रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है, जहां अदालत ने पांच साल पुराने प्रकरण में सुनवाई के बाद प्रधान आरक्षक और उसकी पत्नी के खिलाफ अपराध दर्ज करने का आदेश दिया है। पीड़िता को लंबे इंतजार के बाद आखिरकार न्याय मिला।
क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, रायगढ़ पुलिस अधीक्षक कार्यालय में पूर्व में पदस्थ रहे प्रधान आरक्षक मुकेश त्रिपाठी और उनकी पत्नी पूनम त्रिपाठी के खिलाफ मामला दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। वर्तमान में मुकेश त्रिपाठी राजधानी रायपुर स्थित एसीबी कार्यालय में कार्यरत हैं।
यह आदेश मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी पुनीत समीक्षा खलखो ने एक परिवाद पत्र की सुनवाई के बाद जारी किया है, जिसे पीड़िता मंजु अग्रवाल ने करीब पांच वर्ष पहले दायर किया था।
किन धाराओं में दर्ज होगा मामला
अदालत ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा
294, 500, 506, 511 और 34 के तहत अपराध पंजीबद्ध करने के निर्देश दिए हैं।
घटना का विवरण
अभियोजन के मुताबिक, घटना 3 नवंबर 2020 की है। उस दिन पीड़िता अपने पति को घर बुलाने के लिए कोतरा रोड स्थित सावित्री नगर में आरोपी के घर पहुंची थी। आरोप है कि इस दौरान दोनों आरोपियों ने उसे अश्लील गालियां दीं, सार्वजनिक रूप से अपमानित किया और धमकी भी दी।
पद के दुरुपयोग का भी आरोप
पीड़िता का आरोप है कि घटना के बाद प्रधान आरक्षक मुकेश त्रिपाठी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए उसी दिन उसके खिलाफ सिटी कोतवाली में मामला दर्ज करा दिया और लगातार दबाव व धमकी दी जाती रही।
पीड़िता ने उसी दिन सिटी कोतवाली में लिखित शिकायत भी दी, लेकिन पुलिस द्वारा कार्रवाई नहीं की गई। उल्टे उसे प्रताड़ित किए जाने के आरोप लगे।
अदालत की शरण में पहुंची पीड़िता
न्याय न मिलने पर पीड़िता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायालय ने 12 मार्च को आदेश जारी करते हुए आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज करने के निर्देश दिए।
अगली सुनवाई की तारीख
अदालत ने दोनों आरोपियों को 16 अप्रैल को न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।






