महासमुंद में जल जीवन मिशन पर बड़ा खुलासा, 84.68% कवरेज के दावे पर सवाल, ठेकेदारों पर कार्रवाई की तैयारी

दिलीप शर्मा, महासमुंद। महासमुंद जिले में जल जीवन मिशन के कामकाज को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब विभाग ने भी अनियमितताओं को स्वीकार किया है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग के कार्यपालन अभियंता डी.पी. वर्मा ने स्पष्ट कहा कि कुछ ठेकेदारों ने लापरवाही बरती है और गड़बड़ी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

ठेकेदार पर नोटिस, ब्लैकलिस्ट की तैयारी

कार्यपालन अभियंता डी.पी. वर्मा के अनुसार,

  • ठेकेदार सरस्वती दुबे के खिलाफ नोटिस जारी किया जा रहा है।

  • जिन ठेकेदारों द्वारा गंभीर गड़बड़ी की गई है, उनके विरुद्ध ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई प्रस्तावित है।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब खुर्सीपार और साल्हेभाठा जैसे गांवों में लाखों रुपये खर्च दिखने के बावजूद कार्य अधूरे पाए गए हैं।


जल जीवन मिशन के पोर्टल पर महासमुंद जिले में 84.68% कवरेज दर्शाया गया है। जब कार्यपालन अभियंता से पूछा गया कि यह आंकड़ा “केवल कनेक्शन” का है या “नियमित जलापूर्ति” का, तो उन्होंने माना कि—

“पूर्व में की गई एंट्री और जमीनी हकीकत में अंतर है। इसी कारण गलत आंकड़ा दिख रहा है। लगातार सुधार किया जा रहा है।”

यानी विभाग ने स्वीकार किया कि पोर्टल पर दिख रहा डेटा पूरी तरह जमीनी सच्चाई को नहीं दर्शा रहा।


बड़े सवाल अब भी कायम

  • यदि एंट्री गलत थी, तो सत्यापन किस स्तर पर हुआ?

  • 84.68% कवरेज में कितने घरों को नियमित जलापूर्ति मिल रही है?

  • जिन गांवों में कार्य अधूरा है, वहां भुगतान किस आधार पर हुआ?

  • डेटा सुधार की समयसीमा क्या है?


जिले स्तर पर प्रभाव

महासमुंद जिले में लाखों परिवार जल जीवन मिशन पर निर्भर हैं। यदि पोर्टल के आंकड़े और जमीनी हकीकत में अंतर है, तो यह केवल तकनीकी त्रुटि नहीं बल्कि मॉनिटरिंग और सत्यापन व्यवस्था पर गंभीर सवाल है।

विभाग ने कार्रवाई का भरोसा जरूर दिया है, लेकिन अब नजर इस बात पर रहेगी कि—
✔ नोटिस और ब्लैकलिस्ट की प्रक्रिया कब तक पूरी होती है
✔ पोर्टल डेटा कब तक अपडेट होता है
✔ अधूरी योजनाएं कब तक पूरी की जाती हैं

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