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रायपुर, BEO पर प्रधान पाठक ने उठाया हाथ, निलंबित

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रायपुर, BEO पर प्रधान पाठक ने उठाया हाथ, निलंबित

रायपुर। बीईओ (BEO ) पर हाथ उठाना मिडिल स्कूल के प्रधान पाठक को भारी पड़ गया. संभागीय संयुक्त संचालक राकेश पांडेय (Rakesh Pandey) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रधान पाठक राजन कुमार बघेल को निलंबित कर दिया है.

संभागीय संयुक्त संचालक राकेश पांडेय (Rakesh Pandey) ने बताया कि मिडिल स्कूल के परसदा सोंठ अभनपुर में पदस्थ प्रधान पाठक राजन कुमार बघेल ने अभद्र व्यवहार किया और अपशब्दों का प्रयोग किया गया. हाथ मरोड़ा गया और गला दबाकर जान से मारने की कोशिश की गई. यहां तक कुर्सी को पटकते हुए फ़ाइल पकड़कर सिर में मारा गया. प्राथमिक तौर पर दोषी पाए जाने के बाद प्रधान पाठक के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है.

निलंबन आदेश में बताया गया कि प्राचार्य पद पर पदोन्नति के संबंध में अपना गोपनीय प्रतिवेदन सुधार के लिए विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी अभनपुर (Abhanpur) के समक्ष उपस्थित हुए थे. इस दौरान बहसबाजी करते हुए अधिकारी से अभद्र व्यवहार किया गया, जिसकी वजह से प्रधानपाठक को सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण, अपील) नियम 1966 के नियम-9 (1) के तहत् तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है. निलंबन अवधि के दौरान राजन कुमार बघेल का मुख्यालय कसडोल विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय नियत किया गया है.

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प्रधान पाठक राजन कुमार बघेल को निलंबित

बागबाहरा खेमड़ा जांच चौकी में 140 कट्टा धान जब्त

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बागबाहरा खेमड़ा जांच चौकी में 140 कट्टा धान जब्त

महासमुंद 03 दिसंबर 2024/ कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह के निर्देशन में जिले में अवैध धान भण्डारण, परिवहन एवं विक्रय पर सतत कार्रवाई जारी है। इसी क्रम में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बागबाहरा श्री उमेश कुमार साहू के मार्गदर्शन में मंडी इंस्पेक्टर ने खेमड़ा जांच चौकी पर बड़ी कार्रवाई की है।

बीती रात मंडी इंस्पेक्टर श्री सिदार और श्री साजिदखान की उपस्थिति में रजन यादव, निवासी टरबोड़ा, नुआपड़ा (ओडिशा) से 140 कट्टा धान जब्त किया गया। रजन यादव द्वारा दो अलग-अलग वाहनों के माध्यम से 70-70 कट्टा धान अपने घर से खेमड़ा ले जाया जा रहा था। जांच के दौरान रजन यादव परिवहन से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने में असफल रहे, जिसके कारण यह कार्रवाई की गई। जिले में अवैध धान व्यापार पर प्रशासन की सख्त नजर है, और इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

महासमुंद : नपा और पंचायत चुनाव के लिए शिकायत सेल की स्थापना

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ग्राम पंचायत
mahaasamund jile mein graam panchaayat kee sankhya

