IPL 2026: SRH ने शिवांग कुमार को किया डेब्यू, KKR ने बरकरार रखा बॉलिंग!

ब्रेकिंग न्यूज़:
दोनों टीमों ने अपने शुरुआती मैचों में हार का सामना किया है, जबकि दोनों ने 200 से ज्यादा रन बनाए। अब वे अपने खाता खोलने के लिए उतारेंगे।

राजस्थान रॉयल्स और पंजाब किंग्स के बीच आगामी मुकाबला खास होगा। दोनों टीमें अपने पहले मैच में हार गए हैं। हालांकि, दोनों ने 200 से अधिक रन बनाकर अपने योगदान दिया है। दोनों टीमों के खिलाड़ियों की नजर अब जीत की ओर है, ताकि वे अपने अभियान को सफल बना सकें।

राजस्थान रॉयल्स की ओर से संजू सैमसन और جوस बटलर पर विशेष ध्यान रहेगा, जबकि पंजाब किंग्स का फोकस कप्तान शिखर धवन और भानुका राजापक्षा पर है।

इस मैच में जीत किसी भी टीम के लिए आत्मविश्वास बढ़ा सकती है और जीत की दिशा में पहला कदम साबित हो सकती है। दोनों टीमें इस पल का इंतजार कर रही हैं।

निष्कर्ष: इस मैच में हार-जीत का फैसला न केवल अंक तालिका में स्थान बदलेगा, बल्कि खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को भी प्रभावित करेगा।

यूके के नेतृत्व में 40 देशों का हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य संकट पर एक्शन का वादा

ब्रेकिंग: ब्रिटेन ने हॉरमूज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के उपायों पर चर्चा के लिए 40 देशों के विदेश मंत्रियों को बुलाया। यह शिखर सम्मेलन अमेरिका और इज़राइल के ईरान के खिलाफ युद्ध के कारण रुके हुए एक महत्वपूर्ण जलमार्ग की स्थिति के समाधान के लिए आयोजित किया जा रहा है।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने बताया कि यह आभासी शिखर सम्मेलन गुरुवार को ब्रिटेन की विदेश सचिव इवेट कूपर की अध्यक्षता में होगा। इसमें विभिन्न कूटनीतिक और राजनीतिक उपायों की समीक्षा की जाएगी, जिससे जल मार्ग को फिर से सक्रिय किया जा सके।

जलमार्ग की स्थिति और ईरान के हमले

ईरान के प्रतिशोधात्मक हमलों ने वाणिज्यिक जहाजों पर गंभीर संकट पैदा कर दिया है। हॉरमूज़ जलडमरूमध्य, जो खाड़ी को विश्व के अन्य महासागरों से जोड़ता है, अब लगभग बंद है। इससे बुनियादी तेल की आपूर्ति पर संकट आ गया है और पेट्रोलियम की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।

अमेरिका इस बैठक में शामिल नहीं हो रहा है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि जलमार्ग की सुरक्षा उनकी जिम्मेदारी नहीं है। ट्रंप ने यूरोपीय सहयोगियों पर भी आरोप लगाया है कि वे युद्ध में समर्थन नहीं दे रहे हैं और नाटो से अमेरिका को बाहर करने की धमकी दी है।

गुरुवार को होने वाले शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले देशों ने एक बयान जारी किया है जिसमें ईरान से यह आग्रह किया गया है कि वह जलडमरूमध्य को बंद करने के प्रयासों को रोकें। इसके साथ ही, इन देशों ने सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उचित प्रयास करने का आश्वासन दिया है।

मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता

यह बैठक एक पहले कदम के रूप में मानी जा रही है, जिससे आगे "कार्यकारी स्तर की बैठकें" आयोजित की जाएंगी। रिपोर्ट के अनुसार, यह एक व्यापक गठबंधन है जिसमें नाटो से परे भी देशों को शामिल किया गया है, जैसे कि बहरैन, युनाइटेड अरब अमीरात, पनामा और नाइजीरिया।

