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लॉटरी से चुने गए नगर पालिका अध्यक्ष, हारी उम्मीदवार ने हाई कोर्ट में की चुनौती – अदालत का ऐतिहासिक फैसला!

ब्रेकिंग न्यूज़: बिलासपुर हाईकोर्ट ने लॉटरी प्रणाली से नपाध्यक्ष चुने जाने को दी मंजूरी

बिलासपुर, 12 अप्रैल 2026— छत्तीसगढ़ की कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर में नगर पालिका के चुनाव परिणामों के विवाद पर छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। फरवरी 2021 में हुए चुनाव में भाजपा की नविता शैलेष शिवहरे और कांग्रेस की साधना जायसवाल को समान मत प्राप्त हुए थे। इसके बाद नपाध्यक्ष का चयन लॉटरी प्रणाली से किया गया, जिसमें नविता शिवहरे विजयी हुईं।

लॉटरी प्रणाली का चुनावी निर्णय

बैकुंठपुर नगर पालिका परिषद में दिसंबर 2021 में चुनाव संपन्न हुए थे। चुनाव अधिकारी ने विजयी पार्षदों की उपस्थिति में 1 जनवरी 2022 को नपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव का आयोजन किया। यह चुनाव भाजपा की नविता शिवहरे और कांग्रेस की साधना जायसवाल के बीच हुआ। जब दोनों को बराबर वोट मिले, तब सभी पार्षदों की सहमति से लॉटरी प्रणाली अपनाई गई। इस प्रक्रिया में नविता शिवहरे को नपाध्यक्ष चुना गया।

अदालत में दायर याचिका

पराजित उम्मीदवार साधना जायसवाल ने लॉटरी प्रणाली के आधार पर निर्णय को चुनौती देते हुए जिला न्यायालय में याचिका दायर की थी। न्यायालय ने मामले की सुनवाई के बाद मई 2025 में याचिका को खारिज कर दिया। याचिका के खारिज होने के बाद, जायसवाल ने उच्च न्यायालय में अपील की, जो हाल ही में नकार दी गई।

हाईकोर्ट का फैसला

बिलासपुर हाईकोर्ट ने इस मामले की ताज़ा सुनवाई में लॉटरी प्रणाली से नपाध्यक्ष के चयन को वैध ठहराया। हाईकोर्ट के फैसले ने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। यह निर्णय अन्य चुनावों के लिए भी मिसाल साबित हो सकता है।

निष्कर्ष

बिलासपुर हाईकोर्ट का यह फैसला स्पष्ट करता है कि लॉटरी प्रणाली को चुनावी प्रक्रिया में मान्यता दी जा सकती है, बशर्ते सभी इसमें सहमत हों। आगामी दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अन्य क्षेत्रों में भी इस प्रणाली को अपनाया जाएगा। यह फैसला न केवल बैकुंठपुर के निवासियों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ राज्य के लिए एक संदर्भ बिंदु भी बन सकता है।

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