मोतिहारी (बिहार): कहते हैं “जाको राखे साइयां, मार सके ना कोय” – यह कहावत मोतिहारी जिले के सुगौली प्रखंड के मेहवा गांव में बिल्कुल सही साबित हुई। गांव के नगीना सहनी वर्ष 2009 में गंगासागर तीर्थयात्रा पर गए थे, लेकिन उसी दौरान वे लापता हो गए। लंबे इंतजार और तलाश के बाद भी जब उनका कोई पता नहीं चला तो परिवार ने मान लिया कि वे अब इस दुनिया में नहीं रहे। स्थिति यह हो गई कि घरवालों ने उनका अंतिम संस्कार और श्राद्धकर्म तक कर दिया।
सोशल मीडिया ने दिलाया जीवन का सबसे बड़ा तोहफा
सालों बाद अचानक कहानी में नया मोड़ आया। हाल ही में नगीना सहनी के बेटे रुदल सहनी को सोशल मीडिया पर एक वीडियो मिला। यह वीडियो गुजरात के एक वृद्धाश्रम का था, जिसमें एक बुजुर्ग व्यक्ति नजर आ रहा था। वीडियो देखते ही रुदल की आंखें नम हो गईं क्योंकि वह चेहरा हूबहू उनके पिता से मिलता-जुलता था। आगे पड़ताल करने पर यह सच साबित हुआ कि वह व्यक्ति वास्तव में उनके पिता ही हैं।
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भावुक कर देने वाला पल
आर्थिक तंगी के बावजूद रुदल अपने पिता को लेने गुजरात पहुंचे। जब वृद्धाश्रम में बेटे और पिता की मुलाकात हुई तो दोनों भावुक होकर रो पड़े। वहां मौजूद लोग भी इस नजारे को देखकर भाव-विभोर हो गए।
गांव में खुशी का माहौल
नगीना सहनी के जीवित लौटने की खबर मिलते ही गांव में जश्न का माहौल बन गया। ग्रामीण इसे ईश्वर की अद्भुत कृपा और सोशल मीडिया की ताकत बता रहे हैं। जिस व्यक्ति के लिए 16 साल पहले गांववालों ने कंधा दिया था, आज उसे वापस जिंदा देखकर हर कोई हैरान है।
बेटे की खुशी
बेटे रुदल का कहना है, “हम सोच भी नहीं सकते थे कि हमें फिर से पिताजी का आशीर्वाद मिलेगा। भगवान ने हमें उनकी छांव फिर से दी है।” परिवार और ग्रामीण लगातार उनके घर पहुंच रहे हैं और इस अनोखी घटना को चमत्कार मान रहे हैं।








