"आयुष्मान भारत योजना में विशेषज्ञों की जरुरत, डॉक्टर्स फेडरेशन ने शासन को सौंपा ज्ञापन! ICU सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार पर उठी नई मांग"

ब्रेकिंग न्यूज़: आयुष्मान भारत योजना में विशेषज्ञों की मांग

रायपुर। छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन (CGDF) ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के तहत क्रिटिकल केयर मेडिसिन विशेषज्ञों को शामिल करने की मांग को लेकर राज्य शासन को ज्ञापन सौंपा है। फेडरेशन का मानना है कि वर्तमान व्यवस्था में गंभीर मरीजों का उपचार करने के लिए आवश्यक विशेषज्ञता को पर्याप्त स्थान नहीं मिल रहा, जिससे उपचार की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है।

विशेषज्ञों की आवश्यकता पर जोर

CGDF के अध्यक्ष डॉ. हीरा सिंह लोधी ने कहा, "क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ ICU में जीवनरक्षक उपचार के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित होते हैं। इन्हें PM-JAY के ढांचे में शामिल किया जाना अत्यावश्यक है, ताकि गंभीर मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज मिल सके।" इस प्रकार के विशेषज्ञों की उपस्थिति से न केवल उपचार में गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि मरीजों की रिकवरी दर भी बेहतर होगी।

उपाध्यक्ष डॉ. ए. प्रसांत ने भी इस पर प्रकाश डालते हुए कहा, "विशेषज्ञों की भागीदारी से मरीजों की रिकवरी दर में सुधार होता है और अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि कम होती है, जिससे स्वास्थ्य प्रणाली पर भार भी कम पड़ता है।"

PM-JAY में सुधार के लिए महत्वपूर्ण सुझाव

फेडरेशन का कहना है कि जबकि PM-JAY योजना में कई सुपर-स्पेशियलिटी सेवाएं शामिल की गई हैं, परंतु क्रिटिकल केयर मेडिसिन विशेषज्ञों को औपचारिक रूप से मान्यता नहीं दी गई है। इससे ICU प्रबंधन में व्यावहारिक कठिनाइयां उत्पन्न हो रही हैं, विशेषकर जटिल और आपातकालीन मामलों में। डॉ. रेशम, जो फेडरेशन के जूडो अध्यक्ष हैं, ने बताया कि ऐसे मामलों में विशेषज्ञों की आवश्यकता को अनदेखा नहीं किया जा सकता।

टियर-2 और टियर-3 शहरों को मिलेंगे लाभ

फेडरेशन यह विश्वास जाहिर करता है कि अगर इन विशेषज्ञों को योजना में शामिल किया जाता है, तो छोटे शहरों और जिला अस्पतालों में भी उच्च स्तरीय ICU सेवाएं उपलब्ध होंगी। इससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना होगा, जिससे उनकी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में सुधार होगा।

मुख्य मांगें:

  1. ICU और क्रिटिकल केयर पैकेज में विशेषज्ञों को शामिल किया जाए।
  2. एम्पैनलमेंट और प्रतिपूर्ति नीति में संशोधन किया जाए।
  3. अस्पतालों में फुल-टाइम इंटेंसिविस्ट की नियुक्ति को बढ़ावा दिया जाए।

CGDF ने शासन से इन मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने और आवश्यक कदम उठाने की अपील की है, ताकि आयुष्मान भारत योजना की गुणवत्ता और प्रभावशीलता को और भी मजबूत किया जा सके।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन की यह पहल न केवल नागरिकों के स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए है, बल्कि यह स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्तापरकता को भी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्तवपूर्ण कदम है। अगर शासन इस दिशा में ध्यान देकर आवश्यक सुधार करता है, तो इससे प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नई क्रांति आ सकती है।

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