नई दिल्ली। वेनेजुएला को लेकर अमेरिका की हालिया कार्रवाई के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इस घटनाक्रम ने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और दुनिया के कई देश अलग-अलग रुख अपनाते नजर आ रहे हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी कदम के बाद रूस, चीन और ब्राजील जैसे देशों ने इसका विरोध किया है, जबकि कुछ लैटिन अमेरिकी देशों और वैश्विक हस्तियों ने इसे समर्थन बताया है।
रूस और चीन की तीखी प्रतिक्रिया
रूस ने अमेरिका की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि किसी भी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप सही नहीं है। रूसी विदेश मंत्रालय ने बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।
चीन ने भी इस कदम को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताते हुए कहा कि किसी संप्रभु देश के साथ इस तरह का व्यवहार संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुरूप नहीं है।
समर्थन में कौन आया आगे
अर्जेंटीना और इक्वाडोर जैसे देशों के नेताओं ने अमेरिकी फैसले का समर्थन किया है। अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई ने इसे “आजादी की जीत” करार दिया।
इक्वाडोर के राष्ट्रपति डेनियल नोबोआ ने कहा कि संगठित अपराध और ड्रग्स नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है।
वहीं, उद्योगपति एलन मस्क ने सोशल मीडिया पर इसे वैश्विक स्तर पर तानाशाही के खिलाफ संदेश बताया।
इटली की मिली-जुली प्रतिक्रिया
इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने कहा कि इटली ने पहले भी मादुरो सरकार की नीतियों की आलोचना की है, लेकिन सैन्य कार्रवाई को समाधान नहीं माना जा सकता। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा किसी भी सरकार की प्राथमिकता होती है।
अन्य देशों का रुख
ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला द सिल्वा ने इसे वेनेजुएला की संप्रभुता पर हमला बताया और मध्यस्थता की पेशकश की।
यूरोपीय संघ ने अमेरिका और वेनेजुएला दोनों से संयम बरतने की अपील की है। ईयू की विदेश नीति प्रमुख ने अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान पर जोर दिया।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि इस कार्रवाई में ब्रिटेन की कोई भूमिका नहीं है और वेनेजुएला में शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण होना चाहिए।
फ्रांस ने भी क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन की अपील की है।






















