महासमुंद, बागबाहरा। महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखंड की ग्राम पंचायत भलेसर में मनरेगा के तहत वर्ष 2022 से 2024 के बीच निर्मित तीन सरकारी तालाब को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पंचायत में करीब 45 लाख रुपये की लागत से बने तीन तालाब अब कथित कब्जे के आरोपों के कारण चर्चा में हैं। भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट में ग्रामीणों, पूर्व सरपंच और वर्तमान सरपंच के बयानों से कई गंभीर सवाल सामने आए हैं।
इससे पहले ‘बिझवार सरकारी तालाब’ की जगह अरबी (कोचई) की खेती होने का मामला सामने आया था। अब ग्रामीणों का आरोप है कि तीनों तालाबों पर प्रभावशाली लोगों का कब्जा है और सरकारी जल संरचनाओं का निजी उपयोग किया जा रहा है।
पूर्व सरपंच का दावा- तीनों तालाब शासकीय घास भूमि पर बने
पूर्व सरपंच बलराम सिन्हा ने दावा किया कि तीनों तालाब शासकीय घास भूमि पर मनरेगा के तहत बनाए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में विद्याबाई पति राधेश्याम चंद्राकर, वर्तमान सरपंच अरुण चंद्राकर तथा कोमाखान निवासी मयंक चंद्राकर द्वारा इन तालाबों पर कब्जा कर खेती की जा रही है। उनके अनुसार इन सभी तालाबों का रिकॉर्ड मनरेगा के ऑनलाइन पोर्टल में उपलब्ध है।
ग्रामीणों की मांग- कब्जा हटे, एफआईआर दर्ज हो
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि यदि जांच में सरकारी तालाब शासकीय भूमि पर निर्मित पाए जाते हैं तो तत्काल अतिक्रमण हटाया जाए तथा सरकारी संपत्ति पर कब्जा करने वालों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।

वर्तमान सरपंच का पक्ष: “घास जमीन पर तालाब हैं, एक पर मेरा कब्जा है”
ग्राम पंचायत भलेसर के वर्तमान सरपंच अरुण चंद्राकर ने कहा कि तीनों तालाब घास (शासकीय चरनोई) भूमि पर बने हैं। उनका कहना था कि वर्षों पहले उनके पूर्वज इस भूमि पर काबिज थे और बाद में उसी क्षेत्र में सरकारी तालाब बना दिए गए।
सरपंच ने यह भी कहा, “जब दूसरे लोग भी तालाबों पर कब्जा किए हुए हैं, तो हमने भी एक तालाब पर कब्जा कर लिया। एक तालाब में कोचई और दो तालाबों में धान की खेती हो रही है, जिनमें से एक तालाब पर मेरा कब्जा है।”

अब जांच के घेरे में पूरा मामला
मामले में अब कई महत्वपूर्ण प्रश्न उठ रहे हैं—
यदि तालाब शासकीय भूमि पर बने हैं तो उन पर निजी खेती कैसे हो रही है?
यदि कब्जा है, तो संबंधित विभागों ने अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की?
मनरेगा से खर्च हुई लगभग 45 लाख रुपये की सार्वजनिक राशि से निर्मित परिसंपत्तियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
क्या राजस्व, पंचायत और मनरेगा विभाग द्वारा संयुक्त जांच की आवश्यकता है?
ग्रामीणों ने मांग की है कि तीनों तालाबों का संयुक्त सीमांकन, राजस्व अभिलेखों का सत्यापन, मनरेगा की मूल फाइल, जियो-टैग, माप पुस्तिका (एमबी) तथा भुगतान अभिलेखों की जांच कराई जाए और जांच में जो भी दोषी पाए जाएं, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।



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