बिलासपुर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: अवकाश पर भी खुले कोर्ट, चीफ जस्टिस का स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव को नोटिस, जानें पूरा मामला!

ब्रेकिंग न्यूज़: बिलासपुर हाई कोर्ट का विशेष अवकाश सुनवाई

बिलासपुर। शनिवार को बिलासपुर हाई कोर्ट ने विशेष अवकाश के दिन भी काम किया। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्वत: संज्ञान लेते हुए शिक्षकों के अधिकार अधिनियम (आरटीई) के अंतर्गत गरीब बच्चों के प्रवेश से संबंधित एक जनहित याचिका पर सुनवाई की। अब इस मामले में अगली सुनवाई आठ अप्रैल को होगी।

शिक्षा के अधिकार पर स्थिति चिंताजनक

कोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव को नोटिस जारी किया है और उन्हें शपथ पत्र के माध्यम से जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदेश में नए शैक्षणिक सत्र की शुरूआत के साथ आरटीई अधिनियम के अंतर्गत कक्षा 1 में प्रवेश प्रक्रिया धीमी पड़ गई है।

ताजा आंकड़ों के अनुसार, 38,438 आवेदनों में से केवल 23,766 (62%) का ही सत्यापन किया गया है। इस कार्य में भी कई जिलों में 10% से कम आवेदन सत्यापित हुए हैं। शिक्षा विभाग ने 16 फरवरी से 31 मार्च तक की समयसीमा निर्धारित की थी, लेकिन यह समयसीमा भी अधूरी रह गई है।

अभिभावकों की समस्याएँ बढ़ रही हैं

डिवीजन बेंच ने इस लापरवाही पर नाराजगी जताई है। प्रवेश प्रक्रिया में देरी के कारण अभिभावकों को बार-बार कोर्ट आना पड़ सकता है। इसके अलावा, स्कूल आवंटन की लॉटरी 13 से 17 अप्रैल के बीच निर्धारित की गई है, लेकिन सत्यापन की धीमी गति के चलते इसमें भी देरी होने की संभावना जताई गई है।

अगली सुनवाई की तिथि

भिलाई निवासी सीवी भगवंत राव ने इस मामले में जनहित याचिका दायर की है। याचिका की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर, उप महाधिवक्ता पीके भादुड़ी और वरिष्ठ अधिवक्ता आशीष श्रीवास्तव ने अपने-अपने तर्क प्रस्तुत किए।

डिवीजन बेंच ने यह सुनिश्चित किया कि कोट एकसाथ दोनों याचिकाओं की सुनवाई करेगी।

निष्कर्ष

बिलासपुर हाई कोर्ट द्वारा उठाए गए कदम से आशा की किरण जगी है कि समय पर उचित निर्णय लिया जाएगा। यह छात्रों के भविष्य और उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। हमें उम्मीद है कि आगामी सुनवाई में शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

कैम्ब्रिज पुरुष और ऑक्सफोर्ड महिलाएं बोट रेस में विजेता बनीं!

ब्रेकिंग न्यूज़: कैम्ब्रिज पुरुषों ने थेम्स नदी पर चौथी बार लगातार जीत हासिल की। वहीं, ऑक्सफोर्ड महिलाओं ने 2016 के बाद पहली बार बोट रेस में विजय प्राप्त की।

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की पुरुष नाविक टीम ने थेम्स नदी पर अपनी ऐतिहासिक जीत का सिलसिला जारी रखते हुए चौथी बार बोट रेस जीती। इस मैच में कैम्ब्रिज ने अपनी स्पीड और तकनीक का शानदार प्रदर्शन किया।

वहीं, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की महिलाओं की टीम ने अपने शानदार प्रदर्शन से 2016 के बाद पहली बार बोट रेस में जीत हासिल की। यह जीत उनके लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई।

इन दोनों विश्वविद्यालयों के बीच हुई इस प्रतिस्पर्धा ने खेल प्रेमियों का ध्यान खींचा। कैम्ब्रिज पुरुषों की टीम ने सहजता से प्रतिस्पर्धा की, जबकि ऑक्सफोर्ड महिलाओं ने आत्मविश्वास के साथ मुकाबला किया।

