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CG IFS ट्रांसफर: सरकार ने जारी की अफसरों की नई लिस्ट, जानें कौन बदला पद!

ब्रेकिंग न्यूज: छत्तीसगढ़ में आईएफएस अधिकारियों के तबादले

राज्य सरकार ने जारी की तबादला सूची

रायपुर: छत्तीसगढ़ शासन ने हाल ही में पांच आईएफएस अधिकारियों के तबादले की सूची सार्वजनिक की है। यह जानकारी छत्तीसगढ़ वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अवर सचिव डीआर चंद्रवंशी द्वारा जारी की गई। इस सूची में विभिन्न पदों पर कार्यरत अधिकारियों का नाम शामिल है, जिनमें नए दायित्व सौंपे गए हैं।

तबादले की सूची में शामिल अधिकारी

  1. विवेकानंद झा:
    विवेकानंद झा, जो 2009 बैच के आईएफएस अधिकारी हैं, को वन संरक्षक (प्रशासन/राजपत्रित एवं समन्वय) के पद पर उनके वर्तमान दायित्व के साथ-साथ वन संरक्षक, FMIS मंडल, रायपुर का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

  2. सतोविशा समाजदार:
    2010 बैच की आईएफएस अधिकारी, सतोषी समाजदार को प्रभारी मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं क्षेत्र निदेशक, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व, रायपुर के पद पर नियुक्त किया गया है। उन्हें अतिरिक्त प्रभार वन संरक्षक, FMIS मंडल भी दिया गया है।

  3. गुरूनाथन एन.:
    2012 बैच के आईएफएस अधिकारी, गुरूनाथन एन. को वर्तमान दायित्वों के साथ-साथ प्रभारी मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) और क्षेत्र निदेशक, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्तियाँ

  1. अभिषेक कुमार सिंह:
    2009 बैच के अभिषेक कुमार सिंह को प्रभारी मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) और क्षेत्र संचालक, अचानकमार टाइगर रिजर्व, बिलासपुर के पद पर नियुक्त किया गया है, साथ ही उन्हें क्षेत्रीय महाप्रबंधक, छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड बिलासपुर का दायित्व भी दिया गया है।

  2. प्रियंका पाण्डेय:
    प्रियंका पाण्डेय, जो 2012 बैच की आईएफएस अधिकारी हैं, को वन उप संरक्षक (सतर्कता) के रूप में पदस्थ किया गया है। उन्हें प्रभारी मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) तथा क्षेत्र निदेशक, अचानकमार टाइगर रिजर्व, बिलासपुर का पद भी प्रदान किया गया है।

निष्कर्ष

इन तबादलों का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के वन विभाग में प्रशासनिक क्षमता को बढ़ाना और वन्यजीवों के संरक्षण में सुधार लाना है। इस निर्णय से अधिकारी न केवल अपने नए दायित्वों को समझेंगे, बल्कि वन एवं पर्यावरण से संबंधित नीतियों में भी अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे। वन्यजीव संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण है।

राज्य सरकार की यह पहल वन विभाग के कार्य को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होगी।

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