महासमुंद के वनांचल में मजदूरों के पलायन का पुराना संकट; ओडिशा-छत्तीसगढ़ सीमा के 10 भट्ठा दलाल जेल में, अब मुंशियों की भूमिका पर उठ रहे सवाल
महासमुंद। छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सीमा से लगे वनांचल क्षेत्रों में ईंट भट्ठों में काम कराने के नाम पर मजदूरों को अग्रिम राशि देने और उन्हें दूसरे राज्यों में ले जाने का सिलसिला एक बार फिर चर्चा में है। महासमुंद जिले के कोमाखान थाना क्षेत्र के टेका गांव में 4 हजार रुपये के लेनदेन को लेकर मारपीट का मामला सामने आया है। इस घटना ने एक बार फिर ईंट भट्ठा दलालों के नेटवर्क और मजदूरों के पलायन से जुड़े सवालों को सामने ला दिया है।
स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, ओडिशा-छत्तीसगढ़ सीमा से जुड़े क्षेत्र के 10 ईंट भट्ठा दलाल फिलहाल जेल में हैं। इसके बावजूद मजदूरों को भट्ठों तक पहुंचाने की कोशिशें जारी रहने के आरोप सामने आ रहे हैं। चर्चा यह भी है कि दलालों के जेल जाने के बाद अब उनके मुंशी मजदूरों से संपर्क कर उन्हें काम पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। कोमाखान थाने में दर्ज हालिया एफआईआर ने इस पूरे मामले की पड़ताल की जरूरत बढ़ा दी है।
टेका जैसे वनांचल गांवों से हर साल होता है पलायन
कोमाखान थाना क्षेत्र का टेका गांव वनांचल क्षेत्र में स्थित है। इस इलाके में रोजगार के सीमित अवसरों के कारण बड़ी संख्या में मजदूर हर साल दूसरे क्षेत्रों और राज्यों में काम की तलाश में पलायन करते रहे हैं। ईंट भट्ठों में काम दिलाने वाले बिचौलिये मजदूरों को अग्रिम रकम देकर काम पर जाने के लिए तैयार करते हैं।
मजदूरों को दी जाने वाली यह अग्रिम राशि कई बार बाद में विवाद की वजह बन जाती है। काम पर नहीं जा पाने, रुपये वापस करने या काम की शर्तों को लेकर विवाद होने पर मजदूरों पर दबाव बनाए जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। हालांकि, हर मामले में परिस्थितियां अलग हो सकती हैं और किसी भी व्यक्ति की भूमिका जांच के आधार पर ही तय की जानी चाहिए।
चार हजार रुपये के लेनदेन से शुरू हुआ विवाद
कोमाखान थाने में दर्ज एफआईआर क्रमांक 0194/26 के मुताबिक, टुहलू बरपारा निवासी कमल साय नेताम (45) ने शिकायत की है कि ग्राम टेका निवासी कमल मरकाम ने पिछले साल ईंट भट्ठे में काम करने जाने के लिए उसे 4 हजार रुपये दिए थे। शिकायतकर्ता के अनुसार, वह उस समय काम पर नहीं जा सका और उसने रकम वापस करने की बात कही। आरोप है कि उसे अगले साल काम पर जाने के लिए कहा गया।
शिकायत में आगे बताया गया है कि 24 अक्टूबर 2026 को कमल मरकाम उसे जंगल की ओर ले गया, जहां कमल मरकाम और उसकी पत्नी प्रर्मिला मरकाम ने कथित तौर पर गाली-गलौज करते हुए डंडे और हाथ-मुक्कों से मारपीट की। शिकायतकर्ता ने शरीर के कई हिस्सों में चोट लगने की बात कही है। पुलिस ने 26 अक्टूबर को भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2), 296 और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।
यह आरोप शिकायत पर आधारित हैं। मामले में आरोपियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
करोड़ों रुपये के अग्रिम लेनदेन की चर्चा, जांच की जरूरत
क्षेत्र में ईंट भट्ठों में मजदूरों को भेजने के लिए वर्षों से अग्रिम रकम देने का सिलसिला चलने की बात कही जा रही है। स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि इस तरह के लेनदेन में अब तक करोड़ों रुपये की रकम शामिल रही है। हालांकि, इस दावे की पुष्टि के लिए संबंधित मामलों, भुगतान के रिकॉर्ड और मजदूरों के बयानों की जांच जरूरी है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अग्रिम रकम देने वाले बिचौलियों और मजदूरों को भट्ठों तक ले जाने वाले लोगों के बीच जिम्मेदारियां कैसे तय होती हैं। यदि किसी मजदूर को रकम लौटाने या काम पर जाने के लिए धमकाया जाता है, तो ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई आवश्यक है।
दलाल जेल में, तो कौन संभाल रहा है नेटवर्क?
क्षेत्र में 10 ईंट भट्ठा दलालों के जेल में होने की जानकारी के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या उनके सहयोगी या मुंशी अब भी मजदूरों को काम पर ले जाने के लिए सक्रिय हैं। यदि ऐसा है, तो उनकी भूमिका, मजदूरों को दी जा रही अग्रिम राशि और काम की शर्तों की जांच की जानी चाहिए।
कोमाखान थाना क्षेत्र में दर्ज मामला इस व्यापक समस्या की एक कड़ी हो सकता है, लेकिन इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि शिकायत में नामजद व्यक्ति किसी संगठित नेटवर्क के लिए काम कर रहे थे। इसकी पुष्टि पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों से ही होगी।
मजदूरों के हितों की सुरक्षा जरूरी
वनांचल क्षेत्रों में रोजगार की कमी और आर्थिक जरूरतें मजदूरों को अग्रिम रकम लेने के लिए मजबूर कर सकती हैं। ऐसे में प्रशासन और श्रम विभाग के सामने चुनौती केवल पलायन के आंकड़े जुटाने की नहीं, बल्कि मजदूरों को सुरक्षित रोजगार, भुगतान की स्पष्ट शर्तें और शिकायत की स्थिति में कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की भी है।
अब जरूरत इस बात की है कि प्रशासन ईंट भट्ठों में मजदूरों की भर्ती कराने वाले बिचौलियों, उनके मुंशियों, अग्रिम भुगतान के रिकॉर्ड और मजदूरों की आवाजाही की जांच करे। यदि किसी नेटवर्क के जरिए मजदूरों पर दबाव बनाया जा रहा है या उनके साथ हिंसा की जा रही है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, मजदूरों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने के उपाय भी जरूरी हैं, ताकि हर साल मजबूरी में होने वाले पलायन पर रोक लगाई जा सके।
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