इस प्रकार, दोनों टीमों ने अपनी उत्कृष्टता और समर्पण का परिचय दिया, जो दर्शाता है कि बोट रेस का यह मौसम बहुत ही रोमांचक रहा।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने दी ऑस्ट्रेलिया जाने की अनुमति, अनाथ बच्चे की मां तीन साल रही भारत में

ब्रेकिंग न्यूज: बंबई उच्च न्यायालय ने गोद ली गई मां को ऑस्ट्रेलिया जाने की इजाजत दी

बंबई उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में एक गोद ली गई मां को ऑस्ट्रेलिया जाने की अनुमति दी है। यह मां अपने बच्चे की देखभाल के लिए तीन वर्षों से भारत में रह रही थी।

न्यायालय का निर्णय: बाल कल्याण की प्राथमिकता

बंबई उच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान कहा कि बच्चे के कल्याण को सबसे पहले माना जाएगा। न्यायालय ने यह भी कहा कि बच्चे के हित में यह आवश्यक है कि वह अपने माता-पिता के पास रहे। इस मामले में गोद लेने वाली मां ने एक अदालत में याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने ऑस्ट्रेलिया जाने की अनुमति मांगी थी।

जस्टिस ने इससे पहले के निर्णयों और कानूनों की भी चर्चा की, जिसमें कहा गया कि बच्चे का विकास एक ऐसा मुद्दा है जो हमेशा प्राथमिकता में रहेगा। गोद लेने वाली मां ने अदालत को बताया कि उसके पास ऑस्ट्रेलिया में स्थायी निवास का लाभ है और वह अपने बच्चे के लिए वहां बेहतर अवसर सुनिश्चित कर सकती है।

तीन वर्षों की कठिनाई: भारत में समय बिताने की चुनौतियां

मां का कहना था कि वह अपने बच्चे की देखभाल करने के लिए तीन वर्षों से भारत में रह रही है, लेकिन अब उसे अपने देश लौटने की आवश्यकता महसूस हो रही है। भारत में रहते हुए उसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उसने हमेशा अपने बच्चे के कल्याण को प्राथमिकता दी।

अदालत ने मां की इच्छाओं को ध्यान में रखते हुए उनकी कठिनाइयों और समर्पण को भी सराहा। बच्चों की भलाई को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का यह निर्णय न केवल कानूनी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण था, बल्कि भावनात्मक नजरिए से भी मां एवं बच्चे के संबंध को मजबूत करने का एक प्रयास था।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भलाई का ध्यान

बंबई उच्च न्यायालय के इस निर्णय से यह स्पष्ट हो गया कि कानूनी व्यवस्था बच्चे की भलाई को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण मानती है। गोद लेने की प्रक्रिया और अंतर्राष्ट्रीय सफर के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है, ताकि बच्चों को समाज में बेहतर अवसर मिल सकें।

इस निर्णय का प्रभाव न केवल इस जोड़े पर पड़ेगा, बल्कि यह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गोद लेने की प्रक्रिया को भी प्रभावित करेगा। अदालत में इस मामले को लेकर सुनवाई के दौरान न्यायालय ने इसे एक सकारात्मक पहल के रूप में लिया और समाज में बच्चों की भलाई हेतु कुछ आवश्यक बदलावों की जरूरत पर भी जोर दिया।

इस प्रकार, बंबई उच्च न्यायालय के इस निर्णय ने गोद लेने के मामले में एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है, जो न केवल कानूनी अधिकारों की बात करता है, बल्कि भावनात्मक बंधन और बच्चों के भविष्य पर भी प्रकाश डालता है।

"शिक्षामित्रों को सीएम योगी का बड़ा तोहफा: सैलरी में बंपर इजाफा और 5 लाख का कैशलेस इलाज!"

