महासमुंद | बागबाहरा
जनपद पंचायत बागबाहरा क्षेत्र से जुड़ा एक कथित ‘गौ परिवहन अनुमति पत्र’ इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे प्रशासनिक अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बताया जा रहा है कि इस पत्र में पंचायत स्तर से पशु परिवहन के लिए अनुमति दिए जाने का उल्लेख है, जबकि सामान्यतः इस प्रकार की अनुमति संबंधित विभाग—जैसे पशु चिकित्सा, परिवहन या जिला प्रशासन—के अधिकार क्षेत्र में आती है।
📄 पत्र में क्या है खास?
वायरल हो रहे इस पत्र पर 04 अप्रैल 2026 की तारीख अंकित है।
लेटरहेड पर जनपद पंचायत बागबाहरा से जुड़े जनप्रतिनिधियों के नाम—श्रीमती पूजा साहू (जनपद सदस्य) और एवन लाल साहू (अध्यक्ष, सरपंच संघ)—मुद्रित बताए जा रहे हैं, जबकि पत्र में हस्ताक्षर व सील ग्राम पंचायत स्तर के प्रतीत हो रहे हैं।
इस असमानता को लेकर ही पूरा विवाद खड़ा हुआ है।
⚠️ सोशल मीडिया में भड़का आक्रोश
मामला सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है—
👉 “पूरा गोलमाल है। हस्ताक्षर व सील सरपंच का, लेटरहेड जनपद सदस्य का…”
👉 “तस्कर अपने बीच ही बैठे हैं भैया।”
👉 “कानून किताबों में है, जमीन पर तो अब ‘परमिशन राज’ चल रहा है!”
👉 “बहुत साहस के साथ इसे अपना अधिकार बताया जा रहा है।”
👉 “सरपंच का अधिकार अपने गांव तक सीमित होता है, ऐसे मामलों में विभाग ही अधिकृत हैं।”
👉 “यह पूरी तरह गलत तरीका है।”
इन प्रतिक्रियाओं से साफ है कि मामला अब जनचर्चा का विषय बन चुका है।
🔎 जांच की मांग तेज
स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया यूज़र्स ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
लोगों का कहना है कि—
- क्या पंचायत को इस तरह की अनुमति देने का अधिकार है?
- यदि नहीं, तो जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी?

🏛️ प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस मामले में जिला प्रशासन या संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
📌 निष्कर्ष
यह मामला सिर्फ एक पत्र का नहीं, बल्कि अधिकार और जिम्मेदारी की सीमा से जुड़ा है।
अगर बिना अधिकार इस तरह के प्रमाण पत्र जारी हो रहे हैं, तो यह भविष्य में गंभीर विवाद का कारण बन सकता है।



