महासमुंद/बागबाहरा। करीब 32 साल पहले अचानक लापता हुआ एक व्यक्ति आज तक नहीं मिला। वह कहां गया, उसके साथ क्या हुआ और वह जीवित है या नहीं—इन सवालों का जवाब परिवार को तीन दशक से नहीं मिल पाया है। अब इतने लंबे इंतजार के बाद बागबाहरा पुलिस ने इस मामले में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ अपहरण की धारा 365 के तहत एफआईआर दर्ज की है। मामला 9 अक्टूबर 2026 को दर्ज किया गया है।
मामला ग्राम सोहागपुर निवासी घंसियाराम गाडा का है, जो 20 मई 1994 को घर से निकले थे और फिर कभी वापस नहीं लौटे। उस समय उनकी उम्र करीब 60 वर्ष बताई गई थी। परिजनों ने आसपास के गांवों और रिश्तेदारों के यहां तलाश की, लेकिन उनका कोई पता नहीं चला। वर्षों बीत गए, परिवार की उम्मीदें कमजोर पड़ती गईं, मगर घंसियाराम के लापता होने का रहस्य आज भी बरकरार है।
आखिर कहां लापता हो गए घंसियाराम?
पुलिस में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, घंसियाराम गाडा पिता निरंजन गाडा ग्राम सोहागपुर, थाना तेंदूकोना क्षेत्र के निवासी थे। 20 मई 1994 को सुबह करीब 10 बजे वे बिना किसी को बताए कहीं चले गए। इसके बाद घर नहीं लौटे। परिजनों ने अपने स्तर पर काफी खोजबीन की, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला।
अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि घंसियाराम स्वेच्छा से कहीं चले गए थे या किसी अन्य घटना के कारण लापता हुए। पुलिस रिकॉर्ड में किसी अज्ञात व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा उन्हें ले जाकर किसी अज्ञात स्थान पर रखे जाने की आशंका से भी इनकार नहीं किया गया है। हालांकि, इस आशंका की पुष्टि करने वाला कोई निष्कर्ष एफआईआर में सामने नहीं आया है।
भाई की तलाश के साथ सरकारी कामकाज की परेशानी
घंसियाराम के छोटे भाई घासूराम गाडा ने पुलिस को बताया कि परिवार ने वर्षों तक अपने स्तर पर उनकी तलाश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। अब परिवार के सामने भाई के लापता होने के साथ-साथ सरकारी कामकाज से जुड़ी परेशानियां भी खड़ी हो गई हैं।
घासूराम ने छत्तीसगढ़ शासन के गृहमंत्री को आवेदन देकर अपने लापता भाई का मृत्यु प्रमाणपत्र जारी कराने के लिए हस्तक्षेप की मांग की है। आवेदन में बताया गया है कि भाई के संबंध में कोई जानकारी नहीं मिलने के कारण धान बिक्री और ऋण लेने जैसे कामों में परेशानी हो रही है। परिवार में अब वे अकेले रह गए हैं और उनके तीन बच्चे हैं।
हालांकि, किसी व्यक्ति के लंबे समय तक लापता रहने मात्र से उसकी मृत्यु कानूनी रूप से स्वतः प्रमाणित नहीं हो जाती। ऐसे मामलों में मृत्यु प्रमाणपत्र और अन्य संबंधित प्रक्रियाओं के लिए लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई आवश्यक होती है।
9 अक्टूबर को दर्ज हुई एफआईआर
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, बागबाहरा थाने में इस मामले में एफआईआर क्रमांक 0206/26 दर्ज की गई है। अपराध में भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 365 का उल्लेख है। शिकायतकर्ता घासूराम गाडा की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई है। पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति को आरोपी के रूप में दर्ज किया है।
एफआईआर में घंसियाराम का हुलिया भी दर्ज है। उनकी लंबाई करीब 5 फीट 2 इंच, चेहरा गोल, आंखें काली, रंग गोरा और बाल काले बताए गए हैं। लापता होते समय उन्होंने नीले रंग की पैंट-शर्ट पहनी हुई थी। वे हिंदी और छत्तीसगढ़ी बोलते थे।
तीन दशक बाद भी वही सवाल
घंसियाराम के लापता होने के समय परिवार ने उनकी तलाश की थी, लेकिन आज तक उनके बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी। अब 9 अक्टूबर 2026 को दर्ज एफआईआर के बाद जांच में क्या सामने आता है, यह महत्वपूर्ण होगा।
क्या घंसियाराम के लापता होने के पीछे कोई अनजान घटना थी? क्या इतने वर्षों बाद कोई पुराना सुराग मिल सकेगा? या परिवार को अब भी उनके बारे में अनिश्चितता के साथ ही जीवन बिताना पड़ेगा? इन सवालों के जवाब पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों से ही सामने आ सकेंगे।
फिलहाल, 32 साल से लापता घंसियाराम गाडा का कोई पता नहीं है। परिवार को अब भी उस रहस्य के खुलने का इंतजार है, जो 20 मई 1994 को उनके अचानक गायब होने के साथ शुरू हुआ था।


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