जंगल पर कब्ज़ा, कानून पर हमला: गरियाबंद की घटना एक खतरनाक संकेत”

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के हरदी जंगल में घटित यह घटना—जहां अतिक्रमण हटाने पहुंचे वन अमले पर जानलेवा हमला कर उन्हें बंधक बना लिया गया—न सिर्फ कानून व्यवस्था पर हमला है, बल्कि यह हमारे जंगलों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता का विषय भी है। यह केवल अतिक्रमण नहीं था, यह राज्य की सत्ता और उसके प्रतिनिधियों पर खुलेआम हमला था।

घटना का सार:  हरदी जंगल (सोहागपुर बिट) में अवैध रूप से जेसीबी चलाकर जंगल काटने की सूचना पर डिप्टी रेंजर अशोक सिन्हा के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम तड़के 4 बजे मौके पर पहुंची। लेकिन टीम को शायद यह अंदाज़ा नहीं था कि उन्हें एक सुनियोजित हमले का सामना करना पड़ेगा।

महिलाओं को ढाल बनाकर पहले तो टीम को घेर लिया गया, फिर टंगिया, डंडे और कुल्हाड़ी जैसे पारंपरिक हथियारों से हमला कर उन्हें दो घंटे तक बंधक बना लिया गया। यह हमला महज एक झगड़ा नहीं था—यह संगठित अवैध अतिक्रमण का सुनियोजित प्रतिरोध था।

सवाल खड़े होते हैं:

क्या वन विभाग के पास ऐसी जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में कार्यवाही के लिए पर्याप्त सुरक्षा और पुलिस सहायता उपलब्ध होती है?

क्या यह घटना उन संगठित माफियाओं की मौजूदगी का संकेत नहीं है, जो जंगलों पर कब्ज़ा करके सरकारी व्यवस्था को खुली चुनौती दे रहे हैं?

क्या अब अतिक्रमण केवल ज़मीन से जुड़ा मुद्दा नहीं, बल्कि सुरक्षा और अपराध का सवाल बन गया है?

वन कर्मियों की जान जोखिम में

इस मामले में यदि परिजनों ने समय पर पुलिस को सूचना नहीं दी होती, तो परिणाम और भी गंभीर हो सकते थे। थाना प्रभारी ओम प्रकाश यादव की टीम ने समय पर पहुंचकर बंधक कर्मचारियों को छुड़ाया, जो सराहनीय है। लेकिन यह भी सच है कि वन कर्मचारियों को अब अराजकता के बीच काम करना पड़ रहा है—जहां न उनके पास हथियार हैं, न पुलिस सुरक्षा।

यह सिर्फ जंगल नहीं, व्यवस्था की लड़ाई है

जंगल केवल पेड़-पौधों का समूह नहीं, यह पर्यावरण, जलवायु, जैवविविधता और आदिवासी संस्कृति का आधार है। जब जंगल पर अवैध कब्जा होता है, तो इसका सीधा नुकसान हम सभी नागरिकों को होता है।

आज अगर हम इन हमलावरों को “अतिक्रमणकारी” कहकर छोड़ दें, तो कल वे ही अपराधी बन जाएंगे जो राज्य की सम्पत्ति पर अधिकार जमाएंगे और सरकारी तंत्र को ठेंगा दिखाएंगे।

निष्कर्ष:

अब समय आ गया है कि वन विभाग को अर्धसैनिक बलों जैसी सुरक्षा, त्वरित पुलिस सहायता, और टेक्नोलॉजी का समर्थन मिले। साथ ही, ऐसे मामलों में सख्त और समयबद्ध कार्रवाई हो ताकि अराजक तत्वों को यह स्पष्ट संदेश जाए—जंगलों पर कब्जा नहीं, कानून का राज चलेगा।

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