इलेक्ट्रॉनिक कांटे की पारदर्शिता पर सवाल: महासमुंद। जिले के धान उत्पादक किसान इस वर्ष पहले ही कम उत्पादन से जूझ रहे हैं, वहीं अब धान खरीदी केंद्रों में प्रति बोरा 300 से 400 ग्राम अतिरिक्त तौलाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। किसानों का आरोप है कि इलेक्ट्रॉनिक कांटे के जरिए पारदर्शी खरीदी का दावा किया जा रहा है, लेकिन हकीकत में तय मानक से अधिक धान तौला जा रहा है।
40 किलो की जगह 40.9 किलो तक तौलाई
सरकारी मापदंड के अनुसार एक बोरे में 40 किलो धान की खरीदी की जानी है। खाली बारदाना का वजन 550 ग्राम निर्धारित है, लेकिन आरोप है कि धान के साथ कुल वजन 40 किलो 800 ग्राम से 40 किलो 900 ग्राम तक तौला जा रहा है। इससे हर बोरे में किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
इलेक्ट्रॉनिक कांटे की पारदर्शिता पर संदेह
सरकार ने धान खरीदी में पारदर्शिता लाने के लिए सभी केंद्रों में इलेक्ट्रॉनिक कांटे लगाए हैं। इसके बावजूद अतिरिक्त तौलाई हो रही है, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि अधिक तौले गए धान का हिसाब आखिर कहां दर्ज हो रहा है—सरकारी खजाने में या फिर सिस्टम के बाहर?

प्रभारी का दावा: कलेक्टर का आदेश
बागबाहरा ब्लॉक के खोपली धान खरीदी केंद्र में अब तक लगभग 17 हजार क्विंटल धान की खरीदी हो चुकी है। केंद्र प्रभारी भावना गजेन्द्र ने अधिक तौलाई को लेकर कहा कि कलेक्टर का आदेश है कि 40 किलो 800 से 900 ग्राम तक धान खरीदी की जाए। हालांकि जब उनसे लिखित आदेश दिखाने को कहा गया, तो उन्होंने इसे मौखिक आदेश बताया।
कम उत्पादन, ऊपर से कांटामारी
खोपली गांव के किसान पवन चंद्राकर ने बताया कि इस वर्ष धान का उत्पादन काफी कम हुआ है। हर किसान कम पैदावार से परेशान है। ऐसे में अतिरिक्त तौलाई किसानों पर दोहरी मार है। सरकार को उत्पादन का आंकलन कर मुआवजा देना चाहिए। उन्होंने धान खरीदी प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता और सख्त निगरानी की मांग की है।






