ब्रेकिंग न्यूज़: यूपी सरकार ने संविदा शिक्षकों को दी बड़ी राहत

लखनऊ, 4 अप्रैल 2026: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने शिक्षा विभाग में कार्यरत लाखों संविदा कर्मियों को एक महत्वपूर्ण आर्थिक राहत प्रदान की है। 1 अप्रैल 2026 से राज्य के शिक्षामित्रों और अनुदेशकों का मानदेय बढ़ा दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा के अनुसार, शिक्षामित्रों को अब 18,000 रुपये और अनुदेशकों को 17,000 रुपये प्रति माह का वेतन मिलेगा। इसके साथ ही, सरकार ने इन कर्मचारियों के लिए 5 लाख रुपये तक का मुफ्त कैशलेस चिकित्सा उपचार की सुविधा भी घोषित की है।

सैलरी में भारी वृद्धि: लाभार्थियों की जानकारी

उत्तर प्रदेश सरकार के इस नवीनतम निर्णय के तहत बेसिक शिक्षा विभाग में मानदेय ढांचे में बड़ा परिवर्तन किया गया है।

  • शिक्षामित्र: पहले इन्हें हर महीने 10,000 रुपये दिया जाता था, जो अब 8,000 रुपये की बढ़ोतरी के साथ 18,000 रुपये कर दिया गया है।
  • अनुदेशक: पहले अनुदेशकों की सैलरी 9,000 रुपये थी, जो अब बढ़कर 17,000 रुपये हो गई है।

यह नया वेतन ढांचा अप्रैल महीने की सैलरी साइकिल से प्रभावी हो चुका है।

1.70 लाख से ज्यादा कर्मचारियों को सीधे लाभ

सरकार के इस फैसले का सीधा प्रभाव ग्राउंड लेवल पर कार्यरत लाखों परिवारों पर पड़ेगा। राज्य में वर्तमान में करीब 1.43 लाख शिक्षामित्र और लगभग 25,000 अनुदेशक कार्यरत हैं। कुल मिलाकर, यह योजना 1.70 लाख से अधिक संविदा कर्मचारियों के लिए लाभदायक साबित होगी। लंबे समय से अपनी सैलरी बढ़वाने के लिए संघर्ष कर रहे इन कर्मचारियों के लिए यह एक बड़ी जीत और आर्थिक सुरक्षा का संकेत है।

स्वास्थ्य सुरक्षा: 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज

मानदेय वृद्धि के अलावा, यूपी सरकार ने इन कर्मचारियों की स्वास्थ्य सुरक्षा को भी ध्यान में रखा है। अब सभी शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को 5 लाख रुपये तक का कैशलेस चिकित्सा कवर प्रदान किया जाएगा। इस सुविधा से कर्मचारियों पर चिकित्सा आपात स्थिति के समय आर्थिक बोझ काफी कम होगा और वे अच्छी चिकित्सा सेवाओं का लाभ ले सकेंगे।

निष्कर्ष

यह निर्णय उत्तर प्रदेश सरकार की शिक्षा क्षेत्र के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। शिक्षामित्रों और अनुदेशकों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना और उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, राज्य के विकास के लिए भी जरूरी है। इस प्रकार की पहल होने से न केवल कर्मचारियों के जीवन स्तर में सुधार होगा, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।

IPL 2026: RCB और CSK के बीच 11वें मैच का ताज़ा Preview!

ब्रेकिंग न्यूज:
आरसीबी ने सीएसके के खिलाफ अपनी पिछली तीन मैचों में जीत हासिल करके इस प्रतिद्धंद्विता की दिशा बदल दी है। यह जीत आरसीबी के लिए एक मजबूत आत्मविश्वास बढ़ाने वाली साबित हुई है।

हाल ही में, रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (आरसीबी) ने चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) को 3 बार पछाड़कर अपनी स्थिति को मजबूत किया है। इस जीत ने टीम के फैंस में उत्साह भर दिया है और आगामी मैचों के लिए उम्मीदें जगाई हैं।

इस प्रतियोगिता में आरसीबी के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। कप्तान विराट कोहली और फाफ डु प्लेसिस ने आक्रामक बल्लेबाजी से टीम को अपनी पिछली जीतों की राह पर आगे बढ़ाया।

