Become a member

Get the best offers and updates relating to Liberty Case News.

― Advertisement ―

spot_img

‘फाइलों में चालू’ RO, गांवों में डिब्बों में बंद: ₹49,300 प्रति यूनिट के दावे पर सवाल

शहर में मरम्मत का असर, ग्रामीण केंद्रों में न इंस्टॉलेशन न बिजली—जमीनी जांच ने खोली पोल

महासमुंद। जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में लगाए गए आर.ओ. (RO) फिल्टर को लेकर प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। जहां विभाग की ओर से 1106 केंद्रों में RO चालू होने की बात कही जा रही है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में की गई जांच में कई जगह मशीनें डिब्बों में बंद या बिना उपयोग पड़ी मिलीं।


🔍 ग्राउंड रिपोर्ट: दो गांव, दो तस्वीरें

यहां पहले वीडियो देखिए

📦 बाम्हनसरा

यहां आंगनबाड़ी केंद्र में मौजूद सहायिका ने प्रारंभ में RO नहीं दिखा पाई। बाद में कार्यकर्ता कौशिल्या साहू से फोन पर जानकारी मिली कि:

“RO एक साल पहले मिला था, लेकिन उसे कैसे फिट करना है, यह जानकारी नहीं है… इसलिए डिब्बे में ही रखा है।”

इसके बाद स्टोरनुमा जगह से बॉक्स निकालकर दिखाया गया—यानी मशीन अब तक इंस्टॉल ही नहीं हुई


“₹74 लाख की जल योजना अधूरी: 30 माह बाद भी गांव प्यासा, टंकी बनी ‘शोपीस’

🔌 चंदरपुर

दूसरे गांव चंदरपुर में आंगनबाड़ी केंद्र बंद मिला। कार्यकर्ता के घर पहुंचने पर उन्होंने बताया:

“RO मिला है, लेकिन भवन में बिजली और बैठने की सुविधा नहीं है… इसलिए मशीन घर में सुरक्षित रखी है।”

यहां साफ है कि बुनियादी सुविधाओं के अभाव में मशीन उपयोग में नहीं आ पा रही।


💰 कीमत पर क्या है स्थिति?

मीडिया ग्रुप में साझा जानकारी के अनुसार, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी टिकेंद्र जटवार ने प्रति RO की कीमत लगभग ₹49,300 बताई है।

⚠️ हालांकि, इस कीमत की आधिकारिक पुष्टि (टेंडर/बिल/दस्तावेज) उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसे विभागीय दावा माना जा रहा है।


🌆 शहर बनाम 🌾 गांव: विरोधाभास

क्षेत्रस्थिति
शहरी क्षेत्रमरम्मत/जीर्णोद्धार के कारण RO बंद
ग्रामीण क्षेत्रमशीनें इंस्टॉल नहीं / बिजली नहीं / डिब्बों में बंद

👉 इससे स्पष्ट है कि समस्या सिर्फ मरम्मत तक सीमित नहीं, बल्कि योजना के क्रियान्वयन में गंभीर खामियां हैं।


❗ आंकड़ों बनाम हकीकत

  • दावा: 1106 RO चालू
  • हकीकत (जांच में):
    • कहीं इंस्टॉलेशन नहीं
    • कहीं उपयोग नहीं
    • कहीं मशीन केंद्र में मौजूद ही नहीं

❓ उठते बड़े सवाल

  • बिना इंस्टॉलेशन और ट्रेनिंग के मशीनें क्यों दी गईं?
  • जिन केंद्रों में बिजली नहीं, वहां RO स्वीकृत कैसे हुए?
  • “चालू” का आंकड़ा किस आधार पर तैयार हुआ?
  • क्या फिजिकल वेरिफिकेशन किया गया था?

📢 जमीनी तस्वीर

शहर में मरम्मत के कारण RO बंद होने की खबर के बीच ग्रामीण क्षेत्रों की जमीनी तस्वीर बताती है कि योजना का क्रियान्वयन अधूरा है। कई केंद्रों में करोड़ों रुपए की मशीनें या तो डिब्बों में बंद हैं या बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बेकार पड़ी हैं।

जब तक वास्तविक स्थिति का सत्यापन और आवश्यक सुधार नहीं किया जाता, तब तक “चालू” के दावे सवालों के घेरे में रहेंगे।