भारत का स्तूप हॉक-आई को टक्कर देता, बैडमिंटन में सटीकता लाता

बड़ी खबर: भारतीय तकनीक ने बैडमिंटन क्षेत्र में लहरें पैदा की हैं! दिल्ली की एक कंपनी ने स्वदेशी सिस्टम को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाई है।

दिल्ली स्थित स्टुपा इंक द्वारा विकसित ‘इंस्टेंट रिव्यू सिस्टम’ (IRS) को बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन (BWF) से स्वीकृति मिली है। यह नया प्रणाली विश्व स्तर पर प्रसिद्ध हॉकआई के साथ प्रतिस्पर्धा करेगा।

स्टुपा का सफल अनुभव: तेज़ और सटीक निर्णय

भारतीय मशीन लर्निंग इंजीनियरों ने एक ऐसी प्रणाली बनाई है जो 20 से 30 सेकंड में फैसले ले सकती है। यह प्रणाली 99% से ज़्यादा सटीकता से काम करती है, जो BWF के मुख्य मानदंडों में से एक है। स्टुपा के सह-संस्थापक मेघा गम्भीर ने बताया, "हम फैसले लेने के समय को 10 सेकंड से भी कम करने पर काम कर रहे हैं।"

BWF ने बैडमिंटन का विस्तार करने की योजना बनाई है, जिससे हर मैच में अनुशासन का स्तर बढ़ सके। वर्तमान में, कई कोर्ट Luck और मानवीय प्रयास पर निर्भर करते हैं, जिससे फैसले लेने में कठिनाई होती है। हॉकआई जैसी मशीनें प्रति दिन हर कोर्ट के लिए लगभग 5,000 से 7,000 डॉलर लेती हैं, जबकि स्टुपा की तकनीक लागत को लगभग 1,000 से 1,500 डॉलर प्रति दिन तक घटा देती है।

तकनीक में शानदार उपलब्धियां

स्टुपा की प्रणाली ने जो निर्णय गति हासिल की है, वह अद्भुत है। मेघा गम्भीर कहती हैं, "80% सटीकता हासिल करना आसान है, लेकिन 90% से 99% तक पहुंचना सब से कठिन है।" कंपनी ने इस प्रणाली को विकसित करने में एक साल से ज्यादा का समय लगाया, जहां उन्होंने विभिन्न परिस्थितियों का परीक्षण किया।

इस प्रणाली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कैमरे की फ्रेम और कंप्यूटर विजन पर केवल निर्भर नहीं है। "पुराने सिस्टम में, यदि एक फ्रेम गिरता है या खिलाड़ी कैमरे के दृश्य में आ जाता है, तो सटीकता कम हो जाती है। हमारा नया दृष्टिकोण इससे पहले की सीमाओं से आगे निकल जाता है," मेघा कहती हैं।

कला और विज्ञान का संगम

स्टुपा केवल तकनीक पर निर्भर नहीं है। बैडमिंटन की विशेषताओं को समझने में गहरी समस्या थी। मेघा बताती हैं, "शटलकॉकी का व्यवहार दूसरे खेलों के गेंदों से बहुत अलग होता है। हमें शटल के भौतिक गुणों को समझने के लिए गहराई से काम करना पड़ा।"

उन्होंने अपनी टीम के साथ कई परीक्षण किए हैं ताकि प्रक्रिया को सही किया जा सके। एक बार, जब उनका सिस्टम BWF के सामने प्रदर्शन कर रहा था, तो अचानक तकनीकी दिक्कत आई। मेघा कहती हैं, "यह एक भयावह क्षण था जब हमारी प्रणाली ठीक से काम नहीं कर रही थी। लेकिन हमने उस समस्या को सुलझाने में एक सप्ताह बिताया।"

भारत में तकनीकी नवाचार पर कई चुनौतियाँ हैं। "यूरोपीय ग्राहक हमारी तकनीक की गुणवत्ता पर संदेह करते थे। लेकिन अब हमारे कई ग्राहक हमारी विश्वसनीयता से प्रभावित हो रहे हैं," मेघा ने बताया।

स्टुपा को 30 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी मिली हैं, जो कि तीन से पांच वर्षों के अनुबंध पर हैं। यह भारतीय तकनीक की वैश्विक पहचान के लिए एक बड़ा कदम है।

कुल मिलाकर, स्टुपा का योगदान न केवल बैडमिंटन बल्कि पूरे खेल उद्योग के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। यह न केवल भारत की तकनीकी क्षमताओं को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक मंच पर उसकी गूंज भी बढ़ा रहा है।

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