संक्षेप में, आरसीबी की लगातार तीन जीत ने सीएसके के खिलाफ उनकी प्रतिद्धंद्विता को एक नया मोड़ दिया है, जो उनकी आगामी रणनीतियों के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है।

रूस के हमले में यूक्रेन बाजार में पांच की मौत

ब्रेकिंग न्यूज: यूक्रेन के दक्षिणी शहर में रूसी ड्रोन हमले में 21 घायल

रूसी मिलिट्री ड्रोन ने शनिवार सुबह यूक्रेन के एक व्यस्त इलाके में हमला किया, जिसमें कम से कम 21 लोग घायल हो गए। यह घटना उस समय हुई जब स्थानीय लोग अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थे।

हमले का विवरण

यूक्रेन के एक दक्षिणी शहर में यह घातक ड्रोन हमला उस समय हुआ जब लोग सुबह के समय बाजार में या अन्य गतिविधियों में लगे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ड्रोन ने एक भीड़-भाड़ वाले क्षेत्र को निशाना बनाया, जो तात्कालिक रूप से तबाही का कारण बना। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि घायलों में कई लोग गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं।

घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। फिलहाल, बचाव कार्य जारी है और स्थानीय सुरक्षा बल स्थिति को स्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं। घायलों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया

इस हमले के बाद, यूक्रेन सरकार ने इसकी कड़े शब्दों में निंदा की है। एक सरकारी प्रवक्ता ने कहा, "यह एक नृशंस और अमानवीय कार्य है। यह स्पष्ट है कि इस प्रकार के हमले सामान्य नागरिकों को निशाना बनाने के लिए किए जा रहे हैं।"

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने भी इस हमले की कठोर आलोचना की है। कई देशों ने कहा है कि वे यूक्रेन के साथ खड़े हैं और ऐसे हमलों के खिलाफ ठोस कार्यवाही की आवश्यकता है। मानवाधिकार संगठनों ने भी इस हमले को युद्ध अपराध के रूप में देखा है।

सुरक्षा स्थिति और भविष्य की संभावनाएँ

इस घटना ने क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है। स्थानीय लोगों में भय और आशंका का माहौल है। कई नागरिकों ने बताया कि वे अपने दैनिक कार्यों के लिए बाहर जाने से हिचकिचा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के हमले आगे भी जारी रह सकते हैं, यदि स्थिति में सुधार नहीं होता है। युद्ध की स्थिति में, नागरिक सुरक्षा को प्राथमिकता देने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इसके मद्देनजर, यूक्रेन सरकार ने सुरक्षा उपायों को बढ़ाने का निर्णय लिया है।

स्थानीय प्रशासन ने सभी नागरिकों से अपनी सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की अपील की है। साथ ही, नागरिकों से कहा गया है कि वे किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत प्रशासन को दें।

अगले कुछ दिनों में स्थिति को देखते हुए, सुरक्षा बलों की तैनाती और गतिविधियों में वृद्धि की जा सकती है, ताकि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

इस हमले ने यूक्रेन के दक्षिणी हिस्से में संघर्ष की गंभीरता को एक बार फिर उजागर कर दिया है। नागरिकों के लिए यह समय अपने आसपास के हालात को समझने और सुरक्षित रहने का है।

यही नहीं, स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस उपायों की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में कोई और इस तरह के हमलों का शिकार न बने।

गृह निर्माण ऋण गबन में ACB-EOW का बड़ा धमाका: भोपाल के सहकारी आवास संघ के पूर्व प्रबंधक की गिरफ्तारी!

