इंजीनियर समेत चार पर FIR, कांग्रेस ने सरकार को घेरा; “सरकारी कर्मचारी सुरक्षित नहीं तो आम जनता कैसे सुरक्षित?”
गरियाबंद। देवभोग नगर पंचायत कार्यालय के भीतर हुई मारपीट की घटना अब बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दा बनती जा रही है। इस मामले में न केवल पुलिस FIR दर्ज कर जांच कर रही है, बल्कि घटना का कथित CCTV वीडियो सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया है। वहीं स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने इसे प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाली घटना बताया है।
क्या है पूरा मामला?
देवभोग नगर पंचायत में सहायक ग्रेड-03 के पद पर कार्यरत संदीप चन्द्राकर, जो मूल रूप से बागबाहरा के निवासी बताए जा रहे हैं, ने देवभोग थाने में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के अनुसार 7 मई 2026 की शाम करीब 5 बजे वे नगर पंचायत कार्यालय में काम कर रहे थे। इसी दौरान उप अभियंता आर. श्याम सुंदर पटनायक अपने तीन साथियों के साथ वहां पहुंचे।
पीड़ित कर्मचारी का आरोप है कि आरोपियों ने कार्यालय में घुसकर गाली-गलौज की और बाद में CMO कक्ष में ले जाकर मारपीट की। शिकायत में यह भी कहा गया है कि डंडे और हाथ-पैर से हमला किए जाने से उनके सिर, हाथ और शरीर के अन्य हिस्सों में चोटें आईं। घटना के समय कार्यालय में अन्य कर्मचारी और अधिकारी भी मौजूद थे।
FIR में क्या दर्ज?
देवभोग थाना में दर्ज FIR क्रमांक 0141/2026 के अनुसार पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296, 115(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने उप अभियंता आर. श्याम सुंदर पटनायक समेत चार लोगों को आरोपी बनाया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
CCTV वीडियो आने से मचा हड़कंप
घटना के बाद अब नगर पंचायत कार्यालय का कथित CCTV वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में कार्यालय परिसर के भीतर विवाद और धक्का-मुक्की जैसी स्थिति दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि वीडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी पुलिस या प्रशासन की ओर से नहीं की गई है, लेकिन सोशल मीडिया पर वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।
वीडियो सामने आने के बाद कर्मचारियों और स्थानीय लोगों के बीच घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर सरकारी कार्यालयों में कर्मचारी सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा का क्या होगा।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
इस घटना को लेकर स्थानीय कांग्रेस नेता अंकित बागबाहरा ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस घटना को “साय सरकार पर काला धब्बा” बताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ रही मारपीट, अपराध और दबंगई की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं।
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अंकित बागबाहरा ने आरोप लगाया कि “जब सरकारी कर्मचारी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता खुद को कैसे सुरक्षित महसूस करेगी? प्रदेश में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और प्रशासन मौन नजर आ रहा है।”
उन्होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में लोकतंत्र नहीं बल्कि दबंगों का राज दिखाई दे रहा है और अपराध को खुला संरक्षण मिल रहा है।
कर्मचारियों में नाराजगी
घटना के बाद नगर पंचायत कर्मचारियों में भी नाराजगी का माहौल बताया जा रहा है। सरकारी कार्यालय के भीतर हुई इस घटना ने प्रशासनिक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई कर्मचारियों ने निष्पक्ष जांच और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कही जा रही है।
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यहां देखें CCTV फूटेज
कर्मचारी संघ भी आया सामने, दोषियों पर कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी
देवभोग नगर पंचायत कार्यालय में कर्मचारी के साथ हुई कथित मारपीट की घटना के बाद अब कर्मचारी संगठनों में भी भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। नवयुक्त अधिकारी/कर्मचारी कल्याण संघ (छत्तीसगढ़) ने मामले को गंभीर बताते हुए प्रशासन से आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
संघ के प्रदेश सचिव राजेश सोनी द्वारा नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव को भेजे गए ज्ञापन में कहा गया है कि नगर पंचायत देवभोग में पदस्थ सहायक ग्रेड-03 कर्मचारी संदीप चन्द्राकर के साथ उप अभियंता आर. श्याम सुंदर पटनायक और उनके साथियों द्वारा कथित रूप से मारपीट की गई, जो बेहद निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण घटना है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि नगरीय निकाय कर्मचारी पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ शासन-प्रशासन का कार्य करते हैं। ऐसे में कार्यालय के भीतर कर्मचारी के साथ मारपीट होना कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान पर सीधा हमला है। संघ ने प्रशासन से मांग की है कि आरोपियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में जल्द और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो प्रदेशभर के नगरीय निकाय कर्मचारी आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे। संघ ने कहा कि कर्मचारियों की सुरक्षा से समझौता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।



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