डेढ़ साल बाद शुरू हुई RO मशीनों की फिटिंग; गांजर में दो दिन में मशीन खराब, ओड़ियापारा में वर्षों से शो-पीस पानी टंकी, भालुचुआं में महीनों से बिजली बंद
महासमुंद। दिलीप शर्मा। जिले की आंगनबाड़ियों में बच्चों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से करीब डेढ़ साल पहले उपलब्ध कराई गई RO मशीनों की अब फिटिंग शुरू हो गई है। जिले की 1106 आंगनबाड़ियों में RO मशीनें लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। लेकिन WebMorcha की ग्राउंड रिपोर्ट में इन मशीनों को लेकर जो तस्वीर सामने आई है, वह योजना की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करती है।
कहीं RO मशीन तो लगा दी गई, लेकिन उसे पानी पहुंचाने के लिए बाल्टी और कूलर में इस्तेमाल होने वाली छोटी मोटर का सहारा लिया जा रहा है। कहीं पानी की टंकी वर्षों से शो-पीस बनी हुई है तो कहीं बिजली व्यवस्था महीनों से बंद है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब आंगनबाड़ी केंद्रों में पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं ही सुचारू नहीं हैं, तो RO मशीनें बच्चों को नियमित रूप से स्वच्छ पानी कैसे उपलब्ध कराएंगी?
गांजर में चार दिन पहले लगी RO, दो दिन बाद खराब
बुधवार को WebMorcha की टीम ने गांजर आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। यहां करीब चार दिन पहले RO मशीन की फिटिंग की गई थी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के अनुसार, मशीन करीब दो दिन चली और इसके बाद खराब हो गई।
हालांकि कार्यकर्ता ने दावा किया कि मशीन के चलने के दौरान दो दिनों तक बच्चों को RO से स्वच्छ पानी पिलाया गया।
लेकिन यहां भी RO मशीन को चलाने के लिए पानी की कोई स्थायी व्यवस्था नजर नहीं आई। पानी को एक बाल्टी अथवा बाल्टी जैसे बॉक्स में भरकर रखा जाता है और फिर छोटी मोटर के माध्यम से पानी को RO मशीन तक ऊपर पहुंचाया जाता है।
कूलर की छोटी मोटर से RO तक पहुंच रहा पानी
गांजर में सामने आई व्यवस्था के मुताबिक RO मशीन को सीधे पानी की पाइपलाइन से जोड़ने के बजाय कूलर में इस्तेमाल होने वाली छोटी पानी मोटर/पंप के जरिए पानी मशीन तक पहुंचाया जा रहा है।
इस व्यवस्था में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को लगातार निगरानी रखनी पड़ती है। बाल्टी में पर्याप्त पानी है या नहीं, मोटर कब चालू करनी है और पानी भर जाने के बाद मोटर कब बंद करनी है—इन सब पर नजर रखना जरूरी है।
यदि मोटर समय पर बंद नहीं हुई तो पानी ओवरफ्लो होने की आशंका है। वहीं पर्याप्त पानी नहीं होने पर मोटर और RO मशीन के संचालन में परेशानी हो सकती है।
यानी बच्चों के लिए स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने वाली मशीन को चलाने के लिए भी हर वक्त जुगाड़ और निगरानी पर निर्भर व्यवस्था सामने आ रही है।
भिलाईदादर में रायपुर से आया युवक, फोन पर मिले ‘टेक्नीशियन’ के निर्देश
RO फिटिंग की स्थिति देखने के दौरान WebMorcha की टीम भिलाईदादर गांव की आंगनबाड़ी भी पहुंची। यहां RO मशीन की फिटिंग के लिए रायपुर से एक युवक आया हुआ था।
भिलाईदादर की आंगनबाड़ी अपने स्वयं के भवन में संचालित नहीं हो रही है। यह शिक्षा विभाग के एक अतिरिक्त कमरे में संचालित हो रही है।
जब RO फिटिंग करने आए युवक से पूछा गया कि वह कहां से आया है और उसे किसने भेजा है, तो उसने फोन लगाकर एक अन्य व्यक्ति से बात कराई। फोन पर बात करने वाले व्यक्ति ने खुद को टेक्नीशियन बताते हुए अधिकारियों के निर्देश का हवाला दिया।
उसने बताया कि पानी की स्थायी व्यवस्था नहीं होने की स्थिति में कूलर की छोटी मोटर, पंच/बाल्टी और पानी भरकर RO मशीन तक पहुंचाने की व्यवस्था के जरिए मशीन को चालू किया जाना है।
हालांकि फोन पर खुद को टेक्नीशियन बताने वाले व्यक्ति की पहचान और उसके विभागीय अधिकृत होने की स्वतंत्र पुष्टि मौके पर नहीं हो सकी। इसलिए इस व्यवस्था के संबंध में विभाग से आधिकारिक स्पष्टीकरण अपेक्षित है।
गांजर ओड़ियापारा: पानी की टंकी लगी, लेकिन वर्षों से शो-पीस
गांजर ओड़ियापारा स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में भी पेयजल व्यवस्था की अलग तस्वीर सामने आई। यहां आंगनबाड़ी में पानी की टंकी तो लगी हुई है, लेकिन स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार यह टंकी बीते कई वर्षों से शो-पीस बनी हुई है।
टंकी मौजूद होने के बावजूद पानी की नियमित व्यवस्था नहीं होने के कारण यहां भी RO मशीन को जुगाड़ के सहारे चलाने की व्यवस्था की गई है।
यानी सरकारी व्यवस्था के तहत टंकी भी मौजूद है और अब RO मशीन भी लगाई जा रही है, लेकिन बच्चों तक नियमित पानी पहुंचाने की व्यवस्था अब भी सवालों के घेरे में है।
भालुचुआं: कई महीनों से बिजली बंद, RO कैसे चलेगी?