महासमुंद। आगामी नगरपालिका एवं त्रिस्तरीय पंचायत आम निर्वाचन 2024-25 के लिए आम जनता की सुविधा हेतु जिला कार्यालय महासमुंद के हमर गोहार कक्ष में जिला नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) एवं शिकायत सेल की स्थापना की गई है। जिले में नियंत्रण कक्ष एवं शिकायत सेल 24 घंटे सातो दिन संचालित रहेगी। जिसका दूरभाष क्रमांक 07723-223305 पर किसी भी प्रकार की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी विनय कुमार लंगेह ने हमर गोहार कक्ष के प्रभारी अधिकारी के रूप में डिप्टी कलेक्टर सृष्टि चंद्राकर को नियुक्त किया है। कलेक्टर लंगेह ने कक्ष संचालन के लिए तीन पालियों में कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है। जिसमें प्रातः 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक सहायक वर्ग-03 रेखा बघेल जिला निवार्चन एवं तरूण चंद्राकर जिला प्रशिक्षण संथान, दोपहर 2 बजे से रात्रि 10 बजे तक सहायक वर्ग-03 श्री सूरज कुमार पहाड़िया शास. उच्च. माध्यमिक विद्यालय रेवामोंगरापाली

एवं रवि अग्रवाल शासकीय नवीन महाविद्यालय पिरदा तथा रात्रि 10 बजे से प्रातः 6 बजे तक सहायक वर्ग-03 शिवम दुबे जिला अस्पताल एवं श्री लेखराज बंजारे नवीन शासकीय महाविद्यालय कोमाखान की ड्यूटी लगाई गई है। उक्त कर्मचारी हमर गोहार कक्ष में निर्धारित समय पर उपस्थित रहकर आम जनता से विभिन्न प्रकार की शिकायतें एवं निर्वाचन संबंधित जानकारी को दर्ज कर प्रभारी अधिकारी को अवगत कराते हुए उनके मार्गदर्शन में कार्य संपादित करेंगे।

गजब! 5 फीट लंबी लौकी, महासमुंद के एक किसान ने उगाया, लोगों ने कहा आश्चर्यजनक

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महासमुंद। यहां एक गजब की लौकी

महासमुंद। यहां एक गजब की लौकी देखने को मिली है, जिसकी लंबाई 5 फीट से अधिक है। इसकी मोटाई करीब 9 इंच है। इस तरह की लौकी यहां पहली बार देखा गया है। यह लौकी इन दिनों खूब आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. वजह है इसकी लंबाई. आश्चर्यजनक 5 फीट लंबाई वाले इस लौकी को बागबाहरा ब्लॉक के ग्राम कुलिया के किसान संजय चंद्राकर ने अपने बाड़ी में उगाया है। उन्होंने बताया कि देशी तकनीक से लौकी उत्पादन किया है।

किसान संजय चंद्राकर ने बताया कि लौकी फसल की बुआई अगस्त-जुलाई में की थी। इसकी बुवाई आम प्रकिया के तहत की गई थी। उन्होंने बीज गांव के एक किसान से लेकर लगाया था। किसी तरह का कोई खाद उन्होंने पौधें  पर नहीं दिया। एक पेड़ से अब तक 20 लौकी तोड़ चुके हैं अभी भी पेड़ पर 5-7 लौकी लगे हुए हैं। हर लौकी की वजन 12 से 15 किलो तक है। इस तरह एक लौकी के पेड़ से करीब डेढ़ क्विंटल लौकी वह तोड़ चुके हैं।

लौकी में भरपूर मात्रा में कैलौरी

लौकी में प्रोटीन 0.2 प्रतिशत, वसा 0.1 प्रतिशत, फाइबर 0.8 प्रतिशत, शर्करा 2.5 प्रतिशत, ऊर्जा 12 किलो कैलोरी, नमी 96.1 प्रतिशत है.

सब्जी बनाने के अलावा यहां भी उपयोग में लाया जाता है लौकी

बता दें कि लौकी सब्जी के अलावा मिठाई, रायता, आचार, कोफ्ता, खीर आदि बनाने में प्रयोग की जाती हैं. इससे कई प्रकार की औषधियां भी बनती है. औषधीय गुणों के चलते चिकित्सक भी रोगियों को लौकी खाने की सलाह देते हैं.

