महासमुंद-नुआपाड़ा सीमा का मामला: युवक की मां ने टुहलू चौकी में दर्ज कराई FIR, युवती के भाई ने ओडिशा के धरमबांधा थाने में दी शिकायत; भट्ठा सरदार जयंत गिरी गोस्वामी और सहयोगी पुनीत राम ठाकुर के नाम आए सामने
महासमुंद। रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में मजदूरी के लिए जाने वाले ग्रामीणों के पलायन की कहानियां अक्सर दर्द और बेबसी से भरी होती हैं। लेकिन छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा से सामने आया एक ताजा मामला कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आरोप है कि युवक-युवती को उनके परिवारों को बिना बताए उत्तर प्रदेश के ईंट भट्ठे में काम के लिए ले जाने की तैयारी थी। मामला तब खुला, जब दोनों के घर नहीं लौटने पर एक तरफ युवक की मां ने पुलिस चौकी में FIR दर्ज कराई तो दूसरी तरफ युवती के भाई ने ओडिशा के धरमबांधा थाने में गुमशुदगी की शिकायत दी। दोनों परिवारों की शिकायतों के बाद ईंट भट्ठों में मजदूरों को ले जाने वाले सरदारों की भूमिका भी चर्चा में आ गई है।
मामला महासमुंद जिले के कोमाखान थाना क्षेत्र के ग्राम द्वारतराकला और ओडिशा के नुआपाड़ा जिले के धरमबांधा थाना क्षेत्र के ग्राम तोर्रा से जुड़ा है। द्वारतराकला निवासी सुरेंद्र बरिहा (26) और तोर्रा निवासी ओमबाई केवट (21) 28 अक्टूबर 2026 को अपने-अपने घरों से निकले थे। दोनों के वापस नहीं लौटने पर परिवारों ने तलाश शुरू की, लेकिन शुरुआती तौर पर कोई जानकारी नहीं मिली।
मां ने दर्ज कराई FIR, अपहरण की आशंका
द्वारतराकला निवासी सुरेंद्र बरिहा के घर नहीं लौटने पर उसकी मां चंदाबाई बरिहा ने पुलिस चौकी टुहलू में लिखित आवेदन दिया। परिजनों ने आसपास और रिश्तेदारों के यहां तलाश की, लेकिन सुराग नहीं मिला। पुलिस ने 31 अक्टूबर को गुम इंसान क्रमांक 43/26 कायम किया। इसके बाद भारतीय न्याय संहिता की धारा 140(3) के तहत अज्ञात व्यक्ति के विरुद्ध FIR क्रमांक 0195/26 दर्ज कर जांच शुरू की।
युवती के भाई ने भी धरमबांधा थाने में दी शिकायत
दूसरी ओर ओडिशा के ग्राम तोर्रा निवासी नीलकंठ केवट ने अपनी बहन ओमबाई केवट के लापता होने की शिकायत धरमबांधा थाने में की। आवेदन के मुताबिक, ओमबाई 28 अक्टूबर को सुबह करीब 11 बजे घर के बाहर बस में बैठकर चली गई थी। काफी देर तक घर नहीं लौटने पर परिजनों ने खोजबीन की। भाई ने शिकायत में आशंका जताई कि उसकी बहन द्वारतराकला निवासी सुरेंद्र बरिहा के साथ गई है।
भट्ठा सरदारों के नाम आए सामने
युवती के भाई ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि युवक-युवती उत्तर प्रदेश जाने के लिए भट्ठा सरदार जयंत गिरी गोस्वामी के संपर्क में थे। इस मामले में सहयोगी पुनीत राम ठाकुर, पिता प्रणव कुमार ठाकुर का नाम और मोबाइल नंबर 9244825215 भी आवेदन में उल्लेखित है। शिकायत के अनुसार, दोनों को उत्तर प्रदेश के ईंट भट्ठे तक ले जाने की बात सामने आई है।
सबसे गंभीर पहलू यह है कि परिवारों को कथित तौर पर इसकी जानकारी नहीं थी कि युवक-युवती दूसरे राज्य में मजदूरी के लिए जाने वाले हैं। बताया जा रहा है कि रायपुर में भट्ठा सरदारों पर दबाव बनने के बाद दोनों की वापसी संभव हुई। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
पुलिस बोली- दोनों बालिग, द्वारतराकला में होने की मिली जानकारी
धरमबांधा थाना प्रभारी दास ने बताया कि युवक और युवती के वर्तमान में द्वारतराकला में होने की जानकारी मिली है। दोनों बालिग हैं। मामले में भट्ठा सरदारों के नाम भी सामने आए हैं, जिनके मोबाइल फोन बंद बताए जा रहे हैं। युवती पक्ष ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई है। मामले को जांच में लिया गया है। टुहलू चौकी जाकर भी इस संबंध में जानकारी ली जाएगी।
10 दलालों को जेल भेजने के बाद भी नहीं थमा पलायन
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि कुछ दिन पहले ही छत्तीसगढ़ और ओडिशा पुलिस ने सीमावर्ती क्षेत्र में संयुक्त कार्रवाई करते हुए 10 प्रमुख भट्ठा दलालों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इसके बावजूद सीमावर्ती गांवों से दूसरे राज्यों के ईंट भट्ठों तक मजदूरों को ले जाने का सिलसिला जारी रहने की बात सामने आ रही है।
ग्रामीण इलाकों में रोजगार की कमी और आर्थिक मजबूरियां पलायन की बड़ी वजह हैं। इसी मजबूरी का फायदा उठाकर यदि बिचौलिए लोगों को बिना पूरी जानकारी और परिवार को बताए दूसरे राज्यों में ले जाने की कोशिश करते हैं, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। दूसरे राज्य पहुंचने के बाद मजदूरों के सामने मजदूरी, रहने, खाने और सुरक्षित वापसी जैसी समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।
सवाल सिर्फ दो लोगों का नहीं, पूरे पलायन नेटवर्क का है
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर सीमावर्ती गांवों में सक्रिय भट्ठा सरदारों और मजदूरों की भर्ती करने वाले बिचौलियों की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर 10 दलालों पर कार्रवाई के बाद भी यह सिलसिला क्यों जारी है? क्या दूसरे राज्यों में काम के लिए जाने वाले लोगों का सत्यापन किया जा रहा है? क्या उन्हें मजदूरी और काम की शर्तों की पूरी जानकारी दी जाती है?
दोनों युवक-युवती बालिग हैं और उनके व्यक्तिगत निर्णय का सम्मान जरूरी है, लेकिन रोजगार के नाम पर किसी को गुमराह कर या उसकी परिस्थितियों का फायदा उठाकर दूसरे राज्य ले जाने की कोशिश की जाती है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
एक मां अपने बेटे के घर लौटने की चिंता में पुलिस तक पहुंची, तो दूसरी ओर भाई अपनी बहन की तलाश में थाने पहुंचा। इन दो शिकायतों ने एक बार फिर उस पलायन की पीड़ा को सामने ला दिया है, जिसकी जड़ में ग्रामीण बेरोजगारी और बिचौलियों का कथित नेटवर्क छिपा है। अब देखना है कि पुलिस जांच में इस पूरे मामले की असलियत कितनी सामने आती है और सीमावर्ती गांवों से मजदूरों के असुरक्षित पलायन पर कब प्रभावी रोक लगती है।


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