महासमुंद/बागबाहरा, दिलीप शर्मा।
₹1.11 करोड़ खर्च, फिर भी गांव प्यासा: जल जीवन मिशन के तहत कुसमी गांव में हर घर तक नल कनेक्शन देने का दावा किया गया है। सरकारी रिकॉर्ड में गांव को 100 प्रतिशत ‘हर घर जल’ (FHTC) वाला बताया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। गांव में पिछले दो महीनों से नलों में पानी की सप्लाई पूरी तरह बंद है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
🚰 टंकी में लीकेज, पानी रुकना मुश्किल
ग्रामीणों के अनुसार, गांव में बनाई गई पानी टंकी कई जगहों से लीक हो रही है। स्थिति यह है कि टंकी में पानी ठहर ही नहीं पाता, जिसके चलते सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई है। एक ग्रामीण ने बताया कि टंकी बनने के बाद से ही उसमें लीकेज की समस्या है और पानी भरने के कुछ समय बाद ही खाली हो जाती है। पिछले दो महीनों से नलों में पानी नहीं आ रहा है।
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💧 पानी के लिए फिर पुराने साधनों का सहारा
नल जल योजना बंद होने के कारण ग्रामीणों को फिर से पुराने साधनों पर निर्भर होना पड़ रहा है। लोग कुएं और हैंडपंप से पानी लाने को मजबूर हैं। दूर-दूर से पानी ढोना पड़ रहा है, जिससे खासकर बुजुर्ग और महिलाओं को काफी दिक्कत हो रही है। एक महिला ग्रामीण ने बताया कि नल कनेक्शन तो दिया गया, लेकिन पानी नहीं मिल रहा, जिससे रोजमर्रा की जरूरतों के लिए परेशानी बढ़ गई है।
📊 कागजों में 100% कनेक्शन, हकीकत में फेल व्यवस्था
सरकारी आंकड़ों के अनुसार गांव के 284 घरों में 284 नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं और योजना को 100 प्रतिशत पूर्ण बताया गया है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर पानी की सप्लाई बंद है, जिससे योजना की गुणवत्ता और निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
🏗️ ₹1.11 करोड़ की योजना, फिर भी समस्या बरकरार
कुसमी गांव में इस योजना के लिए करीब ₹1.11 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई थी। इसके बावजूद आज तक ग्रामीणों को नियमित पानी नहीं मिल पा रहा है। योजना की स्थिति अभी भी “प्रगति पर” बताई जा रही है, जिससे संदेह और बढ़ गया है।

📣 शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित विभाग को समस्या की जानकारी दी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का आरोप है कि शिकायत के बाद भी कोई अधिकारी मौके पर जांच के लिए नहीं पहुंचा।
❓ NOC और हैंडओवर पर उठे सवाल
इस मामले में यह भी स्पष्ट नहीं है कि योजना का हैंडओवर पूरी तरह हुआ है या नहीं और क्या सरपंच से आवश्यक स्वीकृति (NOC) ली गई है। यदि लिया गया है, तो इतनी खामियों के बावजूद कैसे, और यदि नहीं लिया गया है, तो फिर 100 प्रतिशत सप्लाई का दावा क्यों किया जा रहा है।
⚠️ ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पानी टंकी की तत्काल मरम्मत कराई जाए, नियमित जल सप्लाई शुरू की जाए और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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