हालांकि, कोई भी देश इस जल मार्ग को बलपूर्वक खोलने के इच्छुक नहीं हैं, क्योंकि युद्ध जारी है और ईरान के पास जहाजों को निशाना बनाने के लिए एंटी-शिप मिसाइलें, ड्रोन और अन्य शक्तिशाली संसाधन हैं। कीर स्टार्मर ने इस बारे में स्पष्ट किया है कि सैन्य समाधान में उनकी कोई रुचि नहीं है और अधिकांश देश भी इस युद्ध में शामिल होना नहीं चाहते हैं।

संवाद ही समाधान

फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी कहा है कि यह असंभव है कि जलडमरूमध्य को बलात् खोला जाए। उन्होंने इसे "अवास्तविक" कहा है और सुझाव दिया है कि जलमार्ग को सुरक्षित रखने का सबसे अच्छा तरीका ईरान के साथ सीधे बातचीत करना है।

लॉइड्स लिस्ट इंटेलिजेंस के अनुसार, 28 फरवरी को संयुक्त अमेरिकी-इज़रायली हमलों के बाद से खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों पर 23 प्रत्यक्ष हमले हो चुके हैं, जिसमें 11 क्रू सदस्यों की हत्या हो चुकी है। ईरान ने यह भी कहा है कि "गैर-शत्रुतापूर्ण" जहाजों को हॉरमूज़ जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति है।

इस प्रकार, यह शिखर सम्मेलन वैश्विक जलमार्ग सुरक्षा और कूटनीति की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण कदम है। यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने और शांति स्थापित करने का एक अवसर प्रदान करता है।

CG: करोड़ों की कीमत – छत्तीसगढ़ की सड़कों पर एक हजार से अधिक बच्चे मांग रहे भीख!

ब्रेकिंग न्यूज: बच्चों का पुनर्वास, भीख मांगने की समस्या बनी चुनौती

रायपुर: भारत में घूमंतु बच्चों के पुनर्वास के लिए केंद्र और राज्य सरकारें कई योजनाएं चला रही हैं, लेकिन भीख मांगने वाले बच्चों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है। यह चिंताजनक आंकड़े हाल ही में भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा प्रस्तुत किए गए हैं, जिन्हें राज्यसभा में साझा किया गया। छत्तीसगढ़ जैसे प्रदेशों में भी स्थिति अधिक चिंताजनक है, जहां आधिकारिक आंकड़े भले ही लगभग एक हजार के आसपास हैं, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है।

बच्चों की संख्या और उनके हालात

केंद्र सरकार की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, सड़कों पर भीख मांगते बच्चों की संख्या चिंताजनक है। बचे हुए केवल 2653 बच्चों का ही पुनर्वास संभव हो पाया है। इनमें से 1507 बच्चों को उनके परिवारों के पास वापस भेज दिया गया है। अन्य बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों और बाल कल्याण समितियों के हवाले किया गया है, जहां उन्हें आवास और शिक्षा देने की व्यवस्था की जा रही है।

बाल कल्याण समितियों में बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ रहने की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। सरकार ने यह भी बताया कि भीख मांगने वाले बच्चों को स्कूलों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जिसके तहत 635 बच्चों को विद्यालयों में दाखिला दिलवाने का काम किया गया है।

राज्यों में बंटा हुआ दृश्य

हैरान करने वाली बात यह है कि भीख मांगने वाले बच्चों की संख्या देश के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग है। उत्तर प्रदेश में 10,167 बच्चे भीख मांगते पाए गए हैं, जबकि राजस्थान में यह संख्या 7,167 और बिहार में 3,396 है। पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में भी लगभग तीन हजार बच्चे इसी समस्या का सामना कर रहे हैं। दूसरी ओर, सिक्किम और लक्षद्वीप में केवल एक-एक बच्चा भीख मांगते मिला, जबकि दादर नगर हवेली, अंडमान निकोबार द्वीप समूह और पुडुचेरी में एक भी बच्चा नहीं पाया गया।

