महासमुंद/बागबाहरा। वनपरिक्षेत्र बागबाहरा के तमोरा क्षेत्र में वनभूमि पर अतिक्रमण के मामले को लेकर वन अमले और कुछ लोगों के बीच विवाद के दौरान रेंजर समेत दो अधिकारियों के साथ मारपीट और उन्हें बंधक बनाए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। घटना 6 अक्टूबर की रात की बताई जा रही है। पुलिस और वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर दोनों अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला। घटना के बाद दोनों का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया है।
जानकारी के अनुसार, वनपरिक्षेत्राधिकारी नवीन वर्मा अपने स्टाफ उपवनक्षेत्रपाल नवीन शर्मा, वनरक्षक टोमन दीवान, वॉचर महेश चंद्राकर, वॉचर पूनम साहू और चालक हरदेव वर्मा के साथ ढोड परिसर के कक्ष क्रमांक 95-96 में जंगली सुअर के अवैध शिकार और वन्य मांस के अवैध विक्रय की सूचना पर रात्रि गश्त पर निकले थे।
बताया गया है कि इसी दौरान तमोरा क्षेत्र में वनभूमि पर अतिक्रमण करने वाले कुछ लोगों से वन अमले का विवाद हो गया। आरोप है कि संबंधित लोगों ने वन अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट की धमकी दी और बाद में लाठी-डंडे लेकर मौके पर पहुंचकर वन अमले को घेर लिया। संख्या अधिक होने के कारण कुछ कर्मचारी वहां से सुरक्षित स्थान की ओर चले गए, जबकि रेंजर नवीन वर्मा और उपवनक्षेत्रपाल नवीन शर्मा मौके पर रह गए।

मारपीट में चोट लगने का आरोप
वन विभाग के अनुसार, आरोपित लोगों ने दोनों अधिकारियों के साथ मारपीट की, जिससे उन्हें चोटें आईं और रक्तस्राव हुआ। इस दौरान रेंजर का पर्स तथा उपवनक्षेत्रपाल का मोबाइल फोन छीन लिए जाने का भी आरोप है।
इसके बाद दोनों अधिकारियों को तमोरा वनखंड से लगे खेत में बने एक छोटे मकान में ले जाकर बंधक बनाए रखने की बात सामने आई है। विभाग के मुताबिक दोनों अधिकारियों को रात करीब 7:30 बजे से 12:30 बजे तक करीब पांच घंटे तक वहां रखा गया।
व्हाट्सऐप से दी अधिकारियों और पुलिस को सूचना
घटना की गंभीरता को देखते हुए रेंजर नवीन वर्मा ने व्हाट्सऐप के माध्यम से उच्च अधिकारियों के साथ-साथ बागबाहरा और खल्लारी थाना प्रभारी को घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही पुलिस बल के साथ बागबाहरा और महासमुंद वनपरिक्षेत्र का अमला मौके पर पहुंचा।
वन विभाग का कहना है कि समय रहते पुलिस और वन अमला मौके पर नहीं पहुंचता तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। मौके पर पहुंची टीम ने अधिकारियों को मुक्त कराने का प्रयास किया, लेकिन आरोप है कि संबंधित लोगों ने उन्हें छोड़ने से इनकार कर दिया और पुलिस तथा वन अमले के साथ भी विवाद किया।
इसके बाद पुलिस और वन अमले ने सुरक्षा घेरा बनाकर दोनों अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला और उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। बाद में दोनों अधिकारियों का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया।
शासकीय कार्य में बाधा समेत कई गंभीर आरोप
घटना में शासकीय कार्य में बाधा, मारपीट, धमकी, शासकीय सेवकों के साथ अभद्र व्यवहार, सामान छीनने और अधिकारियों को उनकी इच्छा के विरुद्ध बंधक बनाए जाने जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। वन विभाग के अनुसार उपलब्ध साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य अभिलेखों के आधार पर संबंधित लोगों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।
पहले भी दर्ज हो चुके हैं वन अपराध के मामले
वन विभाग के अनुसार तमोरा क्षेत्र में वनभूमि पर अतिक्रमण और विभागीय कार्य में बाधा से जुड़े मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। अतिक्रमण के प्रयासों को लेकर 25 मार्च 2026 को वन अपराध प्रकरण क्रमांक 19940/12 से 19940/16 तक दर्ज किए गए थे।
इसी तरह 13 मई 2026 को वृक्षारोपण के लिए क्षेत्र की तैयारी के दौरान वन अमले के साथ कथित अभद्र व्यवहार, गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी और शासकीय कार्य में बाधा के मामले में खल्लारी थाने में FIR क्रमांक 0055/2026, दिनांक 14 मई 2026 दर्ज कराई गई थी।
इसके अलावा वनभूमि पर दोबारा जुताई कर खेती करने और रोपित बांबू तथा सागौन के पौधों को नुकसान पहुंचाने के प्रयास के संबंध में 20 जुलाई 2026 को वन अपराध प्रकरण क्रमांक 19940/17 से 19940/21 दर्ज किए गए।
दिसंबर 2025 में भी दी गई थी समझाइश
वन विभाग के मुताबिक दिसंबर 2025 में जिला प्रशासन, वन विभाग और पुलिस बल की मौजूदगी में संबंधित लोगों को वनभूमि पर अतिक्रमण नहीं करने तथा नियमानुसार प्रक्रिया का पालन करने की समझाइश दी गई थी। इसके बावजूद अतिक्रमण और वन विभाग के कार्य में बाधा से संबंधित मामले सामने आते रहे।
वन विभाग ने कहा है कि वनभूमि पर अतिक्रमण, वन संपदा को नुकसान पहुंचाना, शासकीय कार्य में बाधा डालना तथा शासकीय कर्मचारियों के साथ मारपीट या धमकी देना गंभीर और दंडनीय कृत्य हैं। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
विभाग ने कहा कि वनभूमि की सुरक्षा, अतिक्रमण की रोकथाम तथा वन्यजीव एवं वन संपदा के संरक्षण के लिए कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। आम लोगों से वन क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने और किसी भी अवैध गतिविधि की सूचना वन विभाग अथवा पुलिस को देने की अपील की गई है।


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