ब्रेकिंग न्यूज: छत्तीसगढ़ में नकली पनीर के खिलाफ खाद्य विभाग की कार्रवाई
रायपुर | 12 अप्रैल 2026
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नकली पनीर की बढ़ती शिकायतों के चलते खाद्य विभाग ने एक बार फिर से सक्रियता दिखाई है। राजधानी के तीन पनीर निर्माण फैक्ट्रियों पर छापा मारकर जांच की गई, जिसके तहत अधिकारियों ने पनीर के नमूने डॉक्टरों द्वारा परीक्षण के लिए भेज दिए हैं। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
शिकायतों के आधार पर छापा
खाद्य विभाग को पिछले कुछ दिनों से नकली पनीर और खाद्य गुणवत्ता से संबंधित अनेक शिकायतें मिल रही थीं। इसी के आधार पर विभाग ने भाठागांव स्थित हरि ओम नगर की पनीर फैक्ट्री समेत तीन स्थानों पर एक साथ छापा मारा। इस दौरान, अधिकारियों ने पनीर बनाने के प्रक्रिया का निरीक्षण किया। उन्होंने देखा कि पनीर किस प्रकार तैयार किया जा रहा है और कौन से कच्चे माल का इस्तेमाल किया जा रहा है। नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं, और विभाग का कहना है कि लैब रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
संदिग्ध सामग्री की मिली जानकारी
छापे के दौरान अधिकारियों को फैक्ट्री से बड़ी मात्रा में मिल्क पाउडर और खाना बनाने में इस्तेमाल होने वाले तेल के डिब्बे मिले। इन सामग्रियों की मौजूदगी ने संदेह को बढ़ा दिया है कि उत्पादन में मानकों का उल्लंघन हो सकता है। अधिकारी अब यह जानने में जुटे हैं कि इन सामग्रियों का उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा था। छापे के दौरान संचालकों से भी सवाल-जवाब किए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
आम जनता की सेहत के साथ खिलवाड़
नकली पनीर के बढ़ते मामलों से यह स्पष्ट हो रहा है कि कुछ लोग चंद पैसों के लिए जनता की सेहत के साथ खेल रहे हैं। इस स्थिति से बचने के लिए लोगों को सलाह दी गई है कि वे पनीर खरीदते समय सतर्क रहें और सिर्फ विश्वसनीय स्रोतों से ही पनीर खरीदें। पनीर की गुणवत्ता की जांच हमेशा करें ताकि आपकी सेहत को किसी प्रकार का नुकसान न हो।
निष्कर्ष
नकली पनीर के मामले छत्तीसगढ़ में एक गंभीर मुद्दा बनते जा रहे हैं। खाद्य विभाग की कार्रवाई से उम्मीद की जा रही है कि आत्मीयता और गुणवत्ता की रक्षा में कुछ सुधार होगा। लोगों को यह समझना होगा कि स्वास्थ्य सबसे महत्वपूर्ण है और खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरूक रहना आवश्यक है। भविष्य में इस तरह के मामलों की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए सरकार और स्थानीय प्रशासन को ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
