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जिंदगीनामा : सर्दी, सेहत के साथ खेल में कैरियर तराशने का मौसम

डॉ. नीरज गजेंद्र, वरिष्ठ पत्रकार

सर्दी का मौसम सबके लिए खास होता है। ठंडी हवा, कोहरे की चादर और धूप की नरम थपकियां, इसे और खूबसूरत बनाती हैं। रात को अलाव की गरमी। दिन में धूप सेंकने का आनंद। सेहत सुधारने का यह मौसम अनोखा होता है। यह नई ऊर्जा के साथ जीवन को गति देने का समय है। यह खेल के मैदान में मेहनत कर ताकत और हुनर को तराशने का मौसम है। आज खेल-कूद केवल मनोरंजन का नहीं, जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। पहले कहा जाता था, पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नवाब, खेलोगे-कूदोगे तो होवोगे खराब। अब यह कहावत बदल गई है। खेल से लाखों युवा अपना करियर बना रहे हैं। साथ ही, देश का नाम भी रोशन कर रहे हैं। यह सब सच्ची लगन और समर्पण से संभव है।

महाभारत काल के एकलव्य की कहानी हमें सिखाती है कि सच्ची लगन और समर्पण क्या होता है। बिना गुरु के उन्होंने दुनिया का सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर बनने की ठानी। उनकी एकाग्रता ऐसी थी कि उन्होंने कुत्ते के मुंह को तीरों से भर दिया, और कुत्ते को खरोंच तक नहीं आई। यह केवल ध्यान, अभ्यास और लक्ष्य पर केंद्रित रहने से संभव हुआ।

भारतीय खेल इतिहास में ऐसे कई नाम हैं, जिन्होंने यह साबित किया है कि खेल के माध्यम से भी न केवल सफलता पाई जा सकती है, बल्कि दुनिया में अपनी पहचान बनाई जा सकती है। मिल्खा सिंह, जो कठिन परिश्रम और आत्मविश्वास की मिसाल है। उनके जीवन का सफर यह दिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद, अगर आत्मबल और मेहनत हो, तो सफलता दूर नहीं। मैरी कॉम, जो मणिपुर के एक छोटे से गांव से निकलीं, आज दुनिया की महानतम मुक्केबाजों में से एक हैं। नीरज चोपड़ा ने भाला फेंक में अपनी कला को ऐसा तराशा कि भारत के लिए ओलंपिक में स्वर्ण पदक लाया। उनके खेल का स्तर यह दिखाता है कि सही दिशा में मेहनत और लक्ष्य साधने से असंभव कुछ भी नहीं।

खेल अनुशासन सिखाता है। यह धैर्य, समय प्रबंधन और टीम वर्क के गुण विकसित करता है। एक खिलाड़ी जानता है कि हर सेकंड कीमती है। यही गुण जीवन के अन्य पहलुओं में भी मददगार होते हैं। आज सर्दी के इस मौसम में स्कूल और कॉलेजों में खेल प्रतियोगिताएं हो रही हैं। पढ़ाई के साथ खेल-कूद को अपनाना जरूरी है। सरकार भी खेलों को बढ़ावा दे रही है। खेलो इंडिया और फिट इंडिया जैसे अभियान इसकी मिसाल हैं। तो, इस सर्दी, ठंडी हवा और धूप के बीच अपने लक्ष्य तय करें। चाहे वह पढ़ाई हो या खेल, सच्ची लगन और मेहनत से सफलता निश्चित है। एकलव्य की कहानी से प्रेरणा लें। अपने भीतर छुपे खिलाड़ी को पहचानें।