महासमुंद: अपराध की जांच को वैज्ञानिक आधार देने और अपराधियों को सजा दिलाने की दर को बढ़ाने के लिए महासमुंद पुलिस ने एक बड़ा कदम उठाया है। 15 जून 2026 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सभागार में एक दिवसीय ‘फिंगरप्रिंट प्रशिक्षण कार्यशाला’ का आयोजन किया गया, जिसमें जिले के 45 चयनित पुलिस कर्मियों को फॉरेंसिक जांच की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।
‘चांस प्रिंट’ की सुरक्षा पर विशेष जोर कार्यशाला में रेंज फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट और उप पुलिस अधीक्षक श्री राकेश नरवरे ने प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि अपराध स्थल पर मिलने वाले ‘चांस प्रिंट’ (अदृश्य या आंशिक उंगलियों के निशान) अपराधी को सजा दिलाने के लिए सबसे पुख्ता सबूत होते हैं। कई मामलों में जहां सीसीटीवी या चश्मदीद गवाह नहीं मिलते, वहां ये फिंगरप्रिंट ही अपराधी को सीधे अपराध स्थल से जोड़ने का काम करते हैं।
NAFIS सिस्टम: जांच में आएगी तेजी विशेषज्ञों के अनुसार, पुलिस अब ‘राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली’ (NAFIS) से लैस हो गई है। यह एक आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसमें पूरे देश के अपराधियों का डेटाबेस मौजूद है।
- समय की बचत: जिस फिंगरप्रिंट मिलान प्रक्रिया में पहले कई दिन लगते थे, वह अब इस सिस्टम के जरिए महज कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाती है।
- अंतरराज्यीय गिरोहों पर नकेल: सिस्टम के जरिए दूसरे राज्यों में छिपे अपराधियों और अंतरराज्यीय गिरोहों की पहचान करना अब आसान होगा।
व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान पुलिस कर्मियों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि डेमो के माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। इसमें उन्हें सिखाया गया कि कैसे अलग-अलग सतहों से फिंगरप्रिंट को ‘लिफ्ट’ करना है, कैसे उन्हें नष्ट होने से बचाना है और वैज्ञानिक तरीके से उनका दस्तावेजीकरण करना है ताकि अदालत में इन्हें एक मजबूत साक्ष्य के रूप में पेश किया जा सके।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय का कहना है कि यह कार्यशाला पुलिस की विवेचनात्मक क्षमता को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इस प्रशिक्षण के बाद अब महासमुंद पुलिस अपराधों के खुलासे और अपराधियों को सजा दिलाने में और अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेगी।


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