45 साल के संघर्ष के बाद पुत्र को मिला पिता का नाम – महासमुंद जिला अदालत ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला

महासमुंद जिला अदालत ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला

महासमुंद, 13 नवम्बर 2025। कहते हैं, “सत्य की राह लंबी जरूर होती है, लेकिन मंज़िल निश्चित मिलती है।” यही सच हाल-फिलहाल महासमुंद जिले में देखने को मिला, जहाँ 45 साल तक न्याय की लड़ाई लड़ने वाले एक पुत्र को आखिरकार जिला अदालत से अपने पिता का नाम और पैतृक संपत्ति में अधिकार मिल गया।

यह मामला पिथौरा ब्लॉक के ग्राम जाममुडा का है, जिसमें याचिकाकर्ता — पद्मलोचन — का दावा था कि वह परिवार का वैधानिक पुत्र है। वर्षों पहले परिवार की ओर से उसे अपने बेटे के रूप में मानने से इनकार कर दिया गया था, जिससे उसे भावनात्मक आघात होने के साथ-साथ पैतृक भूमि के बंटवारे में भी बाहर रखा गया था।

मामला- क्या था विवाद

पुराने पारिवारिक विवाद के बाद याचिकाकर्ता ने सामाजिक और कानूनी मार्ग अपनाकर पिता का नाम कानूनी रूप से स्थापित करने की कोशिशें शुरू कीं। पिता ने बार-बार डीएनए जांच से पल्ला झाड़ा। लंबी कानूनी प्रक्रियाओं के बाद मामला फास्ट-ट्रैक कोर्ट तक पहुंचा। कोर्ट ने प्रस्तुत दस्तावेज़, साक्ष्य और पिता के व्यवहार का निरीक्षण कर याचिकाकर्ता के पक्ष में निर्णय दिया।

अदालत ने क्या कहा- डीएनए से बचने पर ‘adverse inference’

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पिता द्वारा बार-बार डीएनए जांच से इनकार को न्यायिक दृष्टि से ‘adverse inference’ (नकारात्मक अनुमान) माना जाएगा। इस आधार पर न्यायालय ने निर्णय लिया कि याचिकाकर्ता को पिता का वैधानिक पुत्र स्वीकारा जाए और उसे पैतृक संपत्ति में हक़ दिया जाए — अदालत ने पुत्र को पिता की संपत्ति में 1/5 हिस्सा आवंटित करने के निर्देश भी दिए।

अदालत परिसर में भावनात्मक लम्हे

फैसला सुनाते समय अदालत परिसर में भावनात्मक माहौल था। वर्षों से संघर्ष करते रहे पुत्र की आँखों में आंसू थे। परिवार के कई सदस्यों और स्थानीय लोगों ने फैसले को सामाजिक न्याय और पारिवारिक मान्यता का प्रतीक बताया। कई लोगों ने इस मामले को “सत्य-जीत” का उदाहरण करार दिया।

समाज में संदेश और प्रतिबिंब

यह फैसला न केवल याचिकाकर्ता की व्यक्तिगत जीत है, बल्कि बड़े स्तर पर सामाजिक संदेश भी देता है, कि कानूनी प्रक्रिया से न्याय संभव है और पारिवारिक अस्वीकार जैसे मामलों में भी क़ानूनी सहारा मिल सकता है। यह उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो वर्षों तक पहचान और अधिकार की लड़ाई लड़ रहे हैं।

स्रोत और क्रेडिट

समाचार स्रोत: नवभारत समाचार पत्र, महासमुंद संस्करण (13 नवम्बर 2025)

ई-पेपर संदर्भ: epaper.navabharat.news

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