पढ़िए डॉ नीरज गजेंद्र का लिखा- जीवन को बेहतर बनाने का सरल और प्रभावी सूत्र

डॉ नीरज गजेंद्र

हम अक्सर अपना समय यह सोचने में गंवा देते हैं कि दूसरे क्या कर रहे हैं। किसे क्या मिला, किसे कितनी सफलता मिली, या किसका जीवन कितना आसान है। लेकिन सच यह है कि दूसरों की राह पर नजर टिकाकर हम अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच सकते। जीवन की असली प्रगति इस बात पर निर्भर करती है कि हम खुद क्या कर रहे हैं, क्या सोच रहे हैं और किस दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। भारतीय दर्शन कहता है कि मनुष्य अपने विचारों का परिणाम है। भगवद्गीता में श्रीकृष्ण अर्जुन को यही समझाते हैं कि युद्ध का परिणाम बाद में तय होगा, पहले तुम्हें अपने धर्म, अपने कर्तव्य पर ध्यान केंद्रित करना है। यह शिक्षा  किसी असमंजस रूपी युद्धभूमि के साथ जीवन के हर मोड़ पर लागू होती है।

अभी समय ठीक नहीं है, कहकर हम अक्सर परिस्थितियों का रोना रोते हैं। समय कभी अपने आप ठीक नहीं होता। मौसम बदलने का इंतजार करने से बेहतर है कि हम अपने मन को बदलें। एक दृढ़ मन हर विपरीत मौसम में भी राह बना लेता है। बौद्ध दर्शन कहता है कि मन ही सब कुछ है। जैसा सोचोगे, वैसा बनोगे। आज की तेज रफ्तार दुनिया में आधुनिक विज्ञान भी यही मानता है। न्यूरोसाइंस में यह सिद्ध हो चुका है कि हमारा दिमाग नकारात्मकता और सकारात्मकता, दोनों के प्रति संवेदनशील है। हम जिस पर बार-बार ध्यान देते हैं, वही हमारे व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाता है। अगर हम तुलना, ईर्ष्या और शिकायत में समय बर्बाद करेंगे, तो जीवन में कड़वाहट बढ़ेगी। लेकिन अगर हम लक्ष्य, प्रयास और आत्म-सुधार पर ध्यान देंगे, तो प्रगति स्वतः होगी।

एक छोटा उदाहरण देखिए, एक युवा ने सोचा कि उसे फिट होना है। अगर वह रोज इस बात पर चर्चा करता रहे कि उसके दोस्त जिम क्यों जा रहे हैं। कौन-सा प्रोटीन ले रहे हैं। तो नतीजा कुछ नहीं बदलेगा, लेकिन अगर वह अपनी दिनचर्या में बस 30 मिनट व्यायाम जोड़ दे, तो महीने भर में फर्क दिखने लगेगा। यही सिद्धांत जीवन के हर क्षेत्र में लागू होता है। पढ़ाई, नौकरी, व्यवसाय, रिश्ते, यहां तक कि आत्मिक साधना तक सब में यह काम करता है। धर्म हमें यह सिखाता है कि कर्म बिना फल की चिंता के करो। आधुनिकता हमें यह सिखाती है कि समय का सही उपयोग करो और निरंतरता बनाए रखो। अगर हम इन दोनों को जोड़ दें, तो सफलता निश्चित है। रामकृष्ण परमहंस ने कहा था कि जिस लक्ष्य को पाना चाहते हो, उसी पर मन को टिका दो, जैसे पानी में डूबा व्यक्ति सांस लेने के लिए तड़पता है। यही तड़प और दृढ़ निश्चय हर कठिनाई को आसान बना देता है।

जिंदगी में मुश्किलें आएंगी। राह में बाधाएं भी होंगी। लेकिन हमें यह याद रखना चाहिए कि कोई भी राह अपने आप आसान नहीं होती। हम ही उसे आसान बनाते हैं अपने मनोबल, धैर्य और मेहनत से। आधुनिक प्रबंधन शास्त्र भी कहता है कि नब्बे फीसदी सफलता मानसिक तैयारी पर निर्भर करती है। इसलिए, एक संकल्प लीजिए दूसरों से अपनी तुलना बंद कर अपनी ऊर्जा को अपने काम में लगाइए। सुबह उठते ही खुद से पूछिए आज मैं क्या कर सकता हूं जिससे मेरा कल बेहतर हो। यह छोटा-सा प्रश्न सही दिशा में ले जाएगा। मन में विश्वास और कर्म में निरंतरता, यही जीवन को बेहतर बनाने का सबसे सरल और प्रभावी सूत्र है।

दोराहे पर ऐसा क्या करें जिससे मिलेगी सपनों की मंजिल, बता रहे वरिष्ठ पत्रकार डॉ. नीरज गजेंद्र

 

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