकुर की ओर से 25 जून को थाना खमतराई में लिखित शिकायत प्रस्तुत की गई।

लोहे की मशीनों और खतरनाक उपकरणों के बीच कराया जा रहा था काम

शिकायत के मुताबिक संयुक्त टीम ने मेटल पार्क स्थित कारखाने में छापामार कार्रवाई की। टीम का दावा है कि वहां नाबालिग बच्चों से लोहे की बड़ी मशीनों और बिजली के खतरनाक उपकरणों वाले वातावरण में काम कराया जा रहा था।

दस्तावेजों के अनुसार कार्रवाई के दौरान कुल 9 नाबालिग बच्चों के बाल श्रम में संलिप्त होने की बात सामने आई, जबकि रेस्क्यू किए गए बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। शिकायत में यह भी उल्लेख है कि बच्चों से कथित तौर पर 10 से 12 घंटे तक काम कराया जाता था।

ठेकेदारों के नाम बच्चों ने बताए

रेस्क्यू के बाद बच्चों से हुई बातचीत का हवाला देते हुए शिकायत में कहा गया है कि मुकेश शर्मा, अनुज चौधरी, शीतल और युवराज नामक ठेकेदारों द्वारा उनसे काम कराया जा रहा था।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि बच्चों को काम का लालच देकर दूसरे स्थानों से लाया गया था। रेस्क्यू किए गए बच्चों में दो अनुसूचित जनजाति वर्ग से संबंधित होने तथा कुछ बच्चों के उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से होने का उल्लेख किया गया है। शिकायत में इस आधार पर संभावित बाल तस्करी की आशंका की जांच की मांग भी की गई है।

कई धाराओं में अपराध दर्ज

पुलिस के मुताबिक शिकायत और उपलब्ध दस्तावेजों के प्रथम दृष्टया अवलोकन के बाद भारतीय न्याय संहिता की धारा 146, 3(5), किशोर न्याय अधिनियम की धारा 79 तथा बालक एवं कुमार श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम की धारा 3 और 14 के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना में लिया गया है।

मामले में बाल श्रम, बच्चों से जोखिमपूर्ण काम कराने और बच्चों के संरक्षण से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी की आशंका की जांच की मांग

शिकायत में बाल श्रम के अलावा मानव/बाल तस्करी, बंधुआ मजदूरी और बच्चों के साथ कथित क्रूरता जैसे गंभीर पहलुओं की जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने संबंधित संचालकों, ठेकेदारों और बच्चों को काम का लालच देकर लाने वाले कथित लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है।

हालांकि, मानव तस्करी या बंधुआ मजदूरी के आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल पुलिस ने दर्ज अपराध के आधार पर विवेचना शुरू कर दी है।

राष्ट्रीय और राज्य स्तर के निर्देशों के बाद कार्रवाई

शिकायत में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग, श्रम आयुक्त छत्तीसगढ़, पुलिस मुख्यालय और छत्तीसगढ़ राज्य बाल संरक्षण समिति की ओर से जारी संबंधित पत्रों का हवाला दिया गया है। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन के निर्देश पर संयुक्त टीम ने कार्रवाई की थी।

शिकायतकर्ता ने बाल कल्याण समिति के आदेशों समेत अन्य दस्तावेज पुलिस को सौंपे हैं। मामले की प्रतिलिपि छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, CID पुलिस मुख्यालय, पुलिस आयुक्त रायपुर, कलेक्टर रायपुर और महिला एवं बाल विकास विभाग को भी भेजी गई है।

पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कारखाने में कितने बच्चों से काम कराया जा रहा था, उन्हें वहां कौन लेकर आया था और बाल श्रम के पीछे किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका थी या नहीं।

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