निष्कर्ष

भीख मांग रहे बच्चों के पुनर्वास के प्रयासों की प्रभावशीलता पर निरंतर प्रश्न उठाए जा रहे हैं। केंद्र सरकार का नई केंद्रीय क्षेत्रीय योजना लाने का कदम, इस गंभीर समस्या के समाधान हेतु एक सकारात्मक प्रयास माना जा रहा है। यदि इसे सफलतापूर्वक लागू किया जाए, तो उम्मीद की जा सकती है कि बच्चों के पुनर्वास की प्रक्रिया में तेजी आएगी और वे एक बेहतर जीवन का सामना कर सकेंगे। बच्चों का भविष्य बेहतर बनाना हमारी जिम्मेदारी है, और इसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा।

सैम कर्ब का भविष्य अनिश्चित: क्या चेल्सी उन्हें रखे?

ब्रेकिंग न्यूज़: सम केर का भविष्य अनिश्चित, क्या चेल्सी को उन्हें मुफ्त में छोड़ने का निर्णय लेना चाहिए?

चेल्सी के स्ट्राइकर सम केर का फ़ुटबॉल करियर अभी बडे़ सवालों के घेरे में है। अतीत में उनके बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद, इस गर्मी में उन्हें मुफ्त ट्रांसफर पर छोड़ने का विकल्प विचाराधीन है।

चेल्सी के मैनेजमेंट को इस मामले में सावधानी से फैसला लेना होगा, क्योंकि सम केर की प्रतिभा और अनुभव टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। क्या यह सही कदम होगा कि चेल्सी उन्हें इस गर्मी में बिना किसी मुआवजे के जाने दे?

अंत में, चेल्सी को इस महत्वपूर्ण निर्णय पर गंभीरता से विचार करना होगा क्योंकि यह उनके भविष्य की रणनीति को प्रभावित कर सकता है।

बम वापस पाषाण युग की ओर: अमेरिका का ईरान पर हमला

अमेरिका का ईरान पर जोरदार धमकी, ट्रंप ने कहा: "पत्थर के युग में वापस ले जाएंगे"

ब्रेकिंग न्यूज़: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि वे उसे "पत्थर के युग में वापस ले जाएंगे"। उनके इस बयान के बाद, रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने भी इसी प्रकार की धमकी दी है।

ट्रंप का यह बयान सेना की शक्ति का जिक्र करता है, जिसका इशारा है कि वे आधुनिक ईरान के बुनियादी ढांचे को खत्म करने की योजना बना रहे हैं। ट्रंप के इस बयान के पीछे की आयामों को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अमेरिका की रणनीतिक धमकियों का एक हिस्सा है जो दशकों से जारी है।

ट्रंप ने ईरान के बारे में क्या कहा?

ट्रंप ने एक राष्ट्रीय संबोधन के दौरान कहा, "हम ईरान पर अगले दो से तीन हफ्तों में बहुत कठोर कार्रवाई करेंगे, और हम उन्हें उस स्थान पर पहुंचाएंगे, जहां वे हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि इस संघर्ष के समापन के लिए बातचीत चल रही है।

फरवरी 28 को अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर हमलों की शुरुआत की गई थी। इस संघर्ष में अब तक 2000 से अधिक ईरानी नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं। इसमें अस्पताल, विद्यालय और विश्वविद्यालय जैसे नागरिक स्थलों पर भी हमले हुए हैं।

विदेश नीति के विशेषज्ञ जनिन डिल का कहना है कि ट्रंप की यह धमकी अवैध हो सकती है, अगर इसका अर्थ आधुनिक समाज के ढांचों को नष्ट करना हो। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मानवता कानून के अनुसार, युद्ध में नागरिकों के ठिकानों को जानबूझकर निशाना बनाना अपराध है।

अमेरिका ने पहले भी ऐसी धमकियां दी हैं

"पत्थर के युग में वापस ले जाना" वाक्यांश अमेरिका के वायु सेना के अधिकारी कर्टिस लेमे से जुड़ा हुआ है, जब उन्होंने उत्तरी वियतनाम के खिलाफ समान धमकियां दी थीं। उन्होंने लिखा था, "हम उन्हें पत्थर के युग में वापस ले जाने वाले हैं।"

वियतनाम युद्ध के दौरान, अमेरिका ने व्यापक बमबारी की, जिसके परिणामस्वरूप लाखों वियतनामी नागरिकों की जान चली गई। इसी तरह, खाड़ी युद्ध के दौरान अमेरिका ने इराक के खिलाफ भी इसी तरह की धमकियां दी थीं, जब अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री जेम्स बेकर ने कहा था कि अमेरिका इराक को "पत्थर के युग में वापस ले जाएगा" अगर वह कुवैत से हटने में असफल रहा।

क्या अमेरिका ने अन्य देशों पर भी बमबारी की है?

