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PM आवास में गड़बड़ी: पंचायत बोली- नींव नहीं खोदी, पोर्टल में मकान पूर्ण

बागबाहरा/महासमुंद। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत स्वीकृत एक आवास को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सरकारी रिकॉर्ड में आवास को पूर्ण (Completed) दर्शाया गया है, जबकि ग्राम पंचायत के प्रस्ताव और स्थानीय स्तर पर सामने आए तथ्यों में निर्माण शुरू नहीं होने का उल्लेख है। मामले में जियो टैगिंग, मनरेगा भुगतान और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।

मामला बागबाहरा जनपद पंचायत अंतर्गत खट्‌टी पंचायत के ग्राम सेनभाठा की हितग्राही हेमिन बाई पति रामजी से जुड़ा है। पीएम आवास योजना की सूची में हेमिन बाई का नाम दर्ज है और पोर्टल पर आवास की स्थिति “Completed” दर्शाई गई है।

पुराने मकान के सामने खड़े होकर कराया गया जियो टैग?

ग्रामीणों और पंचायत सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिस मकान को पीएम आवास के तहत निर्मित बताया गया है, वह परिवार का पहले से बना हुआ पुराना मकान है। आरोप है कि हितग्राही ने इसी पुराने भवन के सामने खड़े होकर जियो टैगिंग कराई और आवास मित्र ने बिना वास्तविक निर्माण की जांच किए आवास को पूर्ण दर्शा दिया। यदि जांच में यह तथ्य सही पाए जाते हैं तो आवास निर्माण की निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।

पंचायत का दावा- नींव तक नहीं खोदी गई

मामले को और गंभीर बनाता है ग्राम पंचायत का प्रस्ताव। पंचायत द्वारा पारित प्रस्ताव में कुल 14 हितग्राहियों के नाम शामिल हैं, जिनमें हेमिन बाई का नाम भी दर्ज है। प्रस्ताव में उल्लेख किया गया है कि संबंधित हितग्राहियों के आवास निर्माण की नींव खुदाई तक शुरू नहीं हुई है। पंचायत ने ऐसे मामलों में प्रधानमंत्री आवास योजना को निरस्त करने और जारी राशि की वसूली की अनुशंसा की है। प्रस्ताव पर पंचायत प्रतिनिधियों और सदस्यों के हस्ताक्षर तथा मुहर भी दर्ज है।

मनरेगा भुगतान पर भी उठे सवाल

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभार्थियों को निर्माण कार्य में मजदूरी मद से मनरेगा के माध्यम से भी भुगतान किया जाता है। जानकारी के अनुसार हेमिन बाई के आवास प्रकरण में अंतिम किस्त के रूप में लगभग 22 हजार रुपये श्रमिकों के नाम पर जारी किए गए हैं।

आरोप है कि रोजगार सहायक ने वास्तविक निर्माण और श्रम कार्य का सत्यापन किए बिना हाजिरी दर्ज कर दी, जिसके आधार पर मजदूरी भुगतान हो गया। हालांकि इस संबंध में रोजगार सहायक का कहना है कि सभी भुगतान निर्धारित शासकीय प्रक्रिया और नियमों के अनुसार किए गए हैं।

रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत में विरोधाभास

एक तरफ सरकारी पोर्टल में आवास पूर्ण दर्शाया गया है, दूसरी तरफ पंचायत के प्रस्ताव में निर्माण शुरू नहीं होने की बात कही गई है। वहीं ग्रामीण स्तर पर पुराने मकान को जियो टैग किए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं। ऐसे में पूरे मामले में रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति के बीच बड़ा विरोधाभास दिखाई दे रहा है।

सीईओ बोले- जांच कराएंगे

मामले को लेकर बागबाहरा जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) एन.एस. मंडावी ने कहा कि शिकायत और सामने आए तथ्यों को गंभीरता से लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि मामले की जांच कराई जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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