ब्रेकिंग न्यूज़: एसीबी-ईओडब्ल्यू ने 26 साल पुराने आवास ऋण घोटाले में मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया

रायपुर में घोटाले की जांच का पदार्फाश

छत्तीसगढ़ राज्य में एसीबी-ईओडब्ल्यू (आपराधिक जांच ब्यूरो-आर्थिक अपराध शाखा) ने अब तक के सबसे बड़े आवास ऋण गबन घोटाले का पर्दाफाश किया है। इस मामले में प्रदीप कुमार निखरा नामक व्यक्ति को 26 साल बाद गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि निखरा ने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर 1995 से 1998 के बीच जरूरतमंद व्यक्तियों के लिए चल रही सरकारी आवासीय योजना का दुरुपयोग किया। इस घोटाले के तहत 186 व्यक्तियों के नाम पर 1-1 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत कराया गया, जिससे कुल 1.86 करोड़ रुपये की धनराशि गबन की गई।

अवैध गतिविधियों का खुलासा

जांच में यह पाया गया है कि जिन स्थलों को दर्शाया गया था, वहाँ न तो मकान बने थे और न ही संबंधित ऋणधारी वहां मौजूद थे। आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से ऋण राशि का गबन किया। इस मामले में अपराध क्रमांक 19/2000 के तहत धारा 120B, 406, 409, 420, 467, 468, 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी लागू की गई हैं।

सहयोगियों का नेटवर्क

जांच में खुलासा हुआ है कि आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति के तत्कालीन अध्यक्ष थावरदास माधवानी, सहकारी आवास संघ मर्यादित रायपुर के पूर्व पर्यवेक्षक बसंत कुमार साहू और सहकारी आवास संघ मर्यादित भोपाल के पूर्व प्रबंधक प्रदीप कुमार निखरा ने मिलकर इस घोटाले को अंजाम दिया। इन सब ने मिलकर कथित रूप से आवास संघ की धनराशि का बंटवारा किया।

न्यायिक प्रक्रिया की शुरुआत

4 अप्रैल को, प्रदीप कुमार निखरा को गिरफ्तार कर लिया गया और उसे न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय ने आरोपी को 7 अप्रैल तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। एसीबी-ईओडब्ल्यू की टीम अब अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी और मामले की गहन जांच में जुटी है।

निष्कर्ष

इस घोटाले की जांच से साबित होता है कि सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग करने वाले व्यक्तियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्राधिकृत अंगों की तत्परता से जनहित की रक्षा करने में मदद मिलेगी। सभी नागरिकों को चाहिए कि वे ऐसे मामलों की सूचना दें और चेज प्रधानों की जवाबदेही सुनिश्चित करें। सुनिश्चित करें कि सरकारी योजनाएँ वास्तव में जरूरतमंद लोगों तक पहुँचें।

IPL 2026: DC बनाम MI, आठवां मैच रिपोर्ट – 4 अप्रैल 2026

ब्रेकिंग न्यूज़:
दिल्ली कैपिटल्स के गेंदबाजों ने मुंबई इंडियंस को 162 रनों पर रोक दिया। इसके बाद, रिज़वी और निसंका ने शुरुआती विकेट गिरने के बाद टीम को मजबूती से वापसी दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

दिल्ली कैपिटल्स (डीसी) ने मुंबई इंडियंस (एमआई) के खिलाफ महत्वपूर्ण मुकाबले में गेंदबाजी की कमाल का प्रदर्शन किया। डीसी के गेंदबाजों ने एमआई को 162 रनों पर सीमित कर दिया।

हालांकि, मुंबई का शीर्ष क्रम जल्दी विकेट खोने से संकट में था, लेकिन रिज़वी और निसंका ने शानदार साझेदारी कर टीम को संभाला। दोनों खिलाड़ियों ने अपनी बल्लेबाजी से मैच का रुख बदलते हुए टीम को जीत की ओर अग्रसर किया।

इस प्रकार, दिल्ली कैपिटल्स ने एक शानदार प्रदर्शन के साथ दर्शकों को रोमांचित किया। आगे बढ़ते हुए, यह मैच क्रिकेट प्रेमियों के लिए यादगार बन गया।

इजरायली हवाई हमले से लेबनान के टायर अस्पताल को नुकसान, जमीनी हमले की वृद्धि

ब्रेकिंग न्यूज़: इजरायली हवाई हमलों में 11 लोग घायल

इजरायल के टायर शहर में लेबनानी इतालवी अस्पताल के पास हुए हवाई हमलों से 11 लोग घायल हो गए हैं। इन हमलों के कारण अस्पताल की कई सुविधाएँ भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं।

