पांच दिन बाद भी संवेदनशील रास्तों पर चेतावनी बोर्ड नहीं, दादरखार जंगल में ग्रामीण ने देखा दूसरा तेंदुआ
महासमुंद/कोमाखान। झिटकी गांव में रात के समय घर में घुसकर छह ग्रामीणों पर हमला करने वाले तेंदुए की रेस्क्यू के दौरान लगी गंभीर चोटों के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। वन विभाग ने तेंदुए का अंतिम संस्कार कर दिया है। हालांकि, इलाके में तेंदुए की मौजूदगी का खतरा अभी खत्म नहीं हुआ है। बुधवार को झिटकी से लगे कारीपाठ के दादरखार जंगल में एक ग्रामीण ने एक और तेंदुआ देखे जाने की सूचना दी है। इससे ग्रामीणों में फिर दहशत का माहौल है।
इधर, घटना के पांच दिन बीत जाने के बावजूद पंडरीपानी, झिटकी और आसपास के संवेदनशील रास्तों पर अब तक चेतावनी बोर्ड और पोस्टर नहीं लगाए गए हैं। ऐसे में जंगल जाने वाले ग्रामीणों और मवेशी चराने वालों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
बकरियां चराने गए ग्रामीण ने देखा तेंदुआ
झिटकी निवासी नान्हूराम चक्रधारी बुधवार दोपहर करीब 1 बजे बकरियां चराने दादरखार जंगल गया था। नाले के पास उसे एक तेंदुआ बैठा दिखाई दिया। तेंदुए को देखते ही नान्हूराम बकरियों को वहीं छोड़कर गांव लौट आया। करीब दो घंटे बाद वह दो अन्य ग्रामीणों को साथ लेकर दोबारा मौके पर पहुंचा, लेकिन तब तक तेंदुआ जंगल के भीतर जा चुका था।
ग्रामीणों के मुताबिक, तेंदुए की मौजूदगी की सूचना के बाद क्षेत्र में फिर से भय का माहौल है। खासकर जंगल से लगे गांवों में ग्रामीणों को मवेशी चराने और जंगल जाने में खतरा महसूस हो रहा है।
रात में घर में घुसकर छह लोगों पर किया था हमला
झिटकी में कुछ दिन पहले तेंदुआ रात करीब 1 बजे एक ग्रामीण के घर में घुस गया था। उस समय परिवार के लोग सो रहे थे। तेंदुए ने परिवार के छह सदस्यों पर हमला कर दिया था। घटना के बाद वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए रेस्क्यू अभियान शुरू किया।
अगले दिन रविवार सुबह करीब 10 बजे जंगल सफारी रायपुर और कानन पेंडारी जू की 10 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम झिटकी पहुंची। टीम ने करीब 1 घंटे 40 मिनट की मशक्कत के बाद तेंदुए को ट्रैंकुलाइज कर पिंजरे में सुरक्षित डाला।
सिर में गंभीर चोटें, इलाज के दौरान मौत
रेस्क्यू के दौरान तेंदुए के सिर में गंभीर चोटें पाई गई थीं। इसके बाद उसे उपचार के लिए जंगल सफारी रायपुर ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। वन विभाग ने बाद में तेंदुए का अंतिम संस्कार कर दिया।
जंगल सफारी के डीएफओ तेजस शेखर ने बताया कि तेंदुए के सिर में चार से अधिक गंभीर चोटें थीं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का विस्तृत अध्ययन होने के बाद ही उसकी मौत का सटीक समय और कारण स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल पोस्टमार्टम की अंतिम रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है।
चेतावनी बोर्ड नहीं लगाए जाने पर उठे सवाल
तेंदुए के हमले के बाद पंडरीपानी, झिटकी और आसपास के जंगल मार्गों को संवेदनशील माना जा रहा है। इसके बावजूद घटना के पांच दिन बाद भी प्रमुख रास्तों पर चेतावनी बोर्ड या पोस्टर नहीं लगाए जाने से ग्रामीणों में नाराजगी है।
महासमुंद डीएफओ टी. श्रीनिवास ने कहा कि क्षेत्र के प्रमुख रास्तों पर जल्द ही चेतावनी बैनर और पोस्टर लगाए जाएंगे। वन विभाग की ओर से ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह भी दी जा रही है।
दूसरे तेंदुए के दादरखार जंगल में दिखाई देने की सूचना के बाद अब ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग इलाके में गश्त बढ़ाने के साथ जंगल से लगे गांवों और रास्तों पर सुरक्षा संबंधी चेतावनी तत्काल लगाए, ताकि किसी और अप्रिय घटना को रोका जा सके।


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