बड़ा समाचार: फिलिपींस में ऊर्जा आपातकाल का घोषणा
फिलिपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने देश में ऊर्जा संकट को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल की घोषणा की है। यह कदम उस समय उठाया गया है जब देश में ईंधन की कीमतों में तेजी से वृद्धि हो रही है और परिवहन संघों ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं।
आपातकालीन स्थिति के पीछे का कारण
राष्ट्रपति मार्कोस ने मंगलवार को बताया कि यह आपातकालिक स्थिति अमेरिका-इजराइल युद्ध और देश की ऊर्जा आपूर्ति को होने वाले संभावित खतरे को देखते हुए की गई है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार को मौजूदा कानूनों के तहत प्रभावी और समन्वित उपाय करने की अनुमति मिलेगी।
इसके तहत एक समिति का गठन किया गया है, जो ईंधन, भोजन, दवाओं और अन्य आवश्यक वस्तुओं के वितरण को सुनिश्चित करेगी। यह आपातकाल एक साल तक प्रभावी रहेगा, जिससे सरकार ईंधन और पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद कर सकेगी और जरूरत पड़ने पर अग्रिम भुगतान भी कर सकेगी।
परिवहन संघों की प्रतिक्रिया
लेकिन परिवहन संघों ने इस कदम की आलोचना की है। पीस्टन नामक संघ ने इसे “सुपरफिशियल बैंड-एड” बताया, जो समस्या के मूल कारणों को नजरअंदाज करती है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वाकई परिवहन श्रमिकों और यात्रियों की रक्षा करना चाहती है तो उसे तुरंत ईंधन उत्पादों पर एक्साइज टैक्स और वैल्यू-एडेड टैक्स को निलंबित करना चाहिए।
संघ के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि सरकार का केवल “लाभ पर नजर रखने” का प्रयास कोई ठोस समाधान नहीं है, जब तक बहुराष्ट्रीय तेल कार्टेल को अत्यधिक कीमतें तय करने की कानूनी अनुमति है।
संकट के उपाय और सरकारी कदम
सरकार ने कुछ राहत उपाय भी घोषित किए हैं, जैसे कि छात्रों और श्रमिकों को मुफ्त बस सेवाओं की सुविधा और मोटरसाइकिल टैक्सी चालकों को 5,000 पेसो की सहायता प्रदान करना। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि यह उपाय भी संकट की गंभीरता को कम नहीं करते हैं।
रेनातो रेयेस जूनियर, एक सामाजिक कार्यकर्ता, ने कहा कि यह घोषणा मूल समस्या, अर्थात् बढ़ती तेल की कीमतों पर नियंत्रण करने की ओर कोई ध्यान नहीं देती। उन्होंने यह भी सवाल किया कि आखिर कीमतों पर नियंत्रण की आवश्यकता कब पूरी होगी।
इस प्रकार, फिलिपींस में नई ऊर्जा आपातकाल के उपायों के बावजूद, सरकार की ओर से उठाए गए कदम अभी भी विवाद का विषय बने हुए हैं।