यहां देखें वीडियों…

CM in Maharashtra?: शिंदे ही नहीं अब अजित कैंप से भी तनातनी, जानिए किस मंत्रालय पर मचा है बवाल

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CM in Maharashtra? फडणवीस

CM in Maharashtra?:  महाराष्‍ट्र से लेकर दिल्‍ली तक हर कोई यह जानना चाहता है कि देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे में से कौन प्रदेश का अगला CM होगा. महाराष्‍ट्र के CM पद को लेकर शिंदे-फडणवीस विवाद अभी सुलझा भी नहीं है कि अब इसमें अजित पवार भी कूद गए हैं. सूत्रों के मुताबिक अजित पवार सीएम पद पर कोई दावा पेश नहीं कर रहे हैं. वो महाराष्‍ट्र की नई सरकार में अपने मंत्रियों के पोर्टफोलियों को लेकर शिवसेना गुट से उलझते हुए नजर आ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक सरकार में शिंदे कैंप और अजित पवार कैंप पोर्टफोलियो को लेकर एक दूसरे के आमने-सामने आ गए है.

BJP की इन दोनों सहयोगी पार्टियों को महाराष्‍ट्र सरकार में अपने पसंद के पोर्टफोलियो चाहिए. कुछ पोर्टफोलियो ऐसे है जिसे पाने की इच्‍छा दोनों पार्टी की है. यही वजह है कि अजित पवार खुद दिल्ली में डेरा डाले बैठे हैं और BJP के आला कमान से इसे लेकर बातचीत कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि अजित पवार को पीडब्‍ल्‍यूडी, अर्बन डेवलपमेंट, फाइनेंस सहित कुछ ऐसे पोर्टफोलियो हैं जो एकनाथ शिंदे कैम्प और अजित पवार कैंप दोनो मांग रहे है.

रुपाणी-सीतारमन पर सुलझाएंगे विवाद! CM in Maharashtra?:

महाराष्‍ट्र में 5 दिसंबर को सीएम का शपथ ग्रहण होगा. बीजेपी आलाकमान ने वित मंत्री निर्मला सीतारमण और महाराष्‍ट्र के पूर्व सीएम विजय रुपाणी को महाराष्‍ट्र का पर्यवेक्षक नियुक्‍त किया है. दोनों की जिम्‍मेदारी तीनों पार्टियों से बातचीत के बाद महाराष्‍ट्र के नए सीएम को लेकर स्थिति स्‍पष्‍ट करने की है. माना जा रहा है कि मंत्रालयों को लेकर अजित पवार, एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस के बीच उलझन की स्थिति को भी केंद्रीय पर्यवेक्षक सुलझा सकते हैं.

10 दिन बाद भी नहीं बन सकी महाराष्‍ट्र में सरकार CM in Maharashtra?:

महाराष्‍ट्र विधानसभा के नतीजे 23 नवंबर को सामने आए. 10 दिन बीत जाने के बावजूद अबतक महाराष्‍ट्र में नई सरकार का गठन नहीं हो पाया है. इस वक्‍त एकनाथ शिंदे महाराष्‍ट्र के कार्यवाहक सीएम हैं. शिवसेना उद्धव गुट ने महाराष्‍ट्र की ताजा स्थिति को देखते हुए प्रदेश में राष्‍ट्रपति शासन लगाने की मांग की है. उधर, एकनाथ शिंदे भले ही सीएम बनना चाहते हों, लेकिन उन्‍होंने यह साफ कर दिया है कि उनके भविष्‍य को लेकर फैसला BJP का आलाकमान लेगा

Bleeding Eye Virus: इस संक्रमण से आंखों से बहता है खून! 15 की मौत, 17 देशों में अलर्ट