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, अमेरिका ने जापानी शहरों पर व्यापक बमबारी की थी। कोरियाई युद्ध में भी, अमेरिका ने उत्तर कोरिया पर भारी बमबारी की थी, जिससे उसका अधिकांश बुनियादी ढांचा नष्ट हो गया।

इन सभी मामलों में, अमेरिका ने सिर्फ सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया, लेकिन कई बार नागरिक ठिकाने भी प्रभावित हुए। इससे यह स्पष्ट होता है कि युद्ध की रणनीतियों में नागरिक नुकसान की अनदेखी की गई है।

इस प्रकार, ट्रंप का हालिया बयान सिर्फ एक व्यक्तिगत विचार नहीं है, बल्कि एक अधिक व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है, जिसमें अमेरिका ने बार-बार युद्ध में विनाशकारी धमकियों का सहारा लिया है।

CG News: रात 1 बजे की अश्लील बात ने काजी को दिलाई नौकरी से विदाई! कार्रवाई के बाद चौंकाने वाला खुलासा

ब्रेकिंग न्यूज़: रायपुर में काजी को हटाया गया

रायपुर। शहर काजी आरिफ अली फारूकी को एक महिला के साथ अश्लील बातचीत करने के आरोप में उनके पद से हटा दिया गया है। वक्फ बोर्ड की अध्यक्षता में हुई मीटिंग के बाद यह कार्रवाई की गई है।

शिकायत का विवरण

रायपुर निवासी मिनाज मेमन ने काजी आरिफ अली के खिलाफ एक गंभीर शिकायत दर्ज कराई थी। उनकी शिकायत में आरोप लगाया गया था कि काजी ने एक महिला से रात 1 बजे अश्लील बातें कीं, जिससे मुस्लिम समुदाय में रोष फैल गया। इस शिकायत के बाद वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई की।

बैठक में लिया गया निर्णय

इस मामले पर 31 मार्च को रायपुर के उलमाए दीन और इमामों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में काजी के अनैतिक कृत्य पर चर्चा की गई और सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर आरिफ अली को शहर काजी के पद से हटाने का निर्णय लिया गया। इस निर्णय से मुस्लिम समाज में संतोष की लहर दौड़ गई है, क्योंकि उन्होंने अनुशासन और नैतिकता की आवश्यकता को समझा है।

आदेश की पुष्टि

वक्फ बोर्ड की इस कार्रवाई की पुष्टि को लेकर संबंधित आदेश भी जारी किए गए हैं। अब यह मामला समुदाय के लिए एक उदाहरण बन गया है कि समाज में नैतिकता और अनुशासन का कितना महत्व है। इसके साथ ही इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों को तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

निष्कर्ष

काजी आरिफ अली फारूकी के खिलाफ उठाए गए इस कदम से यह स्पष्ट हो गया है कि समाज में अनैतिकता को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह घटना मुस्लिम समुदाय को एकजुट करने की आवश्यकता को भी दर्शाती है। वक्फ बोर्ड द्वारा की गई यह कार्रवाई समाज में एक सशक्त संदेश दे रही है कि नैतिकता और अनुशासन की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है।

यह मामला आगे चलकर अन्य समुदायों के लिए भी एक नज़ीर बन सकता है, ताकि शिक्षित और जिम्मेदार समाज की दिशा में कदम बढ़ाए जा सकें।

मिन्हास और शादाब ने इस्लामाबाद युनाइटेड की आसान जीत पक्की की!

