भारत में इजरायली राजदूत का बड़ा बयान: ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी
ब्रेकिंग न्यूज़: इजरायली राजदूत रुवेन अज़ार ने कहा है कि इजरायल ईरान और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों, जैसे कि हिज़्बुल्ला के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को जारी रखेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा के लिए जो भी आवश्यक होगा, इजरायल उस कार्रवाई को बार-बार करेगा।
अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति प्रतिबद्धता
इजरायली राजदूत ने ‘इंडिया टुडे’ के गौरव सावंत के साथ एक विशेष बातचीत में कहा कि इजरायल की कार्रवाईयों की नींव अंतरराष्ट्रीय कानून पर है। अज़ार ने कहा, "जब भी हमें ऐसा लगेगा कि ईरानी शासन सामूहिक विनाश के हथियार बना रहा है जो इजरायल के खिलाफ इस्तेमाल हो सकते हैं, हम कार्रवाई करेंगे।" उन्होंने इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर का स्पष्ट उल्लंघन बताया और आर्टिकल 51 का हवाला देते हुए कहा कि इजरायल का अपने रक्षा का अधिकार है।
क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में बदलाव
अज़ार ने यह भी बताया कि हाल की सैन्य घटनाओं के बाद क्षेत्रीय शक्ति संतुलन इजरायल के पक्ष में बदला है। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि क्षेत्रीय शक्ति का संतुलन हमारे पक्ष में बदल गया है।" उन्होंने इस बदलाव को खाड़ी देशों और व्यापक अंतरराष्ट्रीय समुदाय, जिसमें भारत भी शामिल है, के लिए फायदेमंद बताया।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायल ने फिलहाल ईरान के खिलाफ प्रत्यक्ष हमले रोक दिए हैं, और अब उनका ध्यान लेबनान में हिज़्बुल्ला पर केंद्रित है। अज़ार ने कहा, "अब हम हिज़्बुल्ला के खिलाफ अपने सैन्य प्रयासों को और तेज कर रहे हैं।"
दीर्घकालिक संघर्ष और राजनीतिक समाधान
अज़ार ने यह भी कहा कि इजरायल की पिछले में की गई कार्रवाइयां, जैसे कि सीरिया और इराक में परमाणु कार्यक्रमों के खिलाफ ऑपरेशन्स, उसके एकतरफा कार्रवाई के इरादे को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा, "हम उम्मीद करते हैं कि ऐसा फिर से करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।" ईरान पर दबाव बनाए रखने की आवश्यकता पर भी उन्होंने बल दिया, जिससे हो सकता है कि ईरान की नीति में बदलाव आए।
आतंकवादी समूहों के फिर से संगठित होने की संभावना पर सवाल उठाते हुए अज़ार ने कहा कि उन्हें कुछ राहत तो मिल सकती है, लेकिन वे जल्दी से पुनः संगठित नहीं हो सकेंगे। उन्होंने बताया कि इजरायल ने उनके अवसंरचना को काफी नुकसान पहुँचाया है।
संघर्ष विराम का महत्व और चुनौतियाँ
अभी हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम की घोषणा हुई थी, लेकिन इजरायल ने लेबनान में हिज़्बुल्ला की ठिकानों पर हमले जारी रखे हैं। दोनों पक्षों ने इस स्थिति को संघर्ष विराम का उल्लंघन बताया है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि लेबनान समझौते का हिस्सा नहीं है।
संघर्ष विराम की दीर्घकालिकता को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं, साथ ही अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD वैंस ने भी इसे संवेदनशील बताया है। जैसे-जैसे घटनाक्रम आगे बढ़ रहा है, खाड़ी देशों सहित अन्य देशों की नज़र इन घटनाओं पर है, जो सभी के लिए महत्वपूर्ण हैं।
समापन: अज़ार ने फिर से कहा कि इजरायल आत्म-रक्षा का अधिकार बनाए रखेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जब तक इजरायल को अपनी सुरक्षा के साथ खतरा महसूस होता है, उसकी सैन्य नीति पूर्ववत रहेगी।
इस प्रकार, क्षेत्र में स्थितियाँ और भी जटिल होती जा रही हैं, और दुनिया इजराइल तथा ईरान के बीच की गतिशीलता पर करीबी नजर बनाए हुए है।