लेबनानी अस्पताल को हुआ भारी नुकसान

लेबनान के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, टायर के तटीय क्षेत्र में स्थित अस्पताल पर इजरायली हवाई हमले का असर गंभीर रहा। अस्पताल के निदेशक ने सरकारी समाचार एजेंसी को बताया कि, “हम अस्पताल को चालू रखेंगे ताकि आवश्यक चिकित्सा देखभाल प्रदान की जा सके।”

सूत्रों के मुताबिक, रात भर में किए गए हमलों में दो इमारतें तबाह हो गईं और अस्पताल की खिड़कियाँ टूट गईं। साथ ही, अस्पताल में निलंबित छतें भी गिर गईं। एएफपी के अनुसार, टायर में एक बंदरगाह पर हमला किया गया, जिसमें एक छोटी नाव को नुकसान पहुंचा और अन्य नावें भी प्रभावित हुईं। इस घटना में कम से कम एक व्यक्ति की मौत की खबर है।

इजरायली ड्रोन हमले में और दो लोगों की मौत

एक अन्य घटना में, इजरायली ड्रोन हमले में टायर के उत्तरी बाहरी इलाके में एक मोटरसाइकिल को निशाना बनाकर कम से कम दो लोगों की जान ले ली गई। उसके बाद इजरायली सेना ने टायर के निवासियों को विस्थापन का आदेश दिया और हिजबुल्ला के ठिकानों पर और हमलों की योजना बनाई।

हाल के हफ्तों में, टायर से tens of thousands लोग चले गए हैं, जबकि लगभग 20,000 लोग अभी भी वहां रह रहे हैं। इनमें से 15,000 लोग आस-पास के गांवों के विस्थापित लोग हैं। इजरायल ने शहर के अधिकांश हिस्सों और दक्षिणी लेबनान के एक बड़े क्षेत्र में विस्थापन आदेश जारी किए हैं।

जमीनी आक्रमण और इजरायली सेना की कार्रवाई

इस बीच, इजरायल ने अपने जमीनी आक्रमण को जारी रखा है। इजरायली बलों ने अइता अल-शाब और रमियाह जैसे कई साउथ फ्रंट लाइन गांवों में घरों को नष्ट कर दिया। साथ ही, उन्होंने सामर और मशघरा के बीच पुलों पर बमबारी की, यह दावा करते हुए कि ये पुल हिजबुल्ला द्वारा उपयोग किए जा रहे थे।

दक्षिणी लेबनान में अन्य सामान्य जनसंख्या संरचनाओं पर बमबारी की व्यापक रूप से निंदा की जा रही है। मानवाधिकार समूहों ने चेतावनी दी है कि इजरायल क्षेत्र को अलग-थलग करने की कोशिश कर रहा है। अल जज़ीरा अरब ने भी बताया कि इजरायली बलों ने दक्षिणी लेबनान के जे़ज़ीन जिले में अल-क़ात्रानी नामक शहर पर हवाई हमला किया।

हालांकि, इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के परियोजना निदेशक हेइको विम्मेन का कहना है कि हिजबुल्ला को बेअसर करने का इजरायल का लक्ष्य संभवतः पूरा नहीं होगा। उनके अनुसार, “हिजबुल्ला का निष्क्रिय होना किसी योजना में नहीं है, और हम देख रहे हैं कि हमारे सामने एक अंतहीनoccupation बन रहा है।”

लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि वर्तमान हमलों में कम से कम 1,368 लोग मारे गए हैं और 4,138 घायल हुए हैं। ये हमले एक मिलियन से अधिक लोगों को विस्थापित करने का कारण बने हैं।

"Windows 10 सपोर्ट समाप्त, Google का बड़ा कदम: ₹279 में पुराने लैपटॉप को मिलेगी नई जान!"

