महासमुंद में युवक के नाम से बैंक खाता और मोबाइल नंबर के कथित दुरुपयोग का मामला, परिचित युवक पर धोखाधड़ी का केस
महासमुंद। पैन कार्ड बनवाने में मदद के नाम पर एक युवक का सिम जारी कराने और उसके नाम से बैंक खाता खुलवाने के बाद कथित तौर पर खाते से बड़ी रकम के लेनदेन किए जाने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसे न तो सिम दिया गया और न ही बैंक खाते की जानकारी, लेकिन बाद में उसके नाम से खुले खाते में लगातार 50 हजार और 1 लाख रुपये जैसी रकम के ट्रांजेक्शन होने की जानकारी मिली। शिकायत पर सिटी कोतवाली महासमुंद पुलिस ने आरोपी योगेश चन्द्राकर उर्फ मोनू के खिलाफ BNS की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।
5 मार्च को मोबाइल दुकान ले गया था आरोपी
ग्राम परसकोल निवासी नागेन्द्र साहू (23) ने पुलिस को दिए आवेदन में बताया कि वह योगेश चन्द्राकर को पहले से जानता है और दोनों ने कक्षा 5वीं-6वीं तक साथ पढ़ाई की है। मार्च 2026 में नागेन्द्र को पैन कार्ड बनवाना था। इसकी चर्चा उसने योगेश से की थी।
शिकायत के अनुसार, करीब 5 मार्च 2026 को योगेश उसे महासमुंद के गोस्वामी मोबाइल शॉप, बरोण्डा चौक ले गया। वहां उसके नाम से नया सिम जारी कराया गया। जब नागेन्द्र ने सिम की जरूरत पूछी तो कथित तौर पर उसे बताया गया कि पैन कार्ड बनवाने के लिए नया सिम जरूरी है।
FIR में घटना का स्थान गोस्वामी मोबाइल शॉप, बरोण्डा चौक महासमुंद और घटना की तारीख 05 मार्च 2026 शाम 5 बजे दर्ज है।
अगले दिन GST सुविधा केंद्र ले जाकर करवाए हस्ताक्षर
नागेन्द्र के मुताबिक इसके अगले दिन उसे GST सुविधा केंद्र (च्वाइस सेंटर) ले जाया गया। वहां पैन कार्ड बनवाने के नाम पर उससे कुछ कागजात पर हस्ताक्षर करवाए गए और उसके नाम से बैंक खाता भी खुलवाया गया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि पूरी प्रक्रिया के बाद न तो उसे सिम दिया गया और न ही बैंक खाते की जानकारी या दस्तावेज दिए गए।
बैंक रिकॉर्ड में 9 मार्च को खुला खाता
कई महीनों बाद 5 सितंबर 2026 को जब नागेन्द्र ने बार-बार सिम और बैंक खाते की जानकारी मांगे जाने के बावजूद जानकारी नहीं मिलने पर GST सुविधा केंद्र जाकर आधार कार्ड के जरिए जांच कराई, तब उसे अपने नाम से बैंक ऑफ बड़ौदा का खाता खुला होने की जानकारी मिली।
इसके बाद बैंक शाखा पहुंचकर उसने खाते की जानकारी और स्टेटमेंट निकलवाया। शिकायतकर्ता के मुताबिक बैंक रिकॉर्ड में उसके नाम से खाता 09 मार्च 2026 को खुला बताया गया।
यानी शिकायत में सामने आया क्रम 5 मार्च को सिम जारी होने, उसके बाद बैंक खाता खुलवाने की प्रक्रिया और 9 मार्च को खाते के खुलने का है। इसके बाद करीब छह महीने तक खाते में लेनदेन होते रहे।
अपने नहीं होने का दावा, 50 हजार और 1 लाख के ट्रांजेक्शन
नागेन्द्र ने पुलिस को बताया कि खाते के स्टेटमेंट में लगातार लेनदेन दिखाई दिए। इनमें 50 हजार रुपये और 1 लाख रुपये की रकम के ट्रांजेक्शन शामिल हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि ये लेनदेन उसने नहीं किए और न ही उसने किसी अन्य व्यक्ति को अपने बैंक खाते का इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी।
उसने बैंक से प्राप्त ट्रांजेक्शन संबंधी दस्तावेज भी पुलिस को सौंपने की बात कही है।
6 महीने बाद थाने पहुंची शिकायत
मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि कथित तौर पर मार्च में सिम और बैंक खाते की प्रक्रिया होने के बाद शिकायतकर्ता को 5 सितंबर 2026 को अपने नाम से बैंक खाता और उसमें हुए लेनदेन की जानकारी मिली। उसी दिन उसने थाना सिटी कोतवाली महासमुंद पहुंचकर लिखित शिकायत दी।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी योगेश चन्द्राकर के विरुद्ध BNS की धारा 318(4) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया है।
अब पुलिस खंगालेगी खाते का पूरा लेनदेन
मामला सामने आने के बाद पुलिस के सामने कई अहम सवाल हैं—शिकायतकर्ता के नाम से जारी सिम किसके पास रहा, बैंक खाता किसने संचालित किया, खाते में कुल कितनी रकम का लेनदेन हुआ और उन पैसों का इस्तेमाल कहां और किसके द्वारा किया गया।
पुलिस बैंक स्टेटमेंट, मोबाइल नंबर, खाता खुलवाने के दस्तावेज और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच के बाद मामले की आगे की तस्वीर साफ करेगी।


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