ब्रेकिंग न्यूज:
हाल ही में खेले गए एक रोमांचक मुकाबले में, दोनों खिलाड़ियों ने अविश्वसनीय प्रदर्शन किया। यूनाइटेड ने 184 रनों के लक्ष्य को आसानी से हासिल कर लिया।

इस मैच में, खिलाड़ियों ने मिलकर 68 गेंदों में नाबाद 128 रनों की साझेदारी की। इस दौरान दोनों बल्लेबाजों ने अर्धशतक भी बनाया। इस जीत ने यूनाइटेड की स्थिति को मजबूत किया और प्रतियोगिता में उनकी उम्मीदों को बढ़ाया।

यूनाइटेड का ये शानदार प्रदर्शन खेल प्रेमियों के लिए यादगार रहेगा।

भारत ने एएमई प्रशिक्षण को नए सिरे से संशोधित कर विमानन कार्यबल को मजबूत किया

ताज़ा खबर:
भारत ने अपने तेज़ी से बढ़ते रखरखाव, मरम्मत और संचालन क्षेत्र (MRO) को मजबूत करने के लिए निर्णय लिया है। इसमें युवा पेशेवरों के लिए करियर के आकर्षण को बढ़ाने के लिए कार्यबल विकास पर ध्यान दिया जा रहा है।

गती शक्ति विश्वविद्यालय का नया कदम

गति शक्ति विश्वविद्यालय (GSV) ने नागरिक विमानन महानिदेशालय (DGCA) के साथ मिलकर विमान रखरखाव इंजीनियरिंग (AME) प्रशिक्षण को पुनः संचालित करने का निर्णय लिया है। यह कदम भविष्य की उद्योग आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। दोनों संस्थानों ने मिलकर तीन वर्षीय बीएससी कार्यक्रम में सुधार करने का संकल्प लिया है।

उम्मीद है कि इस पाठ्यक्रम में शैक्षणिक अध्ययन, नियामक मानक और व्यावसायिक क्षेत्र का अनुभव शामिल होगा। इसका मुख्य उद्देश्य एक अधिक संरचित और गुणवत्ता-आधारित प्रशिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है, जिससे विमान रखरखाव में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए अवसर बढ़ सकें।

DGCA के लिए विशेष कार्यक्रम

इस साझेदारी के अंतर्गत, GSV DGCA के लिए अनुसंधान भागीदार के रूप में भी कार्य करेगा। ये अनुसंधान स्थायी विमानन ईंधनों और संबंधित प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में होगा। इसके अलावा, DGCA के कर्मचारियों को नई कौशल प्रदान करने के लिए विशेष कार्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे, जिससे विमानन नियामक की क्षमता का विकास हो सके।

यह पहल पहले से मौजूद उद्योग संबंधों पर आधारित है, जिसमें एयरबस, सफ़रन, और जीएमआर स्कूल ऑफ़ एविएशन जैसे वैश्विक और घरेलू खिलाड़ी शामिल हैं। GSV पहले से ही विमानन-केंद्रित तकनीकी और प्रबंधन कार्यक्रम प्रदान करता है, जो उद्योग के सहयोग से डिज़ाइन किए गए हैं।

स्वदेशी क्षमताओं को बढ़ावा

इस पहल का व्यापक उद्देश्य भारत की विदेशी MRO सेवाओं पर निर्भरता को कम करना और घरेलू क्षमताओं का विकास करना है। इसमें व्यावहारिक प्रशिक्षण, सिमुलेशन-आधारित शिक्षा और मूल उपकरण निर्माताओं के साथ साझेदारी का समावेश किया जाएगा। कार्यक्रम का लक्ष्य एक सक्षम कार्यबल तैयार करना है, जो भारत के बढ़ते विमानन क्षेत्र का समर्थन कर सके और इसकी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ा सके।

यह नया कदम न केवल विमानन क्षेत्र में बेहतर अवसरों का सृजन करेगा, बल्कि भारत की आर्थिक वृद्धि में भी योगदान देगा। GSV और DGCA की इस साझेदारी से उम्मीद है कि बेहतर प्रशिक्षण और अनुसंधान के माध्यम से भारतीय विमानन उद्योग में स्थायी विकास संभव होगा।

छत्तीसगढ़ में महंगाई भत्ते में बड़ा इजाफा: श्रमिकों के न्यूनतम वेतन में वृद्धि, जानिए अब मिलेगा कितना!

