कक्षा में स्टील की बोतल से फोड़ा सिर, दो छात्र घायल; स्कूलों में सुरक्षा और अनुशासन पर उठे सवाल
महासमुंद/रायपुर। स्कूलों में बढ़ रही हिंसा: छत्तीसगढ़ के स्कूलों में छात्रों के बीच बढ़ती हिंसक घटनाएं चिंता का विषय बनती जा रही हैं। तिल्दा-नेवरा में 11वीं कक्षा के छात्रों के बीच चाकूबाजी में एक छात्र की मौत के अगले ही दिन महासमुंद जिले के कोमाखान स्थित स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल में दो छात्रों के बीच हुई मारपीट में एक छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था और छात्रों में बढ़ती आक्रामकता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तिल्दा में स्कूल के बाहर खूनी संघर्ष, 11वीं के छात्र की चाकूबाजी में मौत
बैठक के दौरान कक्षा में भिड़े छात्र
जानकारी के अनुसार शनिवार को आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल कोमाखान में शिक्षकों की बैठक चल रही थी। इसी दौरान कक्षा 8वीं के दो छात्रों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों आपस में भिड़ गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एक छात्र ने स्टील की पानी की बोतल से दूसरे छात्र के सिर पर हमला कर दिया, जिससे वह लहूलुहान हो गया।
घटना में दोनों छात्रों के चेहरे और सिर पर चोटें आई हैं। स्कूल प्रबंधन ने तत्काल दोनों बच्चों को अस्पताल भेजकर प्राथमिक उपचार कराया। स्कूल के प्राचार्य आर.एस. ठाकुर ने बताया कि शिक्षकों की बैठक के दौरान यह घटना हुई। दोनों बच्चों का उपचार कराकर उन्हें समझाइश दी गई है।
एक दिन पहले तिल्दा में हुई थी छात्र की मौत
गौरतलब है कि शुक्रवार को रायपुर जिले के तिल्दा-नेवरा क्षेत्र में स्थित सरस्वती स्कूल के दो 11वीं कक्षा के छात्रों के बीच पुरानी रंजिश को लेकर विवाद हो गया था। स्कूल की छुट्टी के बाद दोनों के बीच चाकूबाजी हुई, जिसमें एक छात्र की मौत हो गई जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस के अनुसार दोनों छात्रों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था, जो देखते ही देखते खूनी संघर्ष में बदल गया।
बढ़ रही हिंसक प्रवृत्ति, अभिभावक चिंतित
लगातार सामने आ रही घटनाओं से अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया, मोबाइल गेम्स, आपसी तनाव और निगरानी की कमी के कारण बच्चों में आक्रामक व्यवहार बढ़ रहा है। स्कूलों में अनुशासन, काउंसलिंग और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अब नए सिरे से विचार करने की जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि छोटी-छोटी बातों पर होने वाले विवाद हिंसक घटनाओं में न बदलें।
बड़ा सवाल
- क्या स्कूलों में विद्यार्थियों की काउंसलिंग पर्याप्त हो रही है?
- क्या शिक्षकों और प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था मजबूत है?
- बच्चों में बढ़ती आक्रामकता को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
लगातार सामने आ रही घटनाएं संकेत दे रही हैं कि अब स्कूलों में केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि छात्रों के व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
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