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महतारी वंदन योजना में बड़ी लापरवाही: पुरुष के खाते में महीनों तक पहुंचती रही राशि, सत्यापन व्यवस्था पर उठे सवाल

खैरागढ़। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए संचालित महतारी वंदन योजना में खैरागढ़ परियोजना के तहत गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। ग्राम मुढ़ीपार निवासी एक पुरुष, तिलोक साहू, का आवेदन योजना में स्वीकृत हो गया और उसके बैंक खाते में लगातार कई महीनों तक योजना की राशि भी जमा होती रही। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आवेदन में हितग्राही और पति—दोनों का नाम तिलोक साहू दर्ज था, इसके बावजूद आवेदन आंगनबाड़ी और सुपरवाइजर दोनों स्तरों से सत्यापित कर दिया गया।

दो स्तरों पर सत्यापन के बाद मिलता रहा भुगतान

ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार आवेदन खैरागढ़ परियोजना के मुढ़ीपार सेक्टर से संबंधित है। इसमें आवेदन की स्थिति आंगनबाड़ी और सुपरवाइजर स्तर पर ‘सत्यापित’ दर्शाई गई है। इसके बाद संबंधित बैंक खाते में योजना की राशि का भुगतान शुरू हो गया। वर्तमान में आवेदन ‘परमानेंट होल्ड’ पर है और ‘लाभ त्याग अनुरोध स्वीकृत’ की स्थिति दिखाई दे रही है।

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भुगतान और रिकवरी में भी सामने आई विसंगति

मामले में एक और बड़ा सवाल भुगतान और रिकवरी को लेकर उठ रहा है। ऑनलाइन रिकॉर्ड में संबंधित खाते में 12 महीने तक भुगतान होने की जानकारी सामने आई है, जबकि एकीकृत बाल विकास सेवा परियोजना खैरागढ़ द्वारा 3 जुलाई 2026 को बैंक को भेजे गए पत्र में केवल 10 हजार रुपये शासन के खाते में वापस जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। यदि भुगतान 12 महीने तक हुआ, तो रिकवरी केवल 10 महीने की राशि की क्यों की गई, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

परियोजना अधिकारी ने क्या कहा?

परियोजना अधिकारी रंजना श्रीवास्तव ने बताया कि संबंधित हितग्राही से राशि की रिकवरी कर ली गई है। अन्य तथ्यों के संबंध में उन्होंने रिकॉर्ड देखने के बाद जानकारी देने की बात कही। हालांकि, यह अब भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि एक पुरुष का आवेदन योजना में कैसे स्वीकार हुआ, दो स्तरों पर उसका सत्यापन किस आधार पर हुआ और इतने लंबे समय तक भुगतान क्यों जारी रहा।

हितग्राही का दावा- ट्रायल के लिए किया था आवेदन

तिलोक साहू का कहना है कि वह एक सीएससी सेंटर संचालित करता है। महतारी वंदन योजना का पोर्टल शुरू होने के शुरुआती दौर में आवेदन प्रक्रिया को समझने और ट्रायल के उद्देश्य से उसने स्वयं आवेदन किया था। उसके अनुसार उसके खाते में कुल 10 हजार रुपये आए थे, जिसके बाद भुगतान बंद हो गया। विभाग द्वारा रिकवरी की कार्रवाई के बाद उसने पूरी राशि वापस जमा करा दी।

विभागीय निगरानी पर गंभीर सवाल

यह मामला महतारी वंदन योजना की सत्यापन व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। महिलाओं के लिए बनी योजना में एक पुरुष का आवेदन स्वीकृत होना, दो स्तरों पर सत्यापन होना और महीनों तक भुगतान जारी रहना विभागीय निगरानी की बड़ी चूक माना जा रहा है। अब यह देखना होगा कि केवल राशि की वसूली तक कार्रवाई सीमित रहती है या गलत सत्यापन और स्वीकृति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय की जाती है।

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