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Bleeding Eye Virus

Bleeding Eye Virus: अभी तक कोरोना को भूला नहीं पाएं हैं। ऐसे में एक बार फिर नए वायरस का आक्रमण देखने को मिल रहा है। इन दिनों अफ्रीकी देश रवांडा में मारबर्ग वायरस का कहर जारी है और इसकी वजह से 15 लोगों की मौत हो चुकी है. सैकड़ों लोग मारबर्ग वायरस से संक्रमित हो चुके हैं और इसके बढ़ते खतरे को देखते हुए करीब 17 देशों में ट्रैवलर्स के लिए अलर्ट जारी किया जा चुका है. मारबर्ग वायरस की वजह से लोगों की आंख से खून भी निकलने लगता है, जिससे वजह से इसे ब्लीडिंग आई वायरस (Bleeding Eye Virus) भी कहा जाता है. इस वायरस से जुड़ी जरूरी बातें जान लेते हैं.

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) की रिपोर्ट के मुताबिक मारबर्ग वायरस इबोला वायरस फैमिली से ही जुड़ा हुआ है, जो वायरल हेमरेजिक फीवर का कारण बनता है. (Bleeding Eye Virus) यह वायरस लोगों की ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचाता है और इंटरनल ब्लीडिंग की कंडीशन पैदा कर सकता है. मारबर्ग वायरस एक जूनोटिक वायरस है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैलता है. यह विशेष रूप से चमगादड़ों से उत्पन्न होता है और उनके खून, यूरिन या लार के संपर्क में आने से इंसानों में फैल जाता है. यह वायरस बेहद खतरनाक है और इससे संक्रमित होने पर कई लोगों की जान चली जाती है.

क्या होते हैं मारबर्ग वायरस (Bleeding Eye Virus) के लक्षण?

WHO के अनुसार मारबर्ग वायरस के लक्षण इबोला वायरस जैसे होते हैं. इस वायरस की चपेट में आने पर लोगों को तेज बुखार, तेज सिरदर्द, मसल्स में दर्द, उल्टी, गले में खराश, रैशेज और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं. (Bleeding Eye Virus) गंभीर मामलों में यह वायरस इंटरनल ब्लीडिंग, ऑर्गन फेलियर की वजह बन सकता है, जिससे लोगों की मौत हो सकती है. वायरस का इंफेक्शन ज्यादा बढ़ जाए, तो इससे वजन में अचानक गिरावट, नाक, आंख, मुंह या योनि से खून बहनाे और मेंटल कंफ्यूजन जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं. यह वायरस 1961 में सबसे पहले जर्मनी के फ्रेंकफर्ट में मिला था.

क्या है मारबर्ग वायरस का ट्रीटमेंट?

एक्सपर्ट्स की मानें तो मारबर्ग वायरस के लिए कोई सटीक ट्रीटमेंट उपलब्ध नहीं हैं. इस वायरस की मृत्यु दर 24% से लेकर 88% तक हो सकती है. इस वायरस की चपेट में आने पर लोगों को लक्षणों के आधार पर ट्रीटमेंट दिया जाता है. इस समय मारबर्ग वायरस का ट्रीटमेंट ब्लड प्रोडक्ट्स, इम्यून थैरेपी और कुछ दवाओं से किया जा रहा है. इस वायरस की अभी तक कोई वैक्सीन भी उपलब्ध नहीं है, लेकिन एक वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया शुरुआती चरण में है. ऐसे में इस वायरस की चपेट में आने पर लोगों की कंडीशन गंभीर हो सकती है.

कैसे करें ब्लीडिंग आई वायरस से बचाव?

मारबर्ग वायरस संक्रमित लोगों के संपर्क में आने से फैलता. यह शरीर के तरल पदार्थों से अन्य लोगों में फैल सकता है. इससे बचाव के लिए मारबर्ग वायरस के संक्रमण वाले एरिया में न जाएं. सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क का इस्तेमाल और हाथों का बार-बार धोने से इस वायरस से बचा जा सकता है. इसके अलावा संक्रमित व्यक्तियों के साथ सीधे संपर्क से बचें. इस वायरस से बचने के लिए सावधानी बरतना जरूरी है.