ब्रेकिंग न्यूज़: गूगल की नई पहल से पुराने कंप्यूटर पायेंगे नया जीवन

माइक्रोसॉफ्ट द्वारा विंडोज 10 का सपोर्ट बंद करने के ऐलान के साथ ही, लाखों कंप्यूटर और लैपटॉप यूज़र्स के सामने नया डिवाइस खरीदने या असुरक्षित सिस्टम का उपयोग करने की मुश्किल खड़ी हो गई है। इस चुनौती का सामना करने के लिए गूगल ने एक महत्वपूर्ण पहल की है।

गूगल का नया समाधान

गूगल ने पुनर्नवीनीकरण इलेक्ट्रॉनिक्स प्लेटफार्म ‘Back Market’ के साथ भागीदारी की है। इसके तहत एक विशेष ‘ChromeOS Flex USB Kit’ लॉन्च की गई है, जो पुराने कंप्यूटरों को गूगल के हल्के ऑपरेटिंग सिस्टम को इंस्टॉल करने का अवसर प्रदान करती है। इस किट के माध्यम से यूज़र्स अपने पुराने पीसी या मैक को नया रूप दे सकेंगे।

गूगल का ChromeOS Flex एक फ्री सॉफ्टवेयर है, जिसे गूगल की वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है। हालांकि, तकनीकी ज्ञान की कमी के कारण जो लोग इसे स्वयं इंस्टॉल नहीं कर पा रहे हैं, उनके लिए बैक मार्केट की आधिकारिक वेबसाइट पर यह फिजिकल किट उपलब्ध कराई गई है।

ChromeOS Flex USB Kit में क्या है?

ChromeOS Flex USB Kit की कीमत मात्र 3 डॉलर यानी लगभग 279 रुपये रखी गई है। इस किट में एक यूएसबी ड्राइव (पेन ड्राइव) शामिल है, जिसमें ऑपरेटिंग सिस्टम पहले से लोड होता है। इसके साथ ही, यूज़र्स को इंस्टॉलेशन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए गाइड और वीडियो ट्यूटोरियल भी प्रदान किए जाते हैं। यह पेन ड्राइव पुनः उपयोगी है, जिससे यूज़र्स इसे अन्य कार्यों के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

पुराने हार्डवेयर को मिलेगी नई जिंदगी

एक नए लैपटॉप के निर्माण में बड़ा कार्बन उत्सर्जन होता है, जिससे पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। गूगल का मानना है कि पुराने हार्डवेयर का उपयोग करके उसे लंबे समय तक चलाना अधिक उचित है। ChromeOS Flex को इंस्टॉल करने के बाद, पुराना लैपटॉप बहुत तेज़ हो जाता है। यह औसतन 19% कम बिजली की खपत करता है, जिससे न सिर्फ बैटरी लाइफ में सुधार होता है बल्कि बिजली के उपयोग में भी कमी आती है।

ई-वेस्ट कम करने की बड़ी कोशिश

गूगल अब क्रोमबुक के लिए 10 साल और पिक्सल फोन के लिए 7 साल तक अपडेट देने की नीति पर चल रहा है। ई-वेस्ट को कम करने के लिए गूगल ने ‘Closing the Loop’ जैसे संगठनों के साथ भी सहयोग किया है। यूज़र्स अपने पुराने मैक या विंडोज लैपटॉप की स्थिति जानने के लिए गूगल की सपोर्ट वेबसाइट पर जा सकते हैं, जहां गूगल द्वारा सर्टिफाइड मॉडल्स की लिस्ट उपलब्ध है।

निष्कर्ष

गूगल की यह पहल निश्चित रूप से उन यूज़र्स के लिए एक सस्ता और सुरक्षित विकल्प है, जो अपने पुराने उपकरणों को नए सिरे से उपयोग करना चाहते हैं। इस पहल से न केवल व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं को लाभ होगा, बल्कि यह पर्यावरण की दृष्टि से भी एक सकारात्मक कदम साबित होगा। ऐसे में, यह सभी के लिए फायदेमंद है कि वे अपने पुराने डिवाइस का सही उपयोग करें और ई-वेस्ट को कम करने की दिशा में योगदान दें।