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भारत का डिजिटल भुगतान में 49% हिस्सा, UPI ने मनाया 10वां वर्ष!

यू०पी०आई के 10 साल: भारत ने बनाई वैश्विक मानक की पहचान

भारत की परिसंपत्ति पर बेहतरीन समाचार! भारत का एकीकृत भुगतान इंटरफेस (UPI) आज अपने 10वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, और इस अवसर पर सरकार ने घोषणा की है कि देश अब वैश्विक वास्तविक समय भुगतान लेनदेन का 49 प्रतिशत हिस्सेदार बन चुका है।

यूपीआई की उपलब्धियाँ

जनवरी 2026 में इस त्वरित भुगतान प्रणाली ने अकेले 21.70 अरब लेनदेन किए, जिनकी कुल मात्रा रु 28.33 लाख करोड़ रही। भारत में सभी खुदरा डिजिटल लेनदेन में UPI का हिस्सा 81 प्रतिशत है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने UPI को दुनिया का सबसे बड़ा वास्तविक समय भुगतान प्रणाली मानते हुए इसे 10 वर्षों के अंदर सफलतापूर्वक विकसित किया है।

सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि UPI की वृद्धि वॉल्यूम में 12,000 गुना और मूल्य में 4,000 गुना हुई है। यह केवल लेनदेन के वॉल्यूम तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार घरेलू अनौपचारिक बाजारों में भी हुआ है। यह ऑटो-रिक्शा चालकों से लेकर गांव के मंडियों और स्ट्रीट वेंडरों तक फैला हुआ है।

वित्तीय समावेशन की दिशा में कदम

एक घरेलू कार्यकर्ता अब साधारण स्मार्टफोन का उपयोग करके सेकंडों में राज्यों के बीच पैसे भेज सकता है। इस प्रणाली के माध्यम से शहरी और ग्रामीण, औपचारिक और अनौपचारिक के बीच की खाई लगातार कम हो रही है। यह एक निश्चित वित्तीय समावेशन की ओर बढ़ने का संकेत देता है।

भारत का डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र अब वैश्विक संदर्भ मॉडल के रूप में उभरा है। IMF और विश्व बैंक जैसे संस्थानों ने इसकी मात्रा, दक्षता और समावेशन की सराहना की है। UPI के संचालन की पहुँच संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस, मॉरीशस और कतर तक बढ़ गई है, जिससे क्रॉस-बॉर्डर लेनदेन और रेमिटेंस में मदद मिलती है।

भविष्य की योजनाएँ

भारत की इस स्वदेशी प्रणाली, जो एक दशक के भीतर विकसित हुई है, ने अब दुनिया में नेतृत्व किया है। यह शुरुआत उन लोगों को शामिल करने के लिए हुई थी जो बैंकिंग व्यवस्था से बाहर थे, लेकिन अब यह वास्तविक समय भुगतान के लिए वैश्विक मानक बन गया है। क्यू आर कोड से लेकर बिना कतार के लेनदेन तक, भारत की यात्रा समावेशी नवाचार की ताकत को दर्शाती है।

UPI अब एक बड़े वित्तीय प्लेटफॉर्म में विकसित हो रहा है। UPI लाइट छोटे और त्वरित भुगतानों के लिए समर्थन देता है, जबकि UPI ऑटोपे नियमित खर्चों जैसे कि उपयोगिता बिल और सब्सक्रिप्शन को सरल बनाता है। UPI पर क्रेडिट का विस्तार प्री-अप्रूव्ड क्रेडिट लाइनों तक पहुँच प्रदान करके हुआ है, जिससे NBFCs और फिनटेक कंपनियाँ ऋण देने, भुगतान करने और अनुकूलित वित्तीय उत्पादों की पेशकश कर रही हैं।

भारत का UPI केवल एक वित्तीय प्रणाली नहीं है; यह एक नया युग की शुरुआत का प्रतीक है।

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