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रायपुर स्टेशन बना पलायन का नया हब! भट्ठा सरदारों ने बदला पैतरा, प्रशासन बेखबर

रायपुर/महासमुंद। छत्तीसगढ़ में मजदूरों का पलायन लगातार बढ़ता जा रहा है। सबसे अधिक प्रभावित जिलों में महासमुंद और उससे लगे ओडिशा सीमा क्षेत्र शामिल हैं। स्थानीय प्रशासन द्वारा हाल ही में अवैध पलायन पर की गई सख्त कार्रवाई के बाद जहां महासमुंद क्षेत्र से सीधे होने वाला पलायन थम-सा गया है, वहीं अब भट्ठा सरदारों और दलालों ने नया रास्ता निकाल लिया है। राजधानी रायपुर रेलवे स्टेशन को अब पलायन का नया केंद्र बना दिया गया है।

रविवार को 400 मजदूरों का पलायन, भट्ठा सरदारों की नई चाल

सूत्रों के अनुसार, रविवार को महासमुंद और ओडिशा सीमा क्षेत्र से करीब 400 मजदूरों को रायपुर रेलवे स्टेशन के माध्यम से बाहर के राज्यों में भेजा गया।
दलालों ने पकड़ से बचने के लिए नया तरीका अपनाया है। अब मजदूरों को एक साथ ले जाने की बजाय यह कहा जाता है कि—

  • किसी भी निजी वाहन, बस या ऑटो से सीधे रायपुर स्टेशन पहुंचो

  • वहां पहुंचकर अलग-अलग परिवारों में भीड़ में घुलकर ट्रेन पकड़ो

इस पैतरे के कारण बड़े पैमाने पर हो रहा पलायन पकड़ में नहीं आता।

रविवार का दिन क्यों चुना गया?

दलालों ने जानबूझकर रविवार का दिन चुना है, क्योंकि—

  • श्रम विभाग और अन्य निगरानी तंत्र के कर्मचारी सरकारी अवकाश पर रहते हैं

  • रेलवे पुलिस (RPF/GRP) का काम सिर्फ सुरक्षा है, वे किसी को ट्रेन पर चढ़ने से रोकते नहीं, इसलिए पलायन रोकने का कोई दबाव नहीं रहता

  • भीड़ अधिक रहती है, जिससे मजदूरों का मूवमेंट आसानी से छिप जाता है

महासमुंद प्रशासन की कार्रवाई के बाद बदला रूट

महासमुंद जिले में पिछले दिनों अवैध पलायन पर की गई कार्रवाइयों के बाद दलाल अब जिले की स्टेशनों और बस अड्डों का उपयोग करने से बच रहे हैं।
यहां पकड़ की आशंका ज्यादा है, इसलिए रायपुर को नया सेफ जोन माना जा रहा है।

क्यों बढ़ रहा है महासमुंद क्षेत्र से पलायन?

  • ईंट भट्ठों और बड़े राज्यों की फैक्ट्रियों में मिलने वाली एडवांस रकम

  • स्थानीय स्तर पर मजदूरी की कमी

  • ठेकेदारों द्वारा दिहाड़ी से पहले नकद लालच

  • गांवों में बेरोजगारी और कर्ज का बोझ

प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती

रायपुर स्टेशन से हो रहा यह ‘अदृश्य पलायन’ प्रशासन के लिए नई चुनौती है। रेलवे स्टेशन पर निगरानी तंत्र न होने से दलालों के लिए यह आसान टारगेट बन गया है।

स्थानीय संगठनों का कहना है कि अगर इस पर अब भी नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले महीनों में रायपुर मध्य भारत का सबसे बड़ा पलायन केंद्र बन सकता है।