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कोमाखान में किसानों से करोड़ों की ठगी, महीनों भटकने के बाद कलेक्टर जनदर्शन में गुहार, तब दर्ज हुई FIR

कोमाखान (महासमुंद): धान खरीदी के नाम पर ठगी का शिकार हुए किसान लंबे समय तक न्याय के लिए दर-दर भटकते रहे। पुलिस में लगातार शिकायत करने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकार जब किसानों ने कलेक्टर जनदर्शन में पहुंचकर अपनी पीड़ा सुनाई, तब जाकर मामला दर्ज किया गया।


📅 मई 2025 से शुरू हुआ पूरा मामला

किसानों के मुताबिक, मई 2025 में व्यापारियों ने अधिक दाम का लालच देकर धान खरीदा।

  • बाजार भाव: ₹1500–1550 प्रति क्विंटल
  • ऑफर: ₹1800–2100 प्रति क्विंटल

किसानों ने भरोसा कर अपनी फसल बेच दी, लेकिन भुगतान नहीं मिला।


🚶‍♂️ महीनों तक भटकते रहे किसान

धान बेचने के बाद किसान लगातार व्यापारियों से पैसे मांगते रहे।

  • बार-बार “आज-कल” कहकर टाल दिया गया
  • पुलिस से भी कई बार शिकायत की गई
  • लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई

आर्थिक तंगी और कर्ज के दबाव में किसान परेशान होते रहे।


🏛️ जनदर्शन में गुहार के बाद दर्ज हुई FIR

थक-हारकर किसानों ने अगस्त 2025 में कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत की।
इसके बाद प्रशासन ने मामले की जांच कराई और अंततः पुलिस ने धोखाधड़ी और गबन का केस दर्ज किया।


💰 करीब 2 करोड़ रुपये बकाया

गांव बोईरगांव, लोन्दामुड़ा, नर्रा, कसेकेरा, देवरी सहित कई गांवों के किसानों का मिलाकर लगभग 2 करोड़ रुपये अभी भी बकाया बताया जा रहा है।


⚠️ कर्ज और जीवनयापन का संकट

किसानों का कहना है कि उन्होंने खेती के लिए कर्ज लेकर खाद और दवाइयां खरीदी थीं।
यदि रकम नहीं मिली, तो उनके सामने जीवनयापन का संकट खड़ा हो सकता है।


🚨 पुलिस जांच जारी

पुलिस ने गिरीश पाड़े एवं अन्य  आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। किसानों को उम्मीद है कि अब उन्हें न्याय मिलेगा।


👉 यह मामला बताता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे किसानों के साथ आर्थिक धोखाधड़ी कितनी बड़ी समस्या बनती जा रही है, और समय पर कार्रवाई न होने से उनका संकट और गहरा जाता है।