ब्रेकिंग न्यूज़: हाई कोर्ट ने पत्नी की गुजारा भत्ता मांग को किया खारिज
जबलपुर, 12 अप्रैल 2026। एक महत्वपूर्ण न्यायिक मामले में, जबलपुर हाई कोर्ट ने एक पत्नी की गुजारा भत्ता की मांग को अस्वीकार कर दिया है। पत्नी ने अपने पति से सवा लाख रुपये भरण-पोषण के लिए मांगे थे, जबकि उसकी खुद की आय भी लगभग इसी स्तर की है। इस मामले ने कानूनी और सामाजिक चर्चा को जन्म दिया है।
मामले का परिचय
शादी के बाद केवल सात महीनों में, पति-पत्नि के बीच तनाव बढ़ गया। दोनों ने नवंबर 2022 में विवाह के बंधन में बंधने के बाद जून 2023 से अलग रहने का निर्णय लिया। पति ने परिवार न्यायालय में तलाक की याचिका दायर की थी। पत्नी ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत भरण-पोषण की मांग की। उसने अपने दावे में कहा कि उसकी वार्षिक आय 20 लाख रुपये है, जबकि उसके पति की सालाना आमदनी 30 लाख रुपये है। हालांकि, पति ने इस आरोप का खंडन किया, और फैमिली कोर्ट ने पत्नी की गुजारा भत्ता की मांग को खारिज कर दिया।
हाई कोर्ट का निर्णय
हाई कोर्ट ने परिवार न्यायालय के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि पति और पत्नी के बीच किसी भी प्रकार की आय में असमानता नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि पति-पत्नी की आय लगभग समान है और पत्नी पर कोई बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी नहीं है। इस मामले में कोर्ट ने टिप्पणी की कि पत्नी की याचिका केवल पति से पैसे ऐंठने का प्रयास है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सामाजिक दृष्टिकोण
इस निर्णय ने एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया है कि क्या आर्थिक रूप से सक्षम महिलाओं को अपने पतियों से भरण-पोषण की मांग करने का अधिकार है। माना जाता है कि महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता में वृद्धि ने कई पारिवारिक मामलों को जटिल बना दिया है। ऐसे मामलों में न्यायालयों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, जो सामाजिक मानदंडों और कानूनी तर्कों के बीच संतुलन स्थापित करने का कार्य करते हैं।
निष्कर्ष
हाई कोर्ट का यह निर्णय पति-पत्नी के बीच वित्तीय समानता और जिम्मेदारियों की बात पर एक उदाहरण पेश करता है। यद्यपि यह मामला अभी समाप्त नहीं हुआ है, लेकिन इस प्रकार के निर्णय निश्चित रूप से समाज में व्याप्त विचारधाराओं को चुनौती देते हैं। ऐसे मामलों में न्यायालयों द्वारा सावधानी पूर्वक विचार किया जाना आवश्यक है, ताकि परिवारों में संतुलन और समर्पण बना रहे।
