महासमुंद। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीब परिवारों को पक्का मकान दिलाने के नाम पर कथित अवैध वसूली का मामला सामने आया है। बागबाहरा विकासखंड के ग्राम कोमा में रोजगार सहायिका और उनके पति पर ग्रामीणों ने आवास स्वीकृत कराने के नाम पर 3 हजार से लेकर 20 हजार रुपये तक लेने का आरोप लगाया है। मामले को लेकर ग्रामीणों ने कलेक्टर के समक्ष शिकायत दर्ज कराते हुए शपथ पत्र भी प्रस्तुत किए हैं। शिकायतकर्ताओं ने रोजगार सहायिका को पद से हटाने के साथ पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
आवास के नाम पर अलग-अलग हितग्राहियों से रकम लेने का आरोप
ग्राम कोमा के ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम पंचायत में पदस्थ रोजगार सहायिका और उनके पति द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने तथा मकान स्वीकृत कराने के नाम पर हितग्राहियों से कथित तौर पर अलग-अलग रकम ली गई। किसी से 3 हजार, किसी से 5 हजार तो किसी से 10 हजार और 20 हजार रुपये तक वसूले जाने की शिकायत की गई है।
ग्रामीणों ने अपने आरोपों के समर्थन में 10 रुपये के स्टांप पेपर पर शपथ पत्र तैयार कर कलेक्टर को सौंपे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि आवास दिलाने की उम्मीद में उन्होंने रकम दी, लेकिन इसके बावजूद उनके मकान स्वीकृत नहीं हुए। अब जब वे अपनी रकम वापस मांग रहे हैं तो उन्हें कथित तौर पर टालमटोल का सामना करना पड़ रहा है।
पहले भी कर चुके हैं शिकायत, कार्रवाई नहीं होने पर पहुंचे कलेक्ट्रेट
ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले को लेकर पहले भी संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायत की गई थी, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें दोबारा कलेक्ट्रेट पहुंचना पड़ा। शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि सभी हितग्राहियों के बयान दर्ज किए जाएं, कथित लेनदेन की जांच हो और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
जांच रिपोर्ट के आधार पर रोजगार सहायिका को नोटिस
मामले में जिला पंचायत प्रशासन ने जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिला पंचायत सीईओ के अनुसार, जनपद पंचायत से मामले की जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई है। रिपोर्ट के आधार पर संबंधित रोजगार सहायिका को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। रोजगार सहायिका का पक्ष और जांच में सामने आए तथ्यों का परीक्षण करने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
गरीबों के आवास के नाम पर वसूली के आरोप से उठे सवाल
प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य जरूरतमंद और पात्र परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है। ऐसे में योजना का लाभ दिलाने के नाम पर पैसे लेने के आरोप बेहद गंभीर हैं। यदि जांच में शिकायत सही पाई जाती है तो यह न केवल सरकारी योजना के क्रियान्वयन में गंभीर अनियमितता होगी, बल्कि जरूरतमंद परिवारों के साथ अन्याय भी होगा।
फिलहाल ग्रामीणों की शिकायत, प्रस्तुत शपथ पत्र और जिला पंचायत प्रशासन की जांच पर सबकी नजरें टिकी हैं। अब देखना होगा कि जांच में आरोपों की कितनी पुष्टि होती है और जिम्मेदारों के खिलाफ प्रशासन क्या कदम उठाता है।


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