महासमुंद। जिला अस्पताल महासमुंद के प्रसूति वार्ड में हुई मारपीट की घटना ने नया मोड़ ले लिया है। जिस मामले में पहले एक नवजात बच्ची के पिता की शिकायत पर कैंटीन कर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज हुई थी, अब उसी घटना को लेकर अस्पताल के कैंटीन स्टाफ की ओर से भी थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है। पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर अलग-अलग अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पहले पिता ने दर्ज कराई थी शिकायत
गौरतलब है कि आरंग निवासी दुलेश्वर सेन ने महासमुंद थाने में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि जिला अस्पताल के प्रसूति वार्ड में अपनी नवजात बेटी से मिलने के दौरान कैंटीन स्टाफ और अन्य लोगों ने उसके साथ मारपीट की। इस मामले में पुलिस ने अपराध क्रमांक 0355/2026 के तहत मामला दर्ज किया था।
अब कैंटीन कर्मी की शिकायत पर दूसरा मामला दर्ज
घटना के अगले दिन 16 जून को अस्पताल कैंटीन में कार्यरत रोहित धीवर की शिकायत पर पुलिस ने अपराध क्रमांक 0360/2026 दर्ज किया है। शिकायत में बताया गया है कि 15 जून की शाम करीब 4 से 5 बजे के बीच जिला अस्पताल के डिलीवरी वार्ड के बाहर दुलेश्वर सेन महिला गार्ड से विवाद कर रहा था और कथित रूप से गाली-गलौज कर रहा था।
शिकायत के अनुसार जब कैंटीन स्टाफ ने उसे गाली देने से मना किया और वहां से जाने को कहा, तब दुलेश्वर सेन ने कथित रूप से कैंटीन कर्मचारी को थप्पड़ मार दिया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इस दौरान आरोपी ने अश्लील गालियां भी दीं और विवाद बढ़ गया।
गार्ड और अस्पताल स्टाफ बताए गए प्रत्यक्षदर्शी
दर्ज FIR में महिला गार्ड कांती बाई, कैंटीन कर्मचारी शीतल धीवर, मोंटू तथा अन्य अस्पताल कर्मचारियों को घटना का प्रत्यक्षदर्शी बताया गया है। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि मारपीट के कारण उसे चोट भी आई है।
दोनों FIR में एक ही घटना का उल्लेख
दिलचस्प बात यह है कि दोनों FIR में घटना का समय, स्थान और परिस्थितियां लगभग समान हैं। दोनों शिकायतें 15 जून को जिला अस्पताल के प्रसूति वार्ड में हुए विवाद से जुड़ी हैं, लेकिन दोनों पक्ष एक-दूसरे पर मारपीट और गाली-गलौज के आरोप लगा रहे हैं।
पुलिस कर रही जांच
महासमुंद थाना पुलिस ने दोनों मामलों में अपराध दर्ज कर लिया है। एक मामले में दुलेश्वर सेन शिकायतकर्ता हैं, जबकि दूसरे मामले में अस्पताल कैंटीन स्टाफ की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई है। पुलिस का कहना है कि सभी पक्षों के बयान, प्रत्यक्षदर्शियों की जानकारी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच की जा रही है।
क्रॉस FIR से बढ़ी मामले की गंभीरता
एक ही घटना को लेकर दोनों पक्षों द्वारा FIR दर्ज कराए जाने से मामला अब क्रॉस FIR का रूप ले चुका है। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां दोनों पक्षों के दावों और साक्ष्यों का परीक्षण कर वास्तविक घटनाक्रम का पता लगाती हैं। फिलहाल पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद की शुरुआत कैसे हुई और घटना के लिए कौन जिम्मेदार था।
हालांकि इस पूरे मामले में एक अहम तथ्य यह भी सामने आया है कि घटना 15 जून की शाम 4 से 5 बजे के बीच होने का दावा किया गया है, जबकि कैंटीन कर्मी पक्ष की FIR अगले दिन 16 जून को शाम 4:21 बजे दर्ज हुई। यानी घटना और शिकायत के बीच करीब 18 घंटे 44 मिनट का अंतर है। आमतौर पर मारपीट के मामलों में पीड़ित पक्ष तत्काल पुलिस से संपर्क करता है। ऐसे में शिकायत दर्ज कराने में हुई देरी के कारण भी जांच का महत्वपूर्ण विषय बन सकते हैं। अब यह देखना होगा कि पुलिस दोनों पक्षों के बयान, प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर वास्तविक घटनाक्रम तक कैसे पहुंचती है।


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