Cyclone Fengal: जलमग्‍न हुई बसें, लाखों लोग घर से बेघर हुए, फेंगल तूफान से तमिलनाडु का देखें ताजा हाल खौफनाक

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Cyclone Fengal

Cyclone Fengal News: तूफान फेंगल ने तमिलनाडु और पुडुचेरी में जमकर उत्‍पात मचाया. लाखों लोगों को इस तूफान के चलते अपना घर छोड़ना पड़ा है। Cyclone Fengal इस वक्‍त सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें देखा जा सकता है कि कैसे तमिलनाडु में फेंगल तूफान के बाद आई तेज बारिश के चलते बसें पानी के बहाव के साथ बह रही हैं। तेज बारिश के चलते कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं. राज्‍य में ट्रेन सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित हैं. इसके अलावा एयरपोर्ट पर हवाई सेवाएं भी प्रभावित हैं. राज्‍य में स्‍कूल-कॉलेज भी बंद हैं.

भारी बारिश के बाद विक्रवंडी और कृष्णगिरि सबसे ज्‍यादा प्रभावित रहे. इसके अलावा विल्लुपुरम और पुडुचेरी में भी लोग चक्रवात के कारण खासे परेशान हैं. साथ ही विल्लुपुरम में और कृष्णगिरि में बाढ़ के चलते पानी भरने का दशकों का रिकॉर्ड टूट गया. साथ ही फंसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है. Cyclone Fengal फेंगल तूफान के कहर के बीच तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन का बयान भी सामने आया है. उन्‍होंने कहा विल्लुपुरम जिले में स्थिति का जायजा मैने लिया है. हजारों लोगों को यहां से सुरक्षित स्‍थानों पर भेजा गया है. इन्‍हें राहत शिविरों में रखा जा रहा है. साथ ही खाने पीने से लेकर इलाज मुहैया कराया जा रहा है. सरकार प्रभावित लोगों की तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है. हम मुश्किल वक्‍त में लोगों के साथ खड़े हैं.

रेल सेवाएं क्‍यों हुई ठप?

रेलवे की तरफ से भी तूफान फेंगल के कारण सेवाएं प्रभावित होने पर सफाई दी गई. बताया गया कि विक्रवंडी में शहर को मुंडियामपक्कम से जोड़ने वाले एक मुख्य पुल पर बाढ़ का पानी बढ़ने के कारण रेल सेवाएं स्थगित कर दी गई हैं. चेन्नई एग्मोर-नागरकोइल वंदे भारत एक्सप्रेस को रद्द कर दिया गया है. Cyclone Fengal उत्तरी तमिलनाडु को मध्य और दक्षिणी क्षेत्रों से जोड़ने वाले कई अन्य प्रमुख मार्ग भी इसकी चपेट में आए हैं. इस वक्‍त थेंपेन्नई नदी उफान पर है, जिससे कुड्डालोर और पड़ोसी जिलों के निचले इलाके जलमग्न हो गए हैं. पड़ोसी कृष्णगिरि जिले में, झीलें और जलाशय ओवरफ्लो हो गए, जिससे सड़कें और घर जलमग्न हो गए.

यहां देखें वीडियो

CG महतारी वंदन योजना की 10वीं किश्त आज होगी जारी

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रायपुर। छत्तीसगढ़ सीएम विष्णु देव साय आज अर्थात 03 दिसम्बर को महतारी वंदन योजना की 10वीं किश्त की राशि ऑनलाइन जारी करेंगे। इस योजना की हितग्राही लगभग 70 लाख माताओं-बहनों के खाते में एक-एक हजार रूपए राशि का अंतरण होते ही उनके मोबाइल में एक बार फिर से खुशियों का नोटिफिकेशन पहुंचेगा।