ब्रेकिंग न्यूज़: छत्तीसगढ़ में श्रमिकों के लिए नई महंगाई भत्ता दरें लागू

छत्तीसगढ़ श्रमिकों के लिए खुशखबरी

रायपुर: छत्तीसगढ़ के श्रमिकों को हाल ही में आर्थिक राहत मिली है। राज्य सरकार ने श्रमिकों के न्यूनतम वेतन और महंगाई भत्ते में वृद्धि की नई दरें लागू की हैं। श्रमायुक्त हिम शिखर गुप्ता द्वारा निर्धारित की गई ये नई दरें श्रमिकों की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ करने में सहायक होंगी।

महंगाई भत्ते में महत्वपूर्ण वृद्धि

लेबर ब्यूरो, शिमला से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2025 से दिसंबर 2025 के बीच औद्योगिक सूचकांक में 11.28 अंकों की वृद्धि हुई है। इसके परिणामस्वरूप, राज्य के 45 अनुसूचित नियोजनों के श्रमिकों को महंगाई भत्ते में 226 रुपये की वृद्धि का लाभ मिलेगा।

कृषि श्रमिकों के लिए, सूचकांक में 34 अंकों का इजाफा होने से उनके भत्ते में 170 रुपये का इजाफा हुआ है। अगरबत्ती उद्योग के श्रमिकों के लिए भी दरों में वृद्धि की गई है, जहां उन्हें 8.53 रुपये प्रति हजार अगरबत्ती के मान से अतिरिक्त राशि मिलेगी। यह संशोधित दरें 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेंगी।

न्यूनतम वेतन की नई दरें

नए वेतनमान के अनुसार, 45 अनुसूचित सामान्य नियोजन के अंतर्गत अकुशल श्रमिकों का मासिक वेतन विभिन्न जोनों में इस प्रकार निर्धारित किया गया है: जोन ‘अ’ के लिए 11,402 रुपये, जोन ‘ब’ के लिए 11,142 रुपये, और जोन ‘स’ के लिए 10,882 रुपये।

अर्द्धकुशल श्रमिकों के लिए, वेतन क्रमशः जोन ‘अ’ में 12,052 रुपये, जोन ‘ब’ में 11,792 रुपये, और जोन ‘स’ में 11,532 रुपये निर्धारित किया गया है। कुशल श्रमिकों के लिए ये दरें 12,832 रुपये, 12,572 रुपये, और 12,312 रुपये हैं, जबकि उच्च कुशल श्रमिकों के लिए यह दरें क्रमशः 13,612 रुपये, 13,352 रुपये और 13,092 रुपये प्रति माह होंगी।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ की सरकार द्वारा की गई यह पहल श्रमिकों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकारी वेबसाइट श्रमेवजयते या श्रमायुक्त कार्यालय, इंद्रावती भवन, नवा रायपुर से विस्तृत जानकारी प्राप्त की जा सकती है। यह नई दरें न केवल श्रमिकों के लिए अधिक सुरक्षा प्रदान करेंगी, बल्कि उनके परिवारों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में भी सहायक होंगी।

आईपीएल 2026: नुवान थुशरा ने SLC के खिलाफ NOC मुद्दे पर मुकदमा दायर किया

ब्रेकिंग न्यूज:
RCB के गेंदबाज ने महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि उनका SLC अनुबंध 31 मार्च को समाप्त हो गया था, जिससे NOC लागू करना असंगत है।

RCB (रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर) के गेंदबाज ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि उनका श्रीलंका क्रिकेट (SLC) से अनुबंध 31 मार्च तक वैध था। उनके अनुसार, अब NOC (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) की मांग करना उनके पेशेवर जीवन के लिए बाधा बना रहा है।

इस घटनाक्रम ने क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी है और खिलाड़ी के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या इस मुद्दे का समाधान होगा? यह तो समय ही बताएगा।

इस प्रकार, RCB के गेंदबाज का बयान उनकी आजीविका को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।