बिलासपुर रेलवे जोन की उपेक्षा पर उठी सवाल उठाने की आवाजें
बिलासपुर, 21 अप्रैल 2026। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर जोन की लंबे समय से उपेक्षा होती आ रही है। यह जोन हर साल माल लोडिंग के जरिए सबसे अधिक राजस्व अर्जित करता है, लेकिन सुविधाएं देने के मामले में इसे हमेशा ही प्राथमिकता में सबसे नीचे रखा गया है। इस मुद्दे पर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि भी चुप्पी साधे हुए हैं, जबकि यहां के सांसद तोखन साहू और उपमुख्यमंत्री अरुण साव जैसे महत्वपूर्ण नेता भी हैं।
यात्रियों की बढ़ती कठिनाइयाँ और रेलवे की स्थिति
गर्मियों की छुट्टियों में यात्रियों का दबाव बढ़ने पर रेलवे आमतौर पर विशेष ट्रेनों का संचालन करता है। इस बार भी रेलवे ने अतिरिक्त ट्रेनों का संचालन करने का वादा किया है, लेकिन बिलासपुर जोन की स्थितियां बेहद चिंताजनक नजर आ रही हैं। यात्रियों की समस्या यह है कि अब वेटिंग टिकट पर यात्रा करने की अनुमति नहीं दी जा रही है, जिससे यात्रियों को फिर से यात्रा निरस्त करने पर विवश होना पड़ता है।
यहां तक कि दक्षिण भारत के शहरों जैसे हैदराबाद और बेंगलुरु के लिए भी बिलासपुर से सीधी ट्रेनें बेहद कम हैं। कई यात्रियों को नागपुर जाकर कनेक्टिंग ट्रेन मात्र के लिए यात्रा करनी पड़ती है। राजधानी चेन्नई के लिए भी केवल एक ट्रेन सप्ताह में है।
अन्य जोनों की तुलना में बिलासपुर जोन की दयनीय स्थिति
रेलवे द्वारा हाल ही में जारी समर स्पेशल ट्रेनों की सूची में यह साफ दिखता है कि बिलासपुर जोन को बहुत कम ट्रेनों की मंजूरी मिली है। अन्य जोनों की तुलना में यहां की स्थिति अत्यंत निराशाजनक है।
- दक्षिण मध्य रेलवे: 124 ट्रेनों (1,184 ट्रिप) को मंजूरी
- पश्चिमी रेलवे: 106 ट्रेनों (2,078 ट्रिप) को मंजूरी
- उत्तर पश्चिमी रेलवे: 76 ट्रेनों (2,245 ट्रिप) को मंजूरी
- सेंट्रल रेलवे: 74 ट्रेनों (3,082 ट्रिप) को मंजूरी
- दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (बिलासपुर): केवल 10 ट्रेनों (122 ट्रिप) को मंजूरी
इससे साफ है कि बिलासपुर जोन को अन्य जोनों की तुलना में बहुत कम ट्रेनों का संचालन करने की अनुमति दी गई है, जो कि यात्रियों के लिए एक बड़ा निराशाजनक पहलू है।
निष्कर्ष: यात्रियों की समस्याओं का समाधान आवश्यक
बिलासपुर रेलवे जोन की सुविधाओं में कमी और यात्रियों की बढ़ती कठिनाइयाँ रेलवे प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन गई हैं। अधिक ट्रेनों की आवश्यकता को देखते हुए, जनप्रतिनिधियों और सरकारी अधिकारियों को इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान करना होगा। यदि ये मुद्दे आगे नहीं बढ़ाए गए, तो इससे यात्रियों की सुविधा पर लंबे समय तक नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। रेलवे को इस प्रारंभिक समस्या का समाधान कर बुनियादी सेवाओं को प्रदान करना चाहिए ताकि यात्रियों की परेशानियाँ दूर हों और वे सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा कर सकें।




