ब्रेकिंग न्यूज: भारत ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए नए लक्ष्य निर्धारित किए हैं। नए राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDC) में 60% गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों का लक्ष्य शामिल है, जो वैश्विक चुनौतियों के बीच प्रभावी जलवायु कार्रवाई की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
भारत का नया NDC: ताजा अपडेट
भारत ने अपनी अद्यतन राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDC) को मंजूरी दी है। इस नए उद्देश्यों के अनुसार, 2035 तक स्थापित पावर क्षमता का 60% गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त करने, 2005 के स्तर से उत्सर्जन की तीव्रता में 47% की कमी और कार्बन सिंक को 3.5 से 4 अरब टन CO₂ समकक्ष तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
यह निर्देश राष्ट्रीय जलवायु रणनीतियों के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में एक सकारात्मक कदम है। भारत की यह नई आकांक्षा अन्य जी20 देशों के साथ 2035 के जलवायु लक्ष्यों में समन्वय को भी दर्शाती है।
पुराने बनाम नए लक्ष्यों की तुलना
भारत के पहले NDC में 2022 में गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों से 50% क्षमता का लक्ष्य रखा गया था। इसके अतिरिक्त, इसकी उत्सर्जन तीव्रता में 45% की कमी और 2.5 से 3 अरब टन CO₂ समकक्ष का कार्बन सिंक लक्ष्य था।
अब, नए लक्ष्य में प्रमुख बदलाव देखा जा रहा है:
- 2035 तक 60% गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता
- 47% की उत्सर्जन तीव्रता में कमी
- उच्चतर कार्बन सिंक लक्ष्य
हालांकि, भारत ने पहले ही 2026 की शुरुआत तक लगभग 52% गैर-जीवाश्म क्षमता हासिल कर ली है, जो अब तक के लक्ष्यों से अधिक है।
NDCs और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन
हालांकि NDCs जलवायु कार्रवाई के लिए एक ढांचा प्रदान करते हैं, लेकिन उनके प्रभावी होने की परिकल्पना में बहुत चर्चा की जाती है।
अनुसंधान रिपोर्टों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर 2015 से विभिन्न देशों ने अपने लक्ष्यों को पूरा करने में विफलता दिखाई है। वर्तमान में, केवल 14% उत्सर्जन के अंतर को पूरा करने के लिए NDCs अस्तित्व में हैं, जबकि नीतिगत कार्रवाई में कोई वास्तविक मजबूती नहीं आई है।
भारत का उत्सर्जन प्रवृत्ति: सुस्ती के संकेत
2025 में किए गए विश्लेषण के अनुसार, भारत में CO₂ उत्सर्जन केवल 0.7% बढ़ा, जो पिछले 20 वर्षों में सबसे कम है। कोयला आधारित उत्सर्जन में भी गिरावट आई है, जिसमें बिजली क्षेत्र से 3.8% की कमी आई है।
निष्कर्ष
भारत की जलवायु प्रगति अब विकास और स्थिरता के बीच की विरोधाभास को हल करने पर निर्भर करेगी। इसके साथ ही, अक्षय ऊर्जा विस्तार के साथ वास्तविक कार्बन सिंक को मजबूत करना भी आवश्यक है।
अंत में
भारत का नया NDC जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन उसे अपनी रणनीतियों को आगे बढ़ाते रहना होगा। इस दिशा में उपयोगी कदम उठाना और नीतियों को प्रभावी बनाना आवश्यक है।
स्रोत: TH | PIB