सीएम विष्णु देव साय 3 दिसम्बर को रायगढ़ के शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी मिनी स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में महतारी वंदन योजना की 10वीं किश्त के रूप में 652 करोड़ 4 लाख रूपए की राशि जारी करेंगे। मार्च 2024 से राज्य की महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम और सशक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना के तहत कुल 6530 करोड़ 70 लाख रूपए की राशि आर्थिक मदद के रूप में दी जा चुकी है।

आज से सीएम साय, रायपुर की तर्ज पर रायगढ़ के मरीन ड्राईव एरिया में 42 करोड़ की लागत से बनने वाले नालंदा परिसर का भूमिपूजन करेंगे। सीएम इस मौके पर रायगढ़ जिले को 135 करोड़ रूपए की लागत वाले विकास एवं निर्माण कार्यों की सौगात भी देंगे, जिसमें 97 करोड़ 51 लाख रूपए की लागत से निर्मित 67 कार्यों का लोकार्पण तथा 37 करोड़ 58 लाख रूपए की लागत से निर्मित होने वाले 13 कार्यों का शिलान्यास शामिल है। मुख्यमंत्री रायगढ़ के निगम ऑडिटोरियम में उत्कल ब्राम्हण सम्मेलन में भी शामिल होंगे।

जारी कार्यक्रम के अनुसार सीएम विष्णु देव साय रायपुर पुलिस परेड ग्राउण्उ से सुबह 11.05 बजे हेलीकॉप्टर से प्रस्थान कर 11.55 बजे रायगढ़ पहुंचेंगे। सीएम दोपहर 12 बजे से एक बजे तक रायगढ़ नगर पालिका ऑडिटोरियम में आयोजित उत्कल ब्राम्हण सम्मेलन कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री इसके पश्चात रायगढ़ मरीन ड्राईव के पास दोपहर एक बजे से नालंदा परिसर के भूमिपूजन कार्यक्रम तथा दोपहर 2.05 बजे से शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी मिनी स्टेडियम में महतारी वंदन योजना के राशि वितरण एवं विभिन्न विकास कार्यों के लोकार्पण-शिलान्यास एवं भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल होंगे।

Chhattisgarh: जाल में फंसा 65 किलो की मछली, बाहर निकलाने मछुआरे के छूटे पसीने

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Chhattisgarh: जाल में फंसा 65 किलो की मछली

कवर्धा Chhattisgarh। जिले के सरोदा जलाशय में मछुआरों को सोमवार को मछली पकड़ने के दौरान 65 किलो की विशाल मछली मिली, जो लोगों के कौतूहल का विषय बन गई है। मछुआरों ने सुबह के समय सरोदा जलाशय में मछली पकड़ने के लिए जाल डाला था। अचानक जाल भारी हो गया और मछुआरे को लगा कि कोई बड़ा पत्थर या भारी वस्तु जाल में फंस गई है। जब उन्होंने जाल खींचने की कोशिश की, तो वह असफल रहे। इसके बाद अन्य मछुआरों को बुलाया गया और तीन साथियों की मदद से जाल बाहर निकाला गया। बाहर निकालते ही मछुआरों ने देखा कि उसमें 6 फीट लंबी और 65 किलो वजनी विशाल मछली फंसी हुई थी।

Chhattisgarh: मछली को देख लोग काफी उत्साहित नजर आए। विशेषज्ञ ने बताया कि यह ब्लैक कार्प प्रजाति की मछली है, जिसका शरीर फ्यूसीफॉर्म होता है। वे गहरे भूरे, भूरे या नीले काले रंग के दिखाई देते हैं और उनके पंख गहरे रंग के होते हैं। सरोदा जलाशय कबीरधाम जिले की मध्यम सिंचाई परियोजना का हिस्सा है। जलाशय का उपयोग मछली पालन के लिए किया जाता है। यहां की तीन प्रमुख मछुआरा समितियां- नेताजी मछुआरा समिति, श्रीराम मछुआ सहकारी समिति, और केंवट मछुआरा समिति को यह जलाशय पट्टे पर दिया गया है। मछली पालन विभाग के अनुसार जलाशय स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का एक बड़ा केंद्र बन चुका है।

वरिष्ठ पत्रकार डॉ. नीरज गजेंद्र की कलम ज़िंदगीनामा में पढ़िए “अनुदान की चाशनी और कमजोर होता स्वाभिमान”

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वरिष्ठ पत्रकार और विश्लेषक डॉ. नीरज गजेंद्र

ज़िंदगीनामा: रोटी, कपड़ा और मकान। ये सिर्फ शब्द नहीं, हमारे जीवन की बुनियादी जरूरतें हैं। हर इंसान का सपना होता है कि उसके पास एक छत हो, पेट भरने को भोजन हो, और तन ढकने को कपड़ा। सरकारें भी जनता की इन्हीं जरूरतों को ध्यान में रखकर योजनाएं बनाती हैं। लेकिन आज के दौर में इन जरूरतों को पूरा करने का तरीका बदल गया है। मेहनत और स्वाभिमान की जगह मुफ्त की उम्मीदों ने ले ली है। हम मदद के नाम पर अपनी कमर ही नहीं, बल्कि हौसला भी तोड़ रहे हैं।

सरकार ने रोटी का इंतजाम तो ऐसा कर दिया है कि अब किसी को भूखे सोने की नौबत नहीं आती। मुफ्त अनाज की योजनाओं ने यह सुनिश्चित कर दिया कि अब पेट भरने के लिए काम करने की भी जरूरत नहीं। पहले घर में चूल्हा जलाने के लिए मेहनत करनी पड़ती थी, लेकिन अब तो हर हाथ में एक थैला होता है, जिसमें राशन भरने का इंतजार रहता है। कपड़े की बात करें तो स्कूली बच्चों के लिए मुफ्त यूनिफॉर्म आ ही रहे हैं। हर साल नया जोड़ा मिलता है। अब माता-पिता के पास बच्चों के कपड़े खरीदने की चिंता नहीं बची।

और मकान। अरे भैया, सरकार है न। प्रधानमंत्री आवास योजना है, मोर जमीन मोर मकान है, बस आवेदन कर दीजिए और सरकार मकान बना देगी। लेकिन हां, अब नियमों की पेचीदगियां इतनी हैं कि पात्र भी अपात्र बनते जा रहे हैं। मीडिया की सूचना से पता चला है कि अब पीएम आवास योजना के लिए जाति प्रमाण पत्र जरूरी है। आप सौ साल से शहर में रह रहे हों। आपके पास जाति का कागज नहीं है, तो मकान का सपना पूरा नहीं होगा। क्या विडंबना है, झोपड़ी में रह रहे लोग तो मकान के लिए तरसते हैं, और जिनके पास पहले से पक्के मकान हैं, वे इस योजना का फायदा ले चुके हैं।

सोचिए, जो हाथ काम करने के लिए बने थे, वे अब सिर्फ राशन के थैलों को थामने के लिए रह गए हैं। जिन पैरों को दौड़ना चाहिए था, वे अब अनुदान की लाइन में खड़े रहते हैं। मदद बुरी नहीं है। लेकिन वह आपको मजबूत बनाए, कमजोर नहीं। मुफ्त योजनाओं के बजाय हमें अपने कर्म पर ध्यान देना चाहिए। सरकार का काम है रास्ता दिखाना, लेकिन उस रास्ते पर चलना हमारा काम है। याद रखिए, स्वाभिमान आपको सिर ऊंचा कर चलने का हौसला देता है। आज जरूरत इस बात की है कि हम अपने भीतर यह भावना जगाएं कि जो कुछ भी मिलेगा, वह हमारी मेहनत का फल हो। स्वाभिमान और कर्म की यह राह न सिर्फ हमें, बल्कि हमारे बच्चों और आने वाली पीढ़ियों को भी आत्मनिर्भर बनाएगी।