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“जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता पर फूटा गुस्सा: 100 मीटर सड़क 3 साल से बदहाल, झलप हाईवे पर ग्रामीणों का चक्काजाम”

100 मीटर खस्ताहाल सड़क 3 साल से नहीं बनी, करीब दो घंटे बाधित रहा आवागमन

महासमुंद/झलप। झलप-बागबाहरा मुख्य मार्ग की बदहाली को लेकर ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों का गुस्सा आखिरकार सड़क पर फूट पड़ा। झलप के छिलपावन चौक स्थित हाईवे पर ग्रामीणों ने चक्काजाम कर दिया, जिससे करीब दो घंटे तक आवागमन बाधित रहा। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई।

ग्रामीणों का कहना है कि झलप-बागबाहरा मुख्य मार्ग पर करीब 100 मीटर सड़क पिछले लगभग तीन वर्षों से बेहद खराब हालत में है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। ग्रामीणों ने सड़क की बदहाली को लेकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर इतनी छोटी सड़क समस्या के लिए भी लोगों को सड़क पर उतरकर आंदोलन क्यों करना पड़ रहा है?

सत्ता पक्ष के विधायक के बावजूद सड़क का समाधान नहीं?

प्रदर्शन के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर भी नाराजगी सामने आई। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में सत्ता पक्ष के विधायक होने के बावजूद करीब 100 मीटर खस्ताहाल सड़क का तीन साल में निर्माण नहीं हो पाना गंभीर सवाल खड़े करता है।

ग्रामीणों का कहना है कि जनता विकास चाहती है, सड़क चाहती है और मूलभूत सुविधाएं चाहती है। इसके लिए आंदोलन करना किसी राजनीतिक दल का एजेंडा नहीं, बल्कि अपनी समस्या के समाधान की मांग कर रहे जागरूक नागरिकों की आवाज है।

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सोशल मीडिया पर वायरल हुआ चक्काजाम का वीडियो

चक्काजाम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इस मुद्दे को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। वायरल वीडियो पर कई यूजर्स ने सड़क की बदहाली और जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता को लेकर सवाल उठाए हैं।

लोगों का सवाल है कि क्या आम जनता को हर छोटी-बड़ी समस्या के समाधान के लिए सड़क पर उतरना पड़ेगा? आखिर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी कब तय होगी?

तहसीलदार के आश्वासन के बाद खत्म हुआ चक्काजाम

करीब दो घंटे तक चले चक्काजाम के बाद तहसीलदार मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत कर सड़क समस्या के निराकरण का आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने चक्काजाम समाप्त कर दिया और हाईवे पर यातायात धीरे-धीरे सामान्य हुआ।

अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन के आश्वासन पर है। देखना होगा कि वर्षों से बदहाल करीब 100 मीटर सड़क का निर्माण कब शुरू होता है।

ग्रामीणों की मांग स्पष्ट है—सरकार ने सड़क बनाई है, तो अब उसे संवारने की जिम्मेदारी भी निभाए।

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