ब्रेकिंग न्यूज़: नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव
भारत के नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने संसद की एक समिति के सामने अपने प्रशासनिक अधिकारों के विस्तार का प्रस्ताव रखा है। मंत्रालय की मांग है कि उसे सभी नवीकरणीय ऊर्जा मामलों में "केंद्रीय सरकार" के तौर पर मान्यता दी जाए।
नवीकरणीय ऊर्जा कानून की जरूरत
इस मांग में मंत्रालय ने एक विस्तृत उत्तर प्रस्तुत किया है, जिसमें कहा गया है कि नवीकरणीय ऊर्जा के लिए एक स्वतंत्र कानून बनाना आवश्यक नहीं है। बावजूद इसके, मंत्रालय ने कई निर्णायक शक्तियों की मांग की है। इसमें बिजली बाजारों का डिज़ाइन बनाना, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए बोली दिशा निर्देश तैयार करना और केंद्रीय इलेक्ट्रिसिटी नियामक आयोग (CERC) के लिए tarif निर्धारण सिद्धांत बनाने जैसे अधिकार शामिल हैं।
मौजूदा प्रगति और भविष्य के लक्ष्य
31 जनवरी, 2026 तक, भारत ने गैर-फॉसिल ईंधन स्रोतों से 271.96 GW की क्षमता स्थापित की है, जो कुल स्थापित शक्ति क्षमता का आधा से थोड़ा अधिक है। मंत्रालय का लक्ष्य 2030 तक 500 GW गैर-फॉसिल क्षमता हासिल करना है। हालाँकि, मौजूदा समय में गैर-फॉसिल स्रोतों से केवल लगभग 25% बिजली ही उत्पन्न होती है। इस पर मंत्रालय ने कहा है कि नवीकरणीय स्रोतों की अस्थायी प्रकृति और बैटरी भंडारण की कमी के कारण केवल कोयले की बिजली पर भरोसा किया जा सकता है।
प्रशासकीय विसंगतियाँ और प्राथमिकताएँ
मंत्रालय ने यह भी बताया कि कैसे बड़े पनबिजली परियोजनाओं की क्षमता को नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों में शामिल किया गया है, जबकि यह क्षेत्र अभी भी ऊर्जा मंत्रालय द्वारा प्रशासित है। मंत्रालय का तर्क है कि सभी नवीकरणीय स्रोतों के लिए एकीकृत प्रशासनिक ढांचा होना आवश्यक है, जिसमें बड़े पनबिजली स्रोत भी शामिल हैं।
इसके साथ ही, मंत्रालय ने विकेंद्रीकृत और ऑफ-ग्रिड नवीकरणीय ऊर्जा पर भी चिंता व्यक्त की। भारत में विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी लगभग 15% है, जबकि वैश्विक औसत लगभग 40% है। मंत्रालय ने बताया कि इसके लिए कोई अलग नीति तैयार नहीं की गई है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में साफ ऊर्जा के विकास को प्रोत्साहित करेगी।
नवीकरणीय ऊर्जा के विकास के लिए नीतिगत समर्थन
पारिस्थितिकी और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से मंत्रालय ने स्थापित किया है कि एक अलग नीतिगत ढांचा विकेंद्रीकृत और ऑफ-ग्रिड अनुप्रयोगों के लिए महत्वपूर्ण है। मंत्रालय का कहना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी विकास को बढ़ावा मिलेगा और नवीकरणीय ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र के लिए नियामिक स्पष्टता मिलेगी।
यह बदलाव न केवल देश की ऊर्जा नीति को नया आकार देगा, बल्कि यह नवीकरणीय ऊर्जा के लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मंत्रालय की यह पहल ऊर्जा क्षेत्र में स्थायित्व लाने के लिए बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