भालुचुआं स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में समस्या पानी से आगे बढ़कर बिजली तक पहुंच गई। यहां बिजली व्यवस्था खराब होने के कारण कई महीनों से बिजली बंद होने की जानकारी सामने आई।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि केंद्र में बिजली ही उपलब्ध नहीं है, तो RO मशीन का संचालन कैसे होगा? क्या मशीन के लिए अलग बिजली व्यवस्था की जाएगी या बच्चों को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने की योजना भी यहां किसी वैकल्पिक जुगाड़ पर निर्भर रहेगी?
डेढ़ साल बाद शुरू हुई फिटिंग, अब सामने आया असली सवाल
आंगनबाड़ियों में RO मशीनें करीब डेढ़ साल पहले उपलब्ध कराई गई थीं। लंबे समय तक कई मशीनें डिब्बों में बंद पड़ी रहीं। WebMorcha ने जब इस मुद्दे को उठाया तो विभाग की ओर से RO फिटिंग का रोस्टर जारी किया गया और अब अलग-अलग केंद्रों में मशीनें स्थापित की जा रही हैं।
उखरा सेक्टर की पर्यवेक्षक रूपवती पारेश्वर ने RO फिटिंग का रोस्टर साझा करते हुए बताया था कि अलग-अलग केंद्रों में क्रमवार फिटिंग की जा रही है। रोस्टर के अनुसार 21 अगस्त को घुंचापाली और कसेकेरा, 22 अगस्त को सिर्री और तेंदुकोना, 23 अगस्त को कोमाखान और उखरा तथा 24 अगस्त को पटपरपाली और टुहलु में फिटिंग का कार्यक्रम रखा गया था।
वहीं बागबहरा और मुंगासेर में 19 अगस्त को तथा मामाभांजा और खम्हरिया सेक्टर में 16 और 17 अगस्त को RO फिटिंग का कार्य पूरा होने की जानकारी दी गई थी।
अब फिटिंग शुरू होने के बाद सवाल का दूसरा चरण सामने है—क्या ये मशीनें वास्तव में नियमित रूप से चल भी पाएंगी?
1106 मशीनों के सामने पानी-बिजली की चुनौती
महासमुंद जिले में 1106 आंगनबाड़ियों में RO मशीनें लगाए जाने की जानकारी है। इतने बड़े स्तर पर योजना लागू होने के बावजूद यदि केंद्रों में पानी और बिजली की बुनियादी व्यवस्था दुरुस्त नहीं है, तो RO मशीनों का नियमित संचालन चुनौती बन सकता है।
RO मशीन लगाने के साथ ही प्रत्येक केंद्र में पर्याप्त पानी का स्रोत, नियमित जलापूर्ति, बिजली, मशीन के रखरखाव और खराब होने पर तत्काल मरम्मत की व्यवस्था जरूरी है।
गांजर में दो दिन बाद मशीन खराब होना और दूसरे केंद्रों में पानी-बिजली की समस्या यह संकेत देती है कि सिर्फ मशीन पहुंचाना या फिटिंग कर देना पर्याप्त नहीं है।
सवाल सिर्फ RO का नहीं, व्यवस्था का है
बच्चों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना आंगनबाड़ी केंद्रों की बुनियादी जरूरतों में शामिल है। ऐसे में RO मशीनों की स्थापना निश्चित रूप से अच्छी पहल है, लेकिन इसकी सफलता तभी मानी जाएगी जब बच्चों को रोजाना, सुरक्षित और आसानी से स्वच्छ पानी उपलब्ध हो।
यदि किसी केंद्र में पानी के लिए बाल्टी भरनी पड़े, कूलर की मोटर से पानी RO तक चढ़ाना पड़े, पानी की टंकी वर्षों से बेकार पड़ी हो या बिजली महीनों से बंद हो, तो योजना की वास्तविक सफलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब विभाग के सामने चुनौती सिर्फ 1106 आंगनबाड़ियों में RO लगाने की नहीं, बल्कि 1106 केंद्रों में उन्हें नियमित रूप से चलाने की व्यवस्था करने की है।
क्योंकि RO मशीन लगने से पानी शुद्ध नहीं होगा—उसे चलाने के लिए पानी, बिजली और स्थायी व्यवस्था भी चाहिए।

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