भारत की CO2 उत्सर्जन वृद्धि, पिछले 20 वर्षों में सबसे धीमी: अध्ययन

ब्रेकिंग न्यूज़: भारत में कार्बन उत्सर्जन में हुई मंदी, 2025 में केवल 0.7% की वृद्धि
भारत में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन में आई रुकावट ने हर किसी का ध्यान आकर्षित किया है। एक नई शोध रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है कि 2025 में CO2 उत्सर्जन की दर पिछले दो दशकों में सबसे धीमी है।

भारत के ऊर्जा उद्योग में बदलाव

क्लीन एयर रिसर्च सेंटर (CREA) द्वारा की गई एक नई विश्लेषण में बताया गया है कि भारत के ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव हो रहे हैं। 2025 में देश ने 38 गीगावाट (GW) सौर ऊर्जा, 6.3GW पवन ऊर्जा, 4.0GW जल विद्युत और 0.6GW परमाणु ऊर्जा का नया क्षमता जोड़ा। इसके परिणामस्वरूप, भारत की बिजली मांग में वृद्धि पर क्लीन ऊर्जा की बढ़ोतरी हावी होना शुरू हो गया है।

बिजली क्षेत्र में 3.8% की गिरावट दर्ज की गई है, जो कि रिकॉर्ड क्लीन ऊर्जा वृद्धि और कम बिजली मांग का परिणाम है। जैसे-जैसे मौसम सामान्य होता गया, कई औद्योगिक क्षेत्र में उत्पादन में गिरावट देखने को मिली। इस बदलाव का सबसे बड़ा असर गुजरात, तमिलनाडु और राजस्थान जैसे राज्यों पर पड़ा है, जहाँ कोयला ऊर्जा उत्पादन में कमी आई है।

तेल मांग में गिरावट

तेल की मांग में भी उल्लेखनीय गिरावट दृष्टिगोचर हो रही है। 2024 में 3.9% वृद्धि से 2025 में यह घटकर 0.4% तक आ गई है। खासकर पेट्रोकेमिकल और सीमेंट उद्योगों में मांग में गिरावट आई है। नाफ्था, पेटकोक और अन्य तेल उत्पादों की मांग में भी कमी आई है।

इस गिरावट का एक मुख्य कारण भारत में प्लास्टिक और उसके अवयवों का आयात बढ़ना है। चीन की बढ़ती पेट्रोकेमिकल उद्योग के चलते भारत में दाम गिरने की शिकायतें भी आ रही हैं। इसके अलावा, भारत का नाफ्था का निर्यात भी चीन को बड़े पैमाने पर बढ़ा है।

कोयला ऊर्जा के लिए विस्तार की योजनाएँ

हालांकि भारत में उत्सर्जन में गिरावट आई है, फिर भी देश कोयला ऊर्जा में बड़ी वृद्धि की योजना बना रहा है। सरकार अगले सात वर्षों में 85GW नई कोयला ऊर्जा क्षमता जोड़ने का लक्ष्य रखती है। इसके अलावा, 2040 तक पेट्रोकेमिकल उद्योग में 1 ट्रिलियन डॉलर का निवेश करने और 2025 से 2031 के बीच स्टील उत्पादन क्षमता को 50% बढ़ाने की भी योजना है।

इस सप्ताह, भारत की मंत्रिमंडल ने 2035 के लिए नए जलवायु प्रतिबंधों को मंजूरी दी है, जिसमें 2005 के स्तर से कार्बन इंटेंसिटी में 47% की कमी का लक्ष्य है। विशेषज्ञों का मानना है कि Central Electricity Authority की हालिया प्रक्षेपण के अनुसार, यह 60% लक्ष्य 2030 तक ही पूरा किया जा सकता है।

विश्लेषण से पता चलता है कि यदि भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.8% रहने पर CO2 उत्सर्जन 2025 से 2035 तक सालाना 6% बढ़ सकता है, फिर भी कार्बन इंटेंसिटी के लक्ष्यों को पूरा किया जा सकता है।

विश्लेषण का निष्कर्ष है कि अगले 5-10 वर्षों में भारत की ऊर्जा और उत्सर्जन की दिशा इन संभावित विरोधाभासों के समाधान पर निर्भर करेगी। सरकार की नीतियों और क्लीन ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित कर यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि आने वाले समय में ऊर्जा की जरूरतें